​खगड़िया में हाई वोल्टेज ड्रामा: कुख्यात सुभाष यादव की गिरफ्तारी पर भारी बवाल; ग्रामीणों का एसटीएफ पर हमला, पुलिस की हवाई फायरिंग और महिलाओं से मारपीट के आरोप

खगड़िया। बिहार के खगड़िया जिले में मंगलवार की सुबह एक अपराधी की गिरफ्तारी को लेकर जबरदस्त हंगामा और संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गई। मानसी थाना क्षेत्र के सरसवा पंचायत अंतर्गत श्रीनगर धमहरा गांव में कुख्यात अपराधी को पकड़ने पहुँची स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और स्थानीय पुलिस की टीम पर ग्रामीणों ने अचानक हमला बोल दिया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और मारपीट हुई, जिसमें एसटीएफ का एक जवान घायल हो गया। स्थिति को बेकाबू होते देख और आत्मरक्षा के उद्देश्य से एसटीएफ की टीम ने हवा में फायरिंग की, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई। पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान कुख्यात अपराधी सुभाष यादव को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है, जिसके पास से हथियार और गोलियां बरामद हुई हैं। हालांकि, घटना के बाद ग्रामीणों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए श्रीनगर-धमहरा मुख्य सड़क को करीब तीन घंटे तक जाम रखा।

पुलिस की कार्रवाई: सुबह 5 बजे घेराबंदी और गिरफ्तारी

​खगड़िया के पुलिस अधीक्षक (SP) राकेश कुमार द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पुलिस को मंगलवार की सुबह करीब 5 बजे एक विश्वसनीय गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना यह थी कि नोनहा गांव का रहने वाला कुख्यात अपराधी सुभाष यादव (पुत्र स्वर्गीय महेश्वर यादव) किसी बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम देने की नियत से अवैध हथियारों के साथ इलाके में घूम रहा है। सूचना के सत्यापन और त्वरित कार्रवाई के लिए मानसी थानाध्यक्ष के नेतृत्व में एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया।

​पुलिस टीम जैसे ही कामाथान टोला से आगे बढ़ी, उन्होंने एक संदिग्ध व्यक्ति को पुलिस की गाड़ी देखकर भागते हुए देखा। पुलिस बल ने तत्परता दिखाते हुए घेराबंदी की और उस व्यक्ति को सफलतापूर्वक दबोच लिया। पकड़े गए व्यक्ति ने अपनी पहचान सुभाष यादव के रूप में बताई। जब पुलिस ने उसकी सघन तलाशी ली, तो उसके पास से एक कट्टा (देशी पिस्तौल) और 20 पीस जिंदा कारतूस बरामद किए गए। पुलिस के लिए यह एक बड़ी कामयाबी थी क्योंकि सुभाष यादव इलाके का वांछित अपराधी माना जाता है।

श्रीनगर गांव के पास हमला और हवाई फायरिंग

​असली विवाद तब शुरू हुआ जब एसटीएफ और पुलिस की टीम गिरफ्तार सुभाष यादव को लेकर मानसी थाना की ओर रवाना हुई। पुलिस जैसे ही श्रीनगर गांव के पास पहुँची, वहां पहले से मौजूद 8-10 अज्ञात लोगों ने अपराधी को पुलिस कस्टडी से छुड़ाने का प्रयास किया। एसपी के अनुसार, इन असामाजिक तत्वों ने जानबूझकर सड़क जाम कर दी और विधि-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न की।

​भीड़ ने पुलिस टीम पर पथराव और हमला कर दिया, जिसमें कुछ पुलिसकर्मियों को हल्की चोटें भी आईं। भीड़ का आक्रामक रुख देखकर एसटीएफ की टीम ने आत्मरक्षा में एक राउंड हवाई फायरिंग की। फायरिंग की आवाज सुनकर हमलावर पीछे हटे, जिसके बाद पुलिस अपराधी सुभाष यादव को सुरक्षित तरीके से थाना पहुँचाने में सफल रही। पुलिस का दावा है कि हवाई फायरिंग पूरी तरह से आत्मरक्षा और अपराधी को भगाने की कोशिश को विफल करने के लिए की गई थी।

ग्रामीणों के आरोप: महिलाओं और गर्भवती के साथ मारपीट

​दूसरी ओर, श्रीनगर धमहरा गांव के ग्रामीणों ने पुलिसिया कहानी को पूरी तरह नकारते हुए एसटीएफ के जवानों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एसटीएफ के जवान सादे लिबास (सफेद कपड़ों) में थे। ग्रामीणों के अनुसार, जब पुलिस टीम वहां से गुजर रही थी, तो उन्होंने बिना किसी उकसावे के वहां मौजूद महिलाओं, युवतियों और बुजुर्गों के साथ मारपीट शुरू कर दी।

​ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस की इस बर्बरता के कारण एक गर्भवती महिला भी जख्मी हो गई है। ग्रामीणों का तर्क है कि सड़क पर जाम किसी अपराधी को छुड़ाने के लिए नहीं था, बल्कि पुलिस के इसी दुर्व्यवहार के विरोध में लोग आक्रोशित हुए थे। स्थानीय निवासी भरत मंडल (जो एक निजी कंपनी में गार्ड के रूप में तैनात हैं) ने पुलिस के विरुद्ध लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि एसटीएफ जवानों ने जाम हटाने के नाम पर लोगों की पिटाई की और गोलियां चलाईं। ग्रामीणों ने पुलिस को फायरिंग के बाद गिरे हुए खोखे भी सौंपे हैं।

सड़क जाम और तीन अलग-अलग प्राथमिकी

​इस पूरी घटना के विरोध में ग्रामीणों ने श्रीनगर धमहरा मुख्य मार्ग को तीन घंटे तक पूरी तरह बाधित रखा, जिससे सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क कट गया और यातायात ठप हो गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मानसी थाना की अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर भेजा गया, जिन्होंने काफी मशक्कत के बाद ग्रामीणों को समझा-बुझाकर जाम हटवाया और स्थिति को सामान्य किया।

​पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस पूरे प्रकरण में पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है और कुल तीन अलग-अलग प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं। पहली प्राथमिकी गिरफ्तार अपराधी सुभाष यादव के खिलाफ अवैध हथियार रखने के मामले में है। दूसरी प्राथमिकी पुलिस पर हमला करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और अपराधी को छुड़ाने के प्रयास के मामले में दर्ज की गई है। तीसरी प्राथमिकी सड़क जाम कर मार्ग अवरुद्ध करने वाले लोगों के खिलाफ की गई है। पुलिस उन असामाजिक तत्वों की पहचान कर रही है जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस घटना को हवा दी।

तनावपूर्ण शांति और पुलिस की मॉनिटरिंग

​फिलहाल श्रीनगर धमहरा और आसपास के गांवों में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। पुलिस उन असामाजिक तत्वों की सूची तैयार कर रही है जिन्होंने पुलिस पर हमला किया था। वहीं, ग्रामीणों का एक बड़ा हिस्सा अब भी पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट है और जांच की मांग कर रहा है। भरत मंडल द्वारा दी गई शिकायत पर भी पुलिस विभाग आंतरिक स्तर पर जांच की बात कह रहा है, हालांकि प्राथमिक रूप से पुलिस का ध्यान उन लोगों पर है जिन्होंने कानून को अपने हाथ में लिया।

​कुख्यात सुभाष यादव की गिरफ्तारी पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन ग्रामीणों के साथ हुए इस टकराव ने पुलिस और पब्लिक के बीच के रिश्तों पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में पुलिस की गिरफ्तारी और जांच रिपोर्ट यह साफ करेगी कि क्या वाकई अपराधी को छुड़ाने की साजिश थी या यह पुलिसिया कार्रवाई के दौरान उत्पन्न हुआ एक स्थानीय विवाद था। पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था को बाधित करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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