
Mukesh Sahani ने उत्तर प्रदेश में निषाद आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा और Sanjay Nishad पर बड़ा हमला बोला है। चंदौली में प्रेस वार्ता के दौरान सहनी ने कहा कि निषाद समाज को वर्षों से सिर्फ आश्वासन दिया गया, लेकिन आरक्षण का वादा अब तक पूरा नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि डॉ. संजय निषाद कभी आंदोलन के जरिए समाज की आवाज बने थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद अपने मूल मुद्दों से भटक गए। सहनी ने तंज कसते हुए कहा कि जब एक मंत्री खुद यह कह रहा है कि उसके समाज की बहू-बेटियों के साथ अन्याय हो रहा है और झूठे मुकदमे हो रहे हैं, तो उन्हें सत्ता छोड़कर समाज के साथ खड़ा होना चाहिए।
25 जुलाई से 101 दिनों की ‘संकल्प यात्रा’
मुकेश सहनी ने ऐलान किया कि 25 जुलाई से वीरांगना Phoolan Devi के शहादत दिवस पर उत्तर प्रदेश में 101 दिनों की संकल्प यात्रा निकाली जाएगी। इस यात्रा में गांव-गांव जाकर निषाद समाज को गंगाजल हाथ में लेकर यह संकल्प दिलाया जाएगा कि — “आरक्षण नहीं तो भाजपा को वोट नहीं।”
उन्होंने निषाद समाज को “गंगा पुत्र” बताते हुए कहा कि इस बार समाज अपना वोट नहीं बेचेगा और भाजपा का भ्रम टूट जाएगा।
“भाजपा चाहे तो तुरंत दे सकती है आरक्षण”
सहनी ने कहा कि भाजपा लंबे समय से अपने घोषणापत्र में मछुआरों और निषाद समाज को आरक्षण देने की बात करती रही है। केंद्र और उत्तर प्रदेश दोनों जगह भाजपा की सरकार है, ऐसे में अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति हो तो कैबिनेट में फैसला लेकर तुरंत आरक्षण दिया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि अगले छह महीने तक वे कोई बड़ा राजनीतिक फैसला नहीं लेंगे और चाहते हैं कि डॉ. संजय निषाद समाज को आरक्षण दिलाएं। अगर ऐसा नहीं होता है तो उन्हें इंडिया गठबंधन के साथ आकर सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़नी चाहिए।
राहुल गांधी का भी किया जिक्र
सहनी ने कहा कि Rahul Gandhi जातीय जनगणना और “जिसकी जितनी संख्या, उसकी उतनी हिस्सेदारी” की बात कर रहे हैं और 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा तोड़ने का संकल्प ले चुके हैं।
महंगाई और कानून व्यवस्था पर भी हमला
मुकेश सहनी ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि बढ़ती महंगाई, पेट्रोल-डीजल और दूध की कीमतों ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास कोई स्पष्ट विजन नहीं है और हर फैसला बिना तैयारी के लिया जा रहा है।
इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि निर्दोष लोगों को फंसाया जा रहा है और गरीब-पिछड़े वर्ग सबसे ज्यादा परेशान हैं।


