किशनगंज में वीडियो वायरल होते ही एसपी का बड़ा एक्शन, हिरासत में मारपीट के आरोप में SI सस्पेंड

किशनगंज। बिहार के किशनगंज जिले में पुलिस हिरासत में कथित मारपीट का मामला सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद किशनगंज पुलिस अधीक्षक ने बड़ी कार्रवाई करते हुए परिवीक्ष्यमान पुलिस अवर निरीक्षक नितेश कुमार वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस मामले में एक अन्य पुलिसकर्मी को भी लाइन हाजिर किया गया है। घटना के बाद पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं और पूरे मामले की जांच तेज कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार यह मामला गर्वनडंगा थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। यहां एक हत्या मामले की जांच के दौरान पुलिस पर हिरासत में लिए गए युवक के साथ मारपीट करने का आरोप लगा है। आरोप सामने आने के बाद पीड़ित ने पुलिस अधिकारियों से न्याय की मांग की थी। इसी बीच कथित मारपीट का एक वीडियो सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर वायरल हो गया, जिसके बाद मामला पुलिस मुख्यालय तक पहुंच गया।

बताया जा रहा है कि 14 मई 2026 को किशनगंज एसपी संतोष कुमार को व्हाट्सएप के जरिए एक वीडियो प्राप्त हुआ था। वीडियो में पुलिस हिरासत में एक युवक के साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया था। वीडियो सामने आते ही एसपी ने मामले को गंभीरता से लिया और तुरंत संबंधित अधिकारियों से जानकारी मांगी।

प्रारंभिक जांच में पता चला कि गर्वनडंगा थाना कांड संख्या 45/26 के तहत दर्ज उमेदा खातून हत्या मामले की पूछताछ के दौरान यह घटना हुई थी। पुलिस ने मृतका के बेटे को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। युवक का आरोप है कि पूछताछ के दौरान उसे बुरी तरह पीटा गया और हत्या का आरोप कबूल करने का दबाव बनाया गया।

पीड़ित युवक ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। उसने कहा कि जब उसने खुद को निर्दोष बताया तो उसे फर्जी एनकाउंटर तक की धमकी दी गई। युवक ने दावा किया कि उसकी मां की हत्या हुई थी, लेकिन असली अपराधियों को पकड़ने की जगह पुलिस उसी को आरोपी बनाने में जुट गई।

पीड़ित ने भावुक होकर कहा कि उसकी मां ने मेहनत और दूसरों के घरों में काम करके उसे पाला था और वह अपनी मां की हत्या करने के बारे में सोच भी नहीं सकता। उसने पुलिस प्रशासन से मांग की कि असली अपराधियों को गिरफ्तार किया जाए और निर्दोष लोगों को परेशान न किया जाए।

मामले के तूल पकड़ने के बाद एसपी संतोष कुमार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए परिवीक्ष्यमान पुलिस अवर निरीक्षक नितेश Kumar वर्मा को निलंबित कर दिया। उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि पुलिस विभाग में किसी भी तरह की मनमानी, हिरासत में प्रताड़ना या कानून के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इसके अलावा बी.एच.जी./410684 छठूलाल राय को भी तत्काल प्रभाव से पुलिस केंद्र वापस भेज दिया गया है। उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए जिला प्रशासन को पत्र भेजा जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

एसपी संतोष कुमार ने बताया कि वीडियो के आधार पर प्रथम दृष्टया यह मामला पुलिसकर्मियों की गंभीर लापरवाही और अनुचित आचरण का प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि निलंबित अधिकारी को सात दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। विभागीय जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीपीओ-2 को पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच का जिम्मा सौंपा गया है। उन्हें 24 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। पुलिस मुख्यालय इस बात की भी जांच कर रहा है कि क्या इस पूरे मामले में अन्य पुलिसकर्मी या अधिकारी भी शामिल थे।

सूत्रों के मुताबिक यदि जांच में थानाध्यक्ष कुंदन कुमार या अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस विभाग इस मामले को लेकर काफी सतर्क नजर आ रहा है क्योंकि वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई है।

घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कई लोगों ने पुलिस हिरासत में मारपीट की घटनाओं पर चिंता जताई है। लोगों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर किसी भी निर्दोष व्यक्ति के साथ हिंसक व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। वहीं कुछ लोगों ने एसपी की त्वरित कार्रवाई की सराहना भी की है।

दरअसल पूरा मामला बीते शनिवार को हुई एक बुजुर्ग महिला उमेदा खातून की हत्या से जुड़ा हुआ है। महिला की हत्या के बाद पुलिस जांच कर रही थी और इसी सिलसिले में उसके बेटे को हिरासत में लिया गया था। बाद में युवक ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उससे जबरन अपराध कबूल कराने की कोशिश की।

युवक द्वारा जारी वीडियो तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन पर दबाव बढ़ गया और वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल हस्तक्षेप करना पड़ा। इसके बाद एसपी ने पूरे मामले की समीक्षा कर संबंधित अधिकारी को निलंबित करने का फैसला लिया।

कानूनी जानकारों का मानना है कि हिरासत में किसी भी प्रकार की मारपीट कानून के खिलाफ है और यह मानवाधिकारों का उल्लंघन माना जाता है। ऐसे मामलों में पुलिस अधिकारियों को तय प्रक्रिया के अनुसार ही पूछताछ करनी चाहिए। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई के अलावा कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

फिलहाल किशनगंज पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाएगी। वहीं स्थानीय लोग इस मामले में आगे होने वाली कार्रवाई और जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

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