
पटना। बिहार की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को अधिक मानवीय और पारदर्शी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी ने मंगलवार को विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कई क्रांतिकारी बदलावों का संकेत दिया है। इस बैठक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा समाज के सबसे बुजुर्ग वर्ग के प्रति सरकार की संवेदनशीलता रही। अशोक चौधरी ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि जो बुजुर्ग 80 वर्ष की आयु सीमा पार कर चुके हैं, उन्हें राशन की दुकानों तक न आना पड़े, इसके लिए उनके घर तक खाद्यान्न पहुँचाने की संभावनाएं तलाशी जाएं। इसके लिए एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का प्रस्ताव मांगा गया है। 12 मई 2026 को पटना में हुई इस बैठक ने यह साफ कर दिया है कि सरकार अब केवल अनाज वितरण तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वह वितरण की प्रक्रिया में सुगमता और सम्मान को भी प्राथमिकता दे रही है।
बुजुर्गों के लिए ‘डोरस्टेप डिलीवरी’: पायलट प्रोजेक्ट की तैयारी
अशोक चौधरी ने समीक्षा के दौरान कहा कि उम्र के उस पड़ाव पर जहाँ चलना-फिरना भी दूभर हो जाता है, वहां बुजुर्गों का राशन की दुकानों पर लंबी कतारों में लगना उचित नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि 80 वर्ष से अधिक आयु के लाभार्थियों के लिए एक विशेष कार्ययोजना बनाई जाए। इस योजना के तहत खाद्यान्न को सीधे उनके घर तक पहुँचाने की व्यवस्था की जाएगी।
शुरुआती चरण में इसे कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जाएगा। विभाग इस दौरान आने वाली लॉजिस्टिक चुनौतियों और लागत का आकलन करेगा। यदि इस पायलट प्रोजेक्ट के परिणाम सकारात्मक रहते हैं और वितरण तंत्र सही तरीके से काम करता है, तो इसे पूरे बिहार में लागू किया जाएगा। इस पहल को बिहार में सामाजिक सुरक्षा के एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ तकनीक और संवेदनशीलता का मेल होगा।
राशन कार्ड निर्माण में पारदर्शिता और समयबद्धता
बैठक में राशन कार्डों के पेंडिंग आवेदनों और नए कार्ड निर्माण की प्रक्रिया पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अशोक चौधरी ने विभाग के अधिकारियों को कड़े शब्दों में कहा कि राशन कार्ड केवल एक दस्तावेज नहीं है, बल्कि गरीब परिवारों के लिए भोजन की गारंटी है। उन्होंने निर्देश दिया कि नए राशन कार्डों के निर्माण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और इसमें समय सीमा का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए।
मंत्री ने कहा कि विभाग को ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी जहाँ आवेदकों को अपने कार्ड की स्थिति जानने के लिए कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने सचिव अभय कुमार सिंह और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों को मॉनिटरिंग सिस्टम को और अधिक मजबूत करने को कहा। लक्ष्य यह है कि पात्र परिवारों को बिना किसी अनावश्यक देरी के राशन कार्ड मिल जाए और जो अपात्र हैं, उन्हें नियमानुसार सूची से बाहर रखा जाए।
रिक्त पदों को भरने और मानव संसाधन की उपलब्धता पर जोर
विभागीय कार्यों के प्रभावी संचालन के लिए अशोक चौधरी ने रिक्तियों को बड़ा बाधक माना। उन्होंने जन वितरण प्रणाली की दुकानों में खाली पड़े पदों और उपभोक्ता संरक्षण निदेशालय में विभिन्न संवर्गों के रिक्त पदों को यथाशीघ्र भरने का निर्देश दिया। मंत्री का मानना है कि जब तक पर्याप्त मानव संसाधन नहीं होगा, तब तक योजनाओं का क्रियान्वयन धरातल पर सही तरीके से नहीं हो पाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर भर्ती प्रक्रिया और रिक्तियों को भरने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा। इससे न केवल कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। विशेष रूप से पीडीएस दुकानों के स्तर पर रिक्तियों को भरने से ग्रामीण इलाकों में अनाज वितरण की निगरानी और सुगम हो सकेगी।
लापरवाह ट्रांसपोर्टरों पर गिरेगी गाज: गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं
खाद्यान्न की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) की समीक्षा करते हुए अशोक चौधरी ने सख्त रुख अख्तियार किया। उन्होंने बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम के प्रबंध निदेशक सुनील कुमार को निर्देश दिया कि लाभुकों को सही समय पर और सही मात्रा में गुणवत्तापूर्ण अनाज मिले, यह सुनिश्चित करना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अशोक चौधरी ने कहा कि खाद्यान्न की ढुलाई में लापरवाही बरतने वाले ट्रांसपोर्टरों को बख्शा नहीं जाएगा। यदि किसी स्तर पर अनाज की चोरी, मिलावट या समय पर डिलीवरी न होने की शिकायत मिलती है, तो संबंधित ट्रांसपोर्टर के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने गोदामों से लेकर दुकानों तक अनाज पहुँचने की प्रक्रिया की रैंडम चेकिंग करने का भी निर्देश दिया।
भंडारण क्षमता में विस्तार और पीपीपी मॉडल की संभावना
अनाज को सुरक्षित रखने और भविष्य की जरूरतों के लिए भंडारण क्षमता को बढ़ाना विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती रही है। इस पर चर्चा करते हुए मंत्री ने पीपीपी (Public-Private Partnership) मॉडल पर गोदाम निर्माण की संभावनाओं पर विचार करने को कहा। उन्होंने कहा कि निजी भागीदारी से न केवल आधुनिक गोदाम बनेंगे, बल्कि अनाज की बर्बादी को भी कम किया जा सकेगा।
इसके अतिरिक्त, दलहन (दालों) की अधिप्राप्ति के कार्य में तेजी लाने के लिए उन्होंने सहकारिता विभाग के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया। दलहन की खरीद प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा ताकि किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिले और उपभोक्ताओं को सस्ते दर पर दालें उपलब्ध हो सकें।
योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार और उपभोक्ता जागरूकता
अशोक चौधरी ने बैठक में इस बात पर भी चिंता जताई कि कई बार सही जानकारी के अभाव में पात्र लाभार्थी योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते। उन्होंने उपभोक्ता संरक्षण निदेशालय और विभाग की विभिन्न गतिविधियों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ-साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों का भरपूर उपयोग किया जाना चाहिए।
उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाने की बात कही गई। मंत्री ने कहा कि जनता को पता होना चाहिए कि यदि उन्हें कम राशन मिलता है या खराब गुणवत्ता का अनाज दिया जाता है, तो वे कहाँ और कैसे शिकायत दर्ज करा सकते हैं। पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल माध्यमों का अधिकाधिक प्रयोग किया जाएगा।
जवाबदेही और निष्पक्षता की नई कार्यशैली
बैठक के समापन पर अशोक चौधरी ने सभी पदाधिकारियों को नसीहत दी कि विभाग के हर काम में जवाबदेही और निष्पक्षता झलकनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार या कार्य में ढिलाई के लिए विभाग में कोई स्थान नहीं है। विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह ने मंत्री को आश्वस्त किया कि दिए गए निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा और निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी लक्ष्यों को प्राप्त करने की कोशिश होगी।
इस उच्चस्तरीय बैठक में विशेष सचिव उपेन्द्र कुमार, निदेशक विभूति रंजन चौधरी और अन्य वरीय अधिकारियों ने भी अपने-अपने प्रभागों की प्रगति रिपोर्ट पेश की। अशोक चौधरी ने पीपीटी प्रस्तुतीकरण के माध्यम से एक-एक बिंदु की समीक्षा की और जहाँ भी सुधार की गुंजाइश दिखी, वहां तत्काल निर्देश दिए। 12 मई की इस बैठक ने बिहार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के लिए एक नया विजन और नई कार्यशैली तय कर दी है, जिसका केंद्र बिंदु समाज का अंतिम व्यक्ति और विशेष रूप से बुजुर्ग नागरिक हैं।


