
भागलपुर। बिहार सरकार द्वारा किसानों के कल्याण के लिए संचालित विभिन्न महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ धरातल पर हर पात्र व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए जिला प्रशासन ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। इसी सिलसिले में शुक्रवार, 15 मई 2026 को भागलपुर के ऐतिहासिक समीक्षा भवन में कृषि पंजीकरण कार्य की ब्लॉक-वार प्रगति को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता भागलपुर के जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने की। समीक्षा के दौरान जब विभिन्न प्रखंडों में कृषि पंजीकरण और डेटा अपलोडेड करने की गति के आंकड़े सामने आए, तो जिलाधिकारी ने कई इलाकों में चल रही धीमी प्रगति पर गहरी नाराजगी और असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसानों से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिलाधिकारी ने संबंधित प्रखंड कृषि पदाधिकारियों (BAO) और अंचल अधिकारियों (CO) को काम के ढर्रे में तुरंत सुधार लाने और पूरी मुस्तैदी के साथ लक्ष्य को हासिल करने का कड़ा निर्देश जारी किया है।
राजस्व और कृषि विभाग के बीच बेहतर तालमेल का आदेश, जमाबंदी सूची होगी साझा
कृषि पंजीकरण की प्रक्रिया को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए भूमि रिकॉर्ड का सत्यापन सबसे अनिवार्य कड़ी माना जाता है। बैठक के दौरान इस बात पर गहन मंथन हुआ कि कई किसान भूमि स्वामित्व के दस्तावेजों और जमाबंदी के सत्यापन में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों के कारण पंजीकरण कराने से वंचित रह जाते हैं। इस समस्या का स्थाई समाधान निकालते हुए जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने जिले के सभी अंचल अधिकारियों को एक महत्वपूर्ण और विधिक निर्देश जारी किया है।
अंचल अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले उन सभी किसानों की एक समेकित सूची तैयार करें जिनकी जमाबंदी का कार्य पूरी तरह से डिजिटल और भौतिक रूप से संपन्न हो चुका है। इस सूची को पूरी तरह से पंचायत-वार व्यवस्थित किया जाएगा। इसके बाद, सभी सीओ इस सत्यापित सूची को संबंधित प्रखंड कृषि पदाधिकारियों को तुरंत उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे। राजस्व और कृषि विभाग के बीच इस सीधे सूचना समन्वय से उन वास्तविक भूमिदाता किसानों की पहचान बेहद आसान हो जाएगी जो सरकारी अनुदान और वित्तीय सहायता योजनाओं के वास्तविक हकदार हैं। यह कदम दफ्तरों के बीच फाइलों के चक्कर काटने की प्रक्रिया को समाप्त करेगा और प्रगणकों को सीधे लक्षित किसानों तक पहुँचने में मदद करेगा।
किसान सलाहकारों को मिला अल्टीमेटम, 18 मई तक शत-प्रतिशत ई-केवाईसी का लक्ष्य
बैठक में डिजिटल सत्यापन की धीमी रफ्तार को लेकर भी अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई। केंद्र और राज्य सरकार की डीबीटी (Direct Benefit Transfer) आधारित योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और राज्य बीज-खाद सब्सिडी का लाभ सीधे खाते में भेजने के लिए ई-केवाईसी (e-KYC) होना अनिवार्य है। जिलाधिकारी ने इस संबंध में प्रखंड कृषि पदाधिकारियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार बनाते हुए एक सख्त समय-सीमा (डेडलाइन) निर्धारित कर दी है।
प्रखंड कृषि पदाधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में तैनात सभी किसान सलाहकारों और कृषि समन्वयकों को तत्काल प्रभाव से मैदानी स्तर पर सक्रिय करें। इन सभी मैदानी कर्मियों को गांव-गांव और पंचायत स्तर पर जाकर विशेष अभियान मोड में काम करना होगा। जिलाधिकारी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि आगामी 18 मई तक उन सभी किसानों का ई-केवाईसी कार्य हर हाल में शत-प्रतिशत पूर्ण हो जाना चाहिए जिनकी सूची राजस्व विभाग द्वारा प्रदान की जाएगी। जो किसान सलाहकार इस तय समय-सीमा के भीतर अपने आवंटित क्षेत्र के किसानों का सत्यापन पूरा करने में विफल रहेंगे, उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनहीनता के तहत सख्त दंडात्मक और प्रशासनिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
20 मई को जिलाव्यापी मेगा कैंप का आयोजन, छूटे हुए किसानों का होगा ऑन-स्पॉट रजिस्ट्रेशन
ई-केवाईसी की प्रक्रिया संपन्न होने के ठीक बाद, जिला प्रशासन ने किसानों को एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं देने के लिए एक बड़े आयोजन की रूपरेखा तैयार की है। जिलाधिकारी ने घोषणा की है कि आगामी 20 मई को पूरे भागलपुर जिले के सभी प्रखंड मुख्यालयों और चिन्हित बड़े केंद्रों पर एक विशाल ‘कृषि पंजीकरण मेगा कैंप’ का आयोजन किया जाएगा। इस मेगा कैंप का मुख्य उद्देश्य उन सभी किसानों का ऑन-स्पॉट कृषि पंजीकरण सुनिश्चित करना है जो अब तक किसी भी कारण से सरकारी पोर्टल पर अपनी प्रविष्टि दर्ज नहीं करा सके हैं।
इस मेगा कैंप में कृषि विभाग, सांख्यिकी विभाग, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के संचालक और बैंक प्रतिनिधि एक साथ मौजूद रहेंगे। किसान अपने आवश्यक भूमि दस्तावेज, आधार कार्ड और बैंक पासबुक लेकर इस कैंप में आ सकेंगे, जहाँ उनका पंजीकरण तुरंत डिजिटल माध्यम से पूरा कर उन्हें विशिष्ट किसान पंजीकरण संख्या प्रदान कर दी जाएगी। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस मेगा कैंप के आयोजन का प्राथमिक ध्येय यही है कि जिले का कोई भी वास्तविक और जरूरतमंद किसान सरकारी लाभों से वंचित न रह जाए। समय पर पंजीकरण होने से आगामी फसलों के लिए मिलने वाले डीजल अनुदान, इनपुट सब्सिडी और मौसम आधारित फसल बीमा का लाभ सीधे और बिना किसी बिचौलिए के किसानों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया जा सकेगा।
वरिष्ठ अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग और अंतर-विभागीय समन्वय की जिम्मेदारी
समीक्षा बैठक के अंतिम चरण में जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय स्थापित कर टीम भावना के साथ काम करने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि कृषि हमारे जिले की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों को समय पर सुविधाएं देना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस कार्य की निरंतर निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जिले के आला अधिकारियों को भी विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जिले का पूरा वरिष्ठ प्रशासनिक अमला मुस्तैद दिखाई दिया। बैठक में मुख्य रूप से उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह, अपर समाहर्ता दिनेश राम और सूचना व जनसंपर्क विभाग के संयुक्त निदेशक नागेंद्र कुमार गुप्ता सहित कृषि विभाग के जिला स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित थे। उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह और अपर समाहर्ता दिनेश राम को निर्देश दिया गया है कि वे अंचल अधिकारियों और प्रखंड कृषि पदाधिकारियों के बीच होने वाले डेटा ट्रांसफर और 20 मई को आयोजित होने वाले मेगा कैंप की तैयारियों की दैनिक आधार पर समीक्षा करेंगे। संयुक्त निदेशक नागेंद्र कुमार गुप्ता को इस पूरे अभियान और मेगा कैंप के संबंध में ग्रामीण इलाकों में व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने को कहा गया है ताकि सुदूर दियारा और सुदूरवर्ती क्षेत्रों के किसानों तक भी इस कैंप की जानकारी समय पर पहुँच सके और वे इसका अधिकतम लाभ उठा सकें। सभी प्रखंडों के प्रभारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी दैनिक प्रगति रिपोर्ट सीधे जिला मुख्यालय को प्रेषित करेंगे।


