
बिहार की राजनीतिक सरगर्मी के बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) यानी भाकपा माले अपने सांगठनिक ढांचे को मजबूत करने और जनपक्षीय मुद्दों को धार देने के लिए एक बड़ा आयोजन करने जा रही है। न्याय, अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के संकल्प के साथ पार्टी का 12वां राज्य सम्मेलन शनिवार, 16 मई 2026 से दरभंगा के लहेरियासराय में प्रारंभ होने जा रहा है। तीन दिनों तक चलने वाला यह प्रांतीय सम्मेलन 18 मई तक संचालित होगा, जिसमें राज्यभर से पार्टी के नीति-निर्धारक, जनसंगठनों के प्रतिनिधि और जमीनी कार्यकर्ता शिरकत करेंगे। इस बड़े सांगठनिक समागम को लेकर भागलपुर प्रमंडल सहित पूरे सूबे में वामपंथी खेमे की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। शुक्रवार को भागलपुर जिले के विभिन्न शहरी और ग्रामीण इलाकों में सम्मेलन के मुख्य मुद्दों, किसान-मजदूर अधिकारों और जन-समस्याओं को लेकर व्यापक स्तर पर चलाया गया प्रचार-प्रसार अभियान संपन्न हो गया। इसके तुरंत बाद जिले के तमाम शीर्ष नेता और प्रतिनिधि दरभंगा के लिए रवाना हो गए हैं।
ऐतिहासिक लहेरियासराय में सजेगा मंच, तेजस्वी और दीपंकर की साझा रैली
सांगठनिक दृष्टिकोण से इस सम्मेलन को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, विशेषकर इसके खुले सत्र को लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी उत्सुकता है। मढ़ौरा और भागलपुर के सांगठनिक प्रभारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, 16 मई को सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत देश और समाज के लिए प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ होगी। इसके तुरंत बाद सम्मेलन के खुले सत्र के तहत एक विशाल आम सभा का आयोजन किया जाएगा। इस आम सभा के मंच पर बिहार की विपक्षी राजनीति के दो बड़े धुरंधर एक साथ हुंकार भरते नजर आएंगे। मुख्य वक्ता के रूप में भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य जनसमूह को संबोधित करेंगे, जबकि बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी इस मंच को साझा करते हुए अपनी बात रखेंगे। वामपंथी और राष्ट्रीय जनता दल के शीर्ष नेतृत्व का यह जुगलबंदी राज्य की भावी राजनीतिक दिशा और विपक्षी एकजुटता की मजबूती का एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। खुले सत्र की समाप्ति के बाद प्रतिनिधि सत्र की शुरुआत होगी जो 18 मई तक लगातार चलेगा, जिसमें विभिन्न सांगठनिक प्रस्तावों पर गंभीर बहस होगी।
भागलपुर से प्रतिनिधियों का बड़ा जत्था दरभंगा रवाना
सम्मेलन में भागलपुर जिले की भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए शुक्रवार की देर रात प्रमंडल के शीर्ष नेताओं और सक्रिय प्रतिनिधियों का एक बड़ा जत्था दरभंगा के लिए प्रस्थान कर गया। इस जत्थे में पार्टी के विभिन्न आनुषंगिक संगठनों, मजदूर यूनियनों और महिला संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं। दरभंगा जाने वाले मुख्य प्रतिनिधियों में भाकपा माले के राज्य कमेटी सदस्य एसके शर्मा, भागलपुर के जिला सचिव महेश प्रसाद यादव और ऐक्टू (AICCTU) के राज्य सचिव मुकेश मुक्त प्रमुख रूप से शामिल हैं। इनके अलावा पार्टी के राज्य जेंडर सेल की सदस्य अरुणाभ शेखर, नगर सचिव विष्णु कुमार मंडल, नवगछिया के प्रखंड सचिव गौरीशंकर राय, कहलगांव के प्रखंड सचिव रणधीर यादव, जिला कमेटी सदस्य आशुतोष कुमार और नवगछिया प्रखंड कमेटी सदस्य राधेश्याम रजक भी इस सांगठनिक समागम का हिस्सा बनने के लिए रवाना हुए हैं। विशेष आमंत्रण पर भाकपा माले के पूर्व जिला सचिव और सामाजिक न्याय आंदोलन बिहार के संरक्षक रिंकू यादव भी बतौर अतिथि इस राज्य सम्मेलन में शामिल होने के लिए दरभंगा पहुंचे हैं, जो वहां सामाजिक न्याय के एजेंडे पर अपने विचार साझा करेंगे।
राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर तीखा विमर्श, भाजपा पर साधा निशाना
भाकपा माले के नगर प्रभारी मुकेश मुक्त ने सम्मेलन के मुख्य एजेंडे और राजनीतिक प्रस्तावों की रूपरेखा साझा करते हुए वर्तमान सत्ता संरचना पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि बिहार में जनता के वास्तविक जनादेश की अनदेखी करके सत्ता का संचालन किया जा रहा है, जिसे वे लोकतंत्र के अपहरण की संज्ञा दे रहे हैं। माले नेतृत्व का कहना है कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था ने राज्य को एक बेहद संवेदनशील और खतरनाक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां दमन और कारपोरेट समर्थक नीतियों का बोलबाला बढ़ रहा है। पार्टी नेताओं ने संकल्प दोहराया कि बिहार की माटी ने हमेशा से अन्याय, तानाशाही और प्रतिगामी ताकतों के खिलाफ एक ऐतिहासिक संघर्ष लड़ा है और हर बार जनविरोधी ताकतों को शिकस्त दी है। इस सम्मेलन के माध्यम से राज्य के मजदूरों, किसानों, छात्रों, युवाओं और महिलाओं को एक साझा मंच पर एकजुट करके फासीवादी और कारपोरेट समर्थक नीतियों के खिलाफ एक निर्णायक जंग छेड़ी जाएगी, ताकि संविधान, जनअधिकार व सामाजिक न्याय की रक्षा की जा सके।
किसान, मजदूर और वंचित वर्ग के सवालों पर आंदोलन तेज करने की रणनीति
तीन दिवसीय इस राज्य सम्मेलन के दौरान केवल राजनीतिक प्रस्ताव ही पारित नहीं होंगे, बल्कि आम जनता के आर्थिक और सामाजिक अधिकारों को लेकर भी एक व्यापक आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी। भाकपा माले का मानना है कि वर्तमान में देश और राज्य के भीतर आम नागरिकों, खेतिहर मजदूरों और सीमांत किसानों के हितों को पूरी तरह दरकिनार किया जा रहा है। पूंजीपतियों और बड़े औद्योगिक घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई जा रही नीतियों के खिलाफ सड़क से सदन तक आवाज बुलंद की जाएगी।
पार्टी के मुख्य वैचारिक मुद्दों और चिंताओं को निम्नलिखित बिंदुओं के जरिए समझा जा सकता है:
- चार लेबर कोड का विरोध: वामपंथी संगठनों का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चार नए लेबर कोड के जरिए देश के करोड़ों मजदूरों द्वारा दशकों के लंबे संघर्ष और कुर्बानियों के बाद हासिल किए गए बुनियादी श्रम अधिकारों को छीन लिया गया है। सम्मेलन में इन कोड्स को वापस लेने और श्रम सुधारों को जनपक्षीय बनाने की मांग उठाई जाएगी।
- किसानों की भूमि का जबरन अधिग्रहण: विकास के बड़े-बड़े और भ्रामक दावों की आड़ में ग्रामीण इलाकों के गरीब किसानों की उपजाऊ जमीन को जबरन अधिग्रहित करने की प्रवृत्तियों पर चिंता जताई गई है। झूठे विकास के नाम पर मूल निवासियों और किसानों को उजाड़ने की नीतियों के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
- वंचितों और महिलाओं पर बढ़ते हमले: देश के विभिन्न हिस्सों और राज्य के भीतर दलितों, आदिवासियों, अत्यंत पिछड़े वर्गों, धार्मिक अल्पसंख्यकों और महिलाओं के खिलाफ हिंसा और सामाजिक भेदभाव की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। इन वर्गों को सुरक्षा और विधिक न्याय दिलाने के लिए सामाजिक न्याय के मोर्चे को और मजबूत किया जाएगा।
सांगठनिक पुनर्गठन और नई राज्य कमेटी का चुनाव
दरभंगा के लहेरियासराय में आयोजित हो रहे इस 12वें राज्य सम्मेलन का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण सांगठनिक चरण 18 मई को पूरा होगा। प्रतिनिधि सत्र के दौरान पिछले वर्षों में किए गए आंदोलनों की समीक्षा की जाएगी, सांगठनिक कमजोरियों की पहचान होगी और भविष्य के लिए एक नया सांगठनिक ढांचा तैयार किया जाएगा। सम्मेलन के समापन सत्र में सर्वसम्मति या लोकतांत्रिक विधिक प्रक्रिया के जरिए भाकपा माले की नई राज्य कमेटी का चुनाव संपन्न होगा। यह नई प्रांतीय कमेटी आने वाले वर्षों में बिहार के भीतर पार्टी के राजनीतिक निर्णयों, आंदोलनों और सांगठनिक विस्तार की मुख्य धुरी होगी। भागलपुर से गए प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों का कहना है कि इस सम्मेलन से निकलने वाले निष्कर्ष और रणनीतियां राज्य की जनविरोधी नीतियों को चुनौती देने और जनता के अधिकारों की बहाली के लिए एक मील का पत्थर साबित होंगी।


