
भागलपुर/कजरैली। जिले के कजरैली थाना क्षेत्र अंतर्गत बेलशिरा चौक के समीप गुरुवार की सुबह एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। एक 28 वर्षीय युवक का शव उसके अपने ही घर के कमरे में फंदे से लटका हुआ पाया गया। मृतक की पहचान बेलशिरा चौक निवासी मनोज साह के मंझले पुत्र चंचल कुमार के रूप में हुई है। घटना की जानकारी मिलते ही मृतक के परिवार में कोहराम मच गया और रोने-बिलखने की आवाजें गूंजने लगीं। देखते ही देखते कजरैली और उसके आसपास के आधा दर्जन गांवों के सैकड़ों ग्रामीण घटनास्थल पर एकत्र हो गए। स्थानीय स्तर पर दी गई सूचना के बाद कजरैली थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और शव को अपने कब्जे में लेकर जांच की प्रक्रिया शुरू की। पुलिस ने प्रथम दृष्टया इसे पारिवारिक और वैवाहिक तनाव के कारण उपजा आत्महत्या का मामला माना है। घटनास्थल पर वैज्ञानिक साक्ष्यों को सुरक्षित करने के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की टीम को भी बुलाया गया, जिसने बारीकी से कमरे की जांच की है।
श्राद्ध का भोज खाकर लौटा था युवक, सुबह कमरे में दिखा खौफनाक मंजर
पारिवारिक सूत्रों और पड़ोसियों से मिली जानकारी के अनुसार, चंचल कुमार भागलपुर शहर में गन्ने के रस की मशीन चलाकर अपने परिवार की आजीविका में सहयोग करता था। बुधवार की रात वह रोज की तरह काम से लौटा था। हाल ही में उसके गन्ना रस मशीन के मालिक का निधन हो गया था, जिनके श्राद्ध कर्म का भोज आयोजित था। बुधवार की रात लगभग 10:00 बजे चंचल उसी श्राद्ध भोज में शामिल होकर अपने घर वापस आया था। घर लौटने के बाद उसकी सामान्य बातचीत हुई और वह अपने पिता के कमरे के ठीक बगल वाले कमरे में सोने के लिए चला गया। रात के समय किसी को भी इस बात का आभास नहीं था कि चंचल के मन में कोई आत्मघाती विचार चल रहा है।
गुरुवार की सुबह जब काफी देर तक चंचल के कमरे का दरवाजा नहीं खुला, तो परिजनों को कुछ अनहोनी की आशंका हुई। खिड़की से जब भीतर झांककर देखा गया, तो परिजनों के पैरों तले से जमीन खिसक गई। चंचल का शरीर छत के पंखे से उसकी पत्नी की एक साड़ी के सहारे फंदे पर झूल रहा था। परिजनों की चीख-पुकार सुनकर आस-पास के ग्रामीण दौड़कर वहां पहुँचे और तुरंत इसकी सूचना कजरैली पुलिस को दी गई। कजरैली थाना के प्रभारी थानाध्यक्ष चनवीर यादव पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे और बंद दरवाजे को खोलकर शव को नीचे उतरवाया। पुलिस ने शव का पंचनामा (इनक्वेस्ट रिपोर्ट) तैयार किया और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय (मायागंज अस्पताल) भेज दिया।
10 महीने पहले हुई थी शादी, 6 महीने बाद ही बिखरने लगा वैवाहिक जीवन
इस दुखद घटना के पीछे एक गहरा पारिवारिक और वैवाहिक विवाद सामने आ रहा है, जिसने इस हंसते-खेलते युवक को मौत के दरवाजे तक पहुँचा दिया। चंचल कुमार का विवाह अभी महज 10 महीने पहले, यानी पिछले वर्ष खगड़िया जिले के मानसी थाना क्षेत्र अंतर्गत उस्मानी गांव में अत्यंत धूमधाम के साथ हुआ था। शादी के शुरुआती छह महीनों तक पति-पत्नी के बीच सब कुछ सामान्य और खुशहाल रहा। दोनों के बीच आपसी तालमेल बेहतर था, लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे वैवाहिक जीवन में कड़वाहट और विवाद शुरू हो गया।
ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, चंचल को नशे की लत थी। वह अक्सर नशे का आदी हो चुका था, जिसके कारण घर में आए दिन कलह की स्थिति बनी रहती थी। नशे की इस आदत का सीधा असर उसके वैवाहिक जीवन पर पड़ा। पत्नी और उसके मायके वालों ने कई बार चंचल को समझाने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ। पारिवारिक विवाद इस हद तक बढ़ गया कि दोनों के बीच बातचीत बंद हो गई और मामला सीधे कानूनी चौखट तक पहुँच गया।
महिला थाने में शिकायत और शादी का खर्च लौटाने का भारी दबाव
विवाद जब नियंत्रण से बाहर हो गया, तो चंचल की पत्नी के मायके वालों ने इस मामले को लेकर भागलपुर के महिला थाने में एक लिखित आवेदन दे दिया। पुलिस और स्थानीय स्तर पर हुए हस्तक्षेप के बाद दोनों पक्षों के बीच समझौते की बातचीत शुरू हुई। महज चार दिन पहले, चंचल की पत्नी अपने मायके वालों के साथ बेलशिरा चौक स्थित घर पहुँची और शादी के समय उपहार में मिले तमाम सामान, जेवरात और कपड़े समेटकर अपने मायके उस्मानी गांव चली गई।
इस अलगाव के दौरान दोनों पक्षों के बीच एक लिखित समझौता भी हुआ, जो चंचल के लिए मानसिक रूप से जानलेवा साबित हुआ। समझौते की शर्तों के अनुसार, चंचल को शादी में लड़की पक्ष द्वारा खर्च की गई पूरी रकम वापस लौटानी थी। एक साधारण गन्ना रस ऑपरेटर के लिए यह वित्तीय देनदारी बहुत बड़ी थी। पत्नी का घर छोड़कर चले जाना, समाज में बदनामी का डर और शादी के खर्च की भारी-भरकम राशि लौटाने का आर्थिक दबाव—इन तमाम परिस्थितियों ने चंचल को गहरे मानसिक अवसाद (डिप्रेशन) और सदमे में डाल दिया था। पिछले चार दिनों से वह गुमसुम रह रहा था और किसी से ज्यादा बातचीत नहीं कर रहा था। परिजनों का मानना है कि इसी मानसिक प्रताड़ना और सदमे के कारण उसने यह आत्मघाती कदम उठाया।
एफएसएल की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
कजरैली पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वैज्ञानिक अनुसंधान का सहारा लिया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने के तुरंत बाद भागलपुर से आई एफएसएल (FSL) की टीम ने घटनास्थल का गहन मुआयना किया। विशेषज्ञों ने फंदे के रूप में इस्तेमाल की गई साड़ी, पंखे की ऊंचाई, कमरे में मौजूद अन्य सामानों की स्थिति और उंगलियों के निशान (फिंगरप्रिंट्स) एकत्र किए हैं ताकि यह पूरी तरह स्पष्ट हो सके कि यह विशुद्ध रूप से आत्महत्या का मामला है या इसके पीछे कोई अन्य साजिश है।
कजरैली के प्रभारी थानाध्यक्ष चनवीर यादव ने बताया कि प्रथम दृष्टया पूरा मामला वैवाहिक विवाद और समझौते के दबाव के कारण की गई आत्महत्या का प्रतीत होता है। पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर अनुसंधान को आगे बढ़ा रही है। चंचल के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स भी निकाली जा रही हैं ताकि यह पता चल सके कि मौत से पहले उसकी किससे बातचीत हुई थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में परिजनों की ओर से लिखित आवेदन मिलने का इंतजार किया जा रहा है। परिजनों के बयान और आवेदन के आधार पर सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। इसके साथ ही, मौत के सटीक समय और कारणों का पूर्ण खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। बेलशिरा चौक पर इस घटना के बाद से ही मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है और तीन भाइयों में से मंझले भाई की इस तरह असमय मौत से पूरा साह परिवार बिखर गया है।


