​सीतामढ़ी में निगरानी का बड़ा एक्शन: पुपरी नगर परिषद का कनीय अभियंता विजय कुमार शर्मा ₹1.45 लाख रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

सीतामढ़ी/पटना, 15 मई 2026। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की मुख्यालय टीम ने शुक्रवार को एक बड़ी सफलता हासिल की है। सीतामढ़ी जिले के पुपरी स्थित जनकपुर रोड नगर परिषद कार्यालय में पदस्थापित कनीय अभियंता (जूनियर इंजीनियर) विजय कुमार शर्मा को एक लाख पैंतालीस हजार रुपये की भारी-भरकम घूस लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। निगरानी विभाग की इस अचानक और त्वरित कार्रवाई से पुपरी नगर परिषद सहित पूरे जिले के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। कनीय अभियंता को नगर परिषद कार्यालय परिसर के भीतर ही उस समय दबोचा गया, जब वह परिवादी से रिश्वत की रकम अपने हाथ में ले रहा था। ब्यूरो की टीम आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद तुरंत अपने साथ पटना लेकर रवाना हो गई है, जहाँ कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेजने की तैयारी की जा रही है।

ठेकेदारी के बिल और भविष्य के कार्यों के एवज में मांगी थी मोटी रकम

​इस पूरे मामले की शुरुआत पुपरी के स्थानीय संवेदक (ठेकेदार) और परिवादी मुरली मनोहर द्वारा दर्ज कराई गई एक गोपनीय शिकायत से हुई थी। पुपरी के जनकपुर रोड निवासी शंभू प्रसाद के पुत्र मुरली मनोहर ने नगर परिषद क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़ी दो अलग-अलग योजनाओं का टेंडर हासिल किया था। इन दोनों आवंटित कार्यों को उन्होंने तय समय-सीमा के भीतर पूरी गुणवत्ता के साथ संपन्न कर दिया था। कार्य पूर्ण होने के पश्चात विभाग की ओर से दोनों योजनाओं के विपत्रों (बिल) का भुगतान भी ठेकेदार के खाते में कर दिया गया था।

आवंटित कार्यों और उनके बिलों का वित्तीय विवरण:

  • प्रथम कार्य का कुल बिल: ₹88,61,200 (अठासी लाख इकसठ हजार दो सौ रुपये)
  • द्वितीय कार्य का कुल बिल: ₹80,18,400 (अस्सी लाख अठारह हजार चार सौ रुपये)
  • कुल भुगतान की गई राशि: ₹1,68,79,600 (एक करोड़ अड़सठ लाख उनासी हजार छह सौ रुपये)

​इन दोनों बड़े कार्यों का भुगतान होने के बाद कनीय अभियंता विजय कुमार शर्मा की नीयत डोल गई। उसने पूर्व में संपन्न हो चुके इन कार्यों के एवज में अपने तकनीकी कमीशन (प्रतिशत) की मांग शुरू कर दी। इसके साथ ही आरोपी अभियंता ने संवेदक को यह प्रलोभन और धमकी भी दी कि यदि उसे इस राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो भविष्य में नगर परिषद पुपरी द्वारा आवंटित होने वाले नए विकास कार्यों के टेंडर में रोड़े अटकाए जाएंगे और आगे कोई काम आवंटित नहीं होने दिया जाएगा। भविष्य के ठेके हासिल करने और पुराने कार्यों के शांतिपूर्ण निपटारे के नाम पर कनीय अभियंता द्वारा एक लाख पैंतालीस हजार रुपये की रिश्वत की मांग पर अड़े रहने के कारण परिवादी ने कानून का सहारा लेने का मन बनाया।

निगरानी मुख्यालय में शिकायत और धावे दल का रणनीतिक गठन

​कनीय अभियंता के लगातार बढ़ते दबाव और प्रताड़ना से तंग आकर संवेदक मुरली मनोहर ने पटना स्थित निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के मुख्य कार्यालय में एक लिखित आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई। ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस शिकायत को प्राथमिक स्तर पर दर्ज किया। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत सबसे पहले इस शिकायत का गुप्त रूप से भौतिक और तकनीकी सत्यापन (वेरिफिकेशन) कराया गया।

​निगरानी के विशेष जांच अधिकारियों ने अपनी गोपनीय तफ्तीश और सत्यापन के क्रम में यह पाया कि कनीय अभियंता विजय कुमार शर्मा द्वारा परिवादी से वास्तव में ₹1,45,000 की रिश्वत मांगी जा रही है और बिना पैसे लिए वह फाइलों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार नहीं है। प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ घूस मांगे जाने के पुख्ता और वैज्ञानिक प्रमाण मिलने के बाद, ब्यूरो ने 14 मई 2026 को निगरानी थाना कांड संख्या-057/2026 के तहत एक नियमित प्राथमिकी दर्ज की। मामले के अनुसंधान और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए ब्यूरो के तेजतर्रार पुलिस उपाधीक्षक (DSP) पवन कुमार-I के नेतृत्व में एक विशेष धावा दल (ट्रैप टीम) का गठन किया गया, जिसमें कई विधिक और तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल किया गया।

नगर परिषद कार्यालय परिसर में बिछाया गया जाल, ऐसे दबोचा गया घूसखोर

​प्राथमिकी दर्ज होने के अगले ही दिन, यानी शुक्रवार 15 मई 2026 को डीएसपी पवन कुमार-I के नेतृत्व में गठित निगरानी का धावा दल पटना से सीतामढ़ी के पुपरी के लिए रवाना हुआ। टीम ने स्थानीय पुलिस को भनक लगे बिना बेहद गुप्त तरीके से जनकपुर रोड स्थित नगर परिषद कार्यालय के आसपास अपनी रणनीतिक घेराबंदी कर दी। सादे लिबास में निगरानी के जांबाज अधिकारी कार्यालय के अलग-अलग कोनों और गलियारों में तैनात हो गए। योजना के मुताबिक, परिवादी मुरली मनोहर केमिकल युक्त नोटों से भरी केमिकल लगी राशि लेकर कनीय अभियंता विजय कुमार शर्मा के पास पहुंचा।

​जैसे ही कनीय अभियंता ने अपने चेंबर और कार्यालय परिसर के समीप परिवादी से वह एक लाख पैंतालीस हजार रुपये की नगद राशि स्वीकार की और उसे अपनी जेब व दराज में रखने का प्रयास किया, ठीक उसी समय पहले से घात लगाए बैठी निगरानी की टीम ने उस पर धावा बोल दिया। कनीय अभियंता को संभलने का मौका तक नहीं मिला और टीम के सदस्यों ने उसके दोनों हाथ पकड़ लिए। इसके बाद जब रासायनिक प्रक्रिया के तहत आरोपी के हाथों को सोडियम कार्बोनेट के घोल में धुलवाया गया, तो पानी का रंग तुरंत गुलाबी हो गया, जो इस बात का अकाट्य वैज्ञानिक प्रमाण है कि उसने रिश्वत के नोटों को छुआ था। इस रंगे हाथ गिरफ्तारी के बाद दफ्तर के भीतर काम कर रहे अन्य कर्मियों के बीच अफरा-तफरी मच गई।

विशेष न्यायालय मुजफ्फरपुर में होगी पेशी, आगे की कड़ियों की तलाश

​गिरफ्तारी के तुरंत बाद निगरानी की टीम ने कनीय अभियंता विजय कुमार शर्मा के पास से घूस की पूरी रकम बरामद कर उसे सील कर दिया। इसके बाद पुपरी नगर परिषद कार्यालय में ही आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी की गई और जब्ती सूची तैयार की गई। टीम ने आरोपी अभियंता के दराज और अलमारी से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण फाइलों और दस्तावेजों को भी अपने कब्जे में ले लिया है ताकि यह जांचा जा सके कि विकास कार्यों की फाइलों को किस स्तर पर अटकाया जा रहा था।

​पुपरी कार्यालय परिसर से कनीय अभियंता को अभिरक्षा में लेने के बाद टीम उसे लेकर मुजफ्फरपुर और पटना के विभागीय कार्यालयों की ओर रवाना हो गई। ब्यूरो के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी कनीय अभियंता विजय कुमार शर्मा से पटना मुख्यालय में गहन पूछताछ की जा रही है। इस पूछताछ के दौरान यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि इस रिश्वतखोरी के सिंडिकेट में क्या नगर परिषद के कुछ अन्य वरीय अधिकारी या जनप्रतिनिधि भी शामिल थे। पूछताछ की विधिक प्रक्रिया और बयान दर्ज होने के बाद अभियुक्त को माननीय विशेष न्यायालय, निगरानी, मुजफ्फरपुर के समक्ष न्यायिक उपस्थापन (प्रोडक्शन) के लिए पेश किया जाएगा। इसके साथ ही, निगरानी ब्यूरो की अन्य विंग आरोपी अभियंता के पैतृक और वर्तमान आवासों की भी तलाशी लेने की योजना बना रही है ताकि उसकी आय से अधिक संपत्ति (DA Case) के इनपुट एकत्र किए जा सकें। मामले में अग्रतर वैज्ञानिक अनुसंधान की कार्रवाई तेजी से जारी है।

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