
भागलपुर/सन्हौला। भागलपुर और बांका जिले की सीमा को जोड़ने वाले सन्हौला-धोरैया मुख्य मार्ग पर गुरुवार की दोपहर एक अत्यंत दर्दनाक और वीभत्स सड़क हादसा सामने आया है। भुड़िया गांव के समीप एक अनियंत्रित भारी ट्रक ने स्कूटी सवार दंपती को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण दुर्घटना में स्कूटी पर पीछे बैठी एक स्कूल शिक्षिका की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि स्कूटी चला रहे उनके पति गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतका की पहचान 38 वर्षीय बीबी सितारा परवीन के रूप में हुई है, जो बांका जिले के धोरैया थाना अंतर्गत धनकुंड क्षेत्र के बबुरा गांव की रहने वाली थीं। वे धोरैया प्रखंड के अस्सी बटसार विद्यालय में शिक्षिका के पद पर कार्यरत थीं और अपनी ड्यूटी पूरी कर घर लौट रही थीं। इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे इलाके में कोहराम मच गया और आक्रोशित स्थानीय निवासियों ने मुख्य सड़क को पूरी तरह अवरुद्ध कर जोरदार हंगामा किया।
हादसे की रूह कंपा देने वाली कहानी: चक्के के नीचे आई जिंदगी
यह हादसा गुरुवार की दोपहर लगभग 12:30 बजे हुआ। सितारा परवीन धोरैया प्रखंड के अस्सी बटसार स्थित अपने विद्यालय से शिक्षण कार्य समाप्त करने के बाद अपने पति मो. अब्दुल के साथ स्कूटी से वापस अपने पैतृक घर बबुरा लौट रही थीं। स्कूटी उनके पति मो. अब्दुल चला रहे थे और सितारा परवीन पीछे बैठी थीं। सन्हौला बाजार होकर अपने गंतव्य की ओर जाने के क्रम में जैसे ही उनकी स्कूटी सन्हौला-धोरैया मुख्य मार्ग पर भुड़िया गांव के पास पहुँची, तभी पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार और अनियंत्रित ट्रक ने उनकी स्कूटी को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि स्कूटी का संतुलन तुरंत बिगड़ गया और दंपती सड़क पर गिर पड़े। गिरते ही ट्रक का पिछला भारी चक्का शिक्षिका सितारा परवीन के सिर को कुचलता हुआ निकल गया। सिर पर भारी पहिया चढ़ने के कारण घटनास्थल पर ही अत्यंत वीभत्स तरीके से उनकी मौत हो गई। वहीं, स्कूटी चला रहे मो. अब्दुल सड़क की दूसरी ओर जा गिरे, जिससे उन्हें भी गंभीर शारीरिक चोटें आईं। हादसे के तुरंत बाद आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग और राहगीर मौके की तरफ दौड़े, लेकिन तब तक शिक्षिका दम तोड़ चुकी थीं। ग्रामीणों को अपनी ओर आते देख ट्रक चालक पकड़े जाने के डर से गाड़ी को बीच सड़क पर ही छोड़कर मौके से भाग खड़ा हुआ।
ग्रामीणों का गुस्सा और चार घंटे का महाजाम
एक शिक्षिका की इस तरह अचानक और दर्दनाक मौत की खबर आग की तरह भुड़िया और आसपास के गांवों में फैल गई। देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और स्थानीय दुकानदार सड़क पर जमा हो गए। घटना से आक्रोशित लोगों ने सन्हौला-धोरैया मुख्य मार्ग को पूरी तरह से जाम कर दिया। ग्रामीणों का गुस्सा इस बात को लेकर था कि इस व्यस्त मार्ग पर भारी वाहनों की रफ्तार पर अंकुश लगाने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं, जिसके कारण आए दिन ऐसे हादसे होते रहते हैं और मासूम लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है।
गुस्साए लोगों ने सड़क पर बांस-बल्ले लगाकर आवागमन पूरी तरह ठप कर दिया। इसके चलते सड़क के दोनों ओर ट्रकों और अन्य वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। कड़ी धूप के बीच यात्री, मालवाहक गाड़ियाँ और राहगीर फंसे रहे। स्थानीय लोग प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे और मृतका के परिजनों को तत्काल उचित सरकारी मुआवजा देने तथा फरार ट्रक चालक की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े थे। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए सन्हौला थाना के पुलिस अधिकारी रूपेश कुमार पुलिस बल के साथ तुरंत मौके पर पहुँचे, लेकिन लोगों का आक्रोश इतना ज्यादा था कि उन्हें शांत कराना बेहद कठिन साबित हो रहा था।
कई थानों की पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की दौड़
हंगामे और जाम की गंभीरता को देखते हुए कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए सन्हौला पुलिस ने तुरंत वरीय अधिकारियों को सूचित किया। इसके बाद पड़ोसी थानों—अमडंडा और रसलपुर से भी अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया। तीन थानों की पुलिस ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला और आक्रोशित भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पुलिस के आने के बाद प्रशासनिक अमला भी सक्रिय हुआ।
घटनास्थल पर प्रखंड विकास अधिकारी कन्हैया कुमार, राजस्व अधिकारी सुरेंद्र कुमार और प्रखंड शिक्षा अधिकारी विकास कुमार सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी पहुँचे। प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों और मृतका के रोते-बिलखते परिजनों से सीधी बातचीत शुरू की। प्रखंड विकास अधिकारी ने सरकारी प्रावधानों के तहत मिलने वाली त्वरित सहायता और पारिवारिक दुर्घटना मुआवजे की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने का भरोसा दिया। प्रखंड शिक्षा अधिकारी विकास कुमार ने भी अपनी सहयोगी शिक्षिका की असामयिक मृत्यु पर गहरा दुख प्रकट किया और विभाग की ओर से हर संभव विभागीय मदद दिलाने की बात कही। अधिकारियों के काफी समझाने-बुझाने और उचित कानूनी कार्रवाई के आश्वासन के बाद, शाम लगभग 4:00 बजे ग्रामीण सड़क से हटने को तैयार हुए, जिसके बाद करीब चार घंटे से ठप पड़ा आवागमन सामान्य हो सका।
पुलिस की कानूनी प्रक्रिया और शव का पोस्टमार्टम
रास्ता साफ होने के बाद सन्हौला पुलिस ने शिक्षिका के शव को अपने कब्जे में लिया और पंचनामा तैयार करने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय (मायागंज अस्पताल) भेज दिया। घायल पति मो. अब्दुल का प्राथमिक उपचार स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में कराया गया, जहां उनकी स्थिति अब खतरे से बाहर बताई जा रही है। मानसिक सदमे और शारीरिक चोटों के कारण वे फिलहाल कुछ भी विस्तृत बोलने की स्थिति में नहीं हैं।
थानाध्यक्ष रूपेश कुमार ने बताया कि दुर्घटना का कारण बने ट्रक को जब्त कर लिया गया है और उसे पुलिस अभिरक्षा में थाने लाया गया है। ट्रक का चालक फिलहाल फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। पुलिस ने गाड़ी के दस्तावेजों और नंबर के आधार पर उसके मालिक और चालक की पहचान करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। थानाध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि पीड़ित परिवार की ओर से अभी तक कोई औपचारिक लिखित शिकायत या आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। जैसे ही परिजनों की ओर से थाने में आवेदन दिया जाएगा, सुसंगत कानूनी धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षक संघ में शोक की लहर, सुरक्षा पर उठे सवाल
सितारा परवीन की इस आकस्मिक और दर्दनाक मृत्यु से पूरे जिले के शिक्षक समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है। इस घटना पर बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ गोपगुट ने गहरा शोक व्यक्त किया है। संघ की ओर से एक आकस्मिक शोक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें मृतका की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। संघ के जिला सचिव श्याम नंदन सिंह ने इस घटना को बेहद दुखद और विचलित करने वाला बताते हुए कहा कि एक कर्तव्यनिष्ठ शिक्षिका का इस तरह चले जाना पूरे शिक्षा जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
श्याम नंदन सिंह ने बिहार सरकार और स्थानीय जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि पीड़ित परिवार को आपदा प्रबंधन और परिवहन विभाग के नियमों के तहत मिलने वाला अधिकतम मुआवजा अविलंब प्रदान किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के मुख्य मार्गों पर शिक्षकों और आम राहगीरों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। संघ का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में सेवा देने वाले शिक्षकों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, ऐसे में अनियंत्रित भारी वाहनों की गति सीमा तय करने के लिए पुलिस प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में किसी अन्य शिक्षक या नागरिक को अपनी जान न गंवानी पड़े। तफ्तीश जारी है और पुलिस फरार चालक की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है।


