
वडोदरा/वेरावल। वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों के बीच देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को लेकर केंद्र सरकार ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। सोमवार, 11 मई 2026 को गुजरात के वडोदरा और वेरावल में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और भावुक अपील की। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्तमान वैश्विक हालात इस दशक के सबसे गंभीर संकटों में से एक हैं, जिसका सीधा असर भारत की आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ रहा है। इस संकट से निपटने के लिए प्रधानमंत्री ने नागरिकों से ईंधन की खपत कम करने, फिर से ‘वर्क फ्रॉम होम’ (घर से काम) की संस्कृति अपनाने और शिक्षण संस्थानों को ऑनलाइन कक्षाओं को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है। प्रधानमंत्री की यह अपील पिछले 24 घंटों में दूसरी बार आई है, जो स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करती है। साथ ही, उन्होंने सोने और खाद्य तेलों जैसे आयातित उत्पादों पर निर्भरता कम करने का भी आह्वान किया है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले विदेशी मुद्रा के दबाव को कम किया जा सके।
कोविड कालीन व्यवस्थाओं की ओर लौटने का संकेत
वडोदरा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों से आग्रह किया कि जहाँ भी संभव हो, वे कोविड-19 महामारी के दौरान अपनाई गई कार्य पद्धतियों को फिर से अमल में लाएं। उन्होंने निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों के संस्थानों से अपील की कि वे अपने कर्मचारियों के लिए घर से काम करने की व्यवस्था करें। प्रधानमंत्री के अनुसार, यदि लोग घरों से काम करेंगे और छात्र ऑनलाइन कक्षाओं के जरिए अपनी पढ़ाई पूरी करेंगे, तो इससे परिवहन के साधनों पर दबाव कम होगा और देश के कीमती ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की बड़ी बचत सुनिश्चित हो सकेगी।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि नागरिकों को अपनी विदेश यात्राओं को भी सीमित करना चाहिए और केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में ही अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह हर बूंद से घड़ा भरता है, वैसे ही हर नागरिक की छोटी से छोटी कोशिश भी इस संकट के समय में राष्ट्र के लिए बड़ी मदद साबित होगी। प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत कर रही है, इसलिए लोगों को व्यक्तिगत वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों (ई-वाहन) का अधिक से अधिक इस्तेमाल करना चाहिए।
सोने और खाद्य तेलों के आयात पर अंकुश की अपील
आर्थिक मोर्चे पर देश को सुरक्षित रखने के लिए प्रधानमंत्री ने एक और कड़ा संदेश दिया। उन्होंने नागरिकों से पश्चिम एशिया संकट के समाप्त होने तक सोने की खरीद को कुछ समय के लिए टालने का आग्रह किया। भारत दुनिया में सोने के सबसे बड़े आयातकों में से एक है और सोने की अत्यधिक खरीद से विदेशी मुद्रा भंडार पर सीधा असर पड़ता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस समय निवेश के अन्य विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए, लेकिन भौतिक सोने की खरीद से बचना देशहित में होगा।
इसके साथ ही, उन्होंने रसोई के बजट को लेकर भी सावधानी बरतने की बात कही। प्रधानमंत्री ने खाने के तेलों (खाद्य तेल) के इस्तेमाल को कम करने की अपील करते हुए कहा कि हमें आयातित सामान पर अपनी निर्भरता को न्यूनतम स्तर पर लाना होगा। उन्होंने स्वदेशी उत्पादों और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध विकल्पों को प्राथमिकता देने की वकालत की। प्रधानमंत्री के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों से दुनिया एक अत्यंत अस्थिर दौर से गुजर रही है और भारत इससे अछूता नहीं रह सकता। ऐसे में, नागरिकों का यह कर्तव्य है कि वे उन उत्पादों का उपभोग कम करें जिनके लिए भारत को दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है।
वेरावल में सोमनाथ अमृत महोत्सव और राष्ट्रीय जिम्मेदारी
सोमवार को प्रधानमंत्री गुजरात के वेरावल जिले में सोमनाथ अमृत महोत्सव के दौरान एक बड़ी जनसभा को संबोधित कर रहे थे। सोमनाथ मंदिर की ऐतिहासिकता और विपरीत परिस्थितियों में उसके पुनर्निर्माण का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने हमेशा से संकटों को अवसरों में बदला है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया का वर्तमान संकट न केवल सैन्य है, बल्कि यह ऊर्जा और रसद के लिहाज से भी दुनिया को चुनौती दे रहा है।
प्रधानमंत्री ने कोरोना काल की याद दिलाते हुए कहा, “जिस तरह हमने सामूहिक शक्ति और अनुशासन के बल पर कोरोना जैसी वैश्विक महामारी पर विजय प्राप्त की थी, उसी तरह हम इस वर्तमान भू-राजनीतिक संकट से भी बाहर निकल आएंगे। जब भी देश को युद्ध या किसी अन्य संकट का सामना करना पड़ा है, तब-तब भारत के नागरिकों ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई है। आज फिर वह समय आ गया है जब हमें अपनी जीवनशैली में संयम बरतकर राष्ट्र की आर्थिक संप्रभुता की रक्षा करनी होगी।” प्रधानमंत्री का संदेश साफ था कि सरकार नीतियों के स्तर पर लड़ रही है, लेकिन जनता का सहयोग ही इस लड़ाई का निर्णायक आधार बनेगा।
रक्षा मंत्री की बैठक और सरकार का आश्वासन
प्रधानमंत्री की इस अपील के समांतर ही नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पश्चिम एशिया संकट पर गठित एक उच्च स्तरीय मंत्री समूह की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में पेट्रोलियम मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और मंत्री शामिल हुए। बैठक के बाद रक्षा मंत्री ने देश को आश्वस्त करते हुए कहा कि नागरिकों को घबराने या परेशान होने की कतई आवश्यकता नहीं है।
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि भारत के पास पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है और आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने के लिए वैकल्पिक मार्गों पर भी काम किया जा रहा है। सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और उपलब्धता पर निरंतर नजर बनाए हुए है। रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील का उद्देश्य नागरिकों को डराना नहीं, बल्कि उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है। सरकार हर स्थिति से निपटने के लिए सक्षम है और देश में ईंधन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वैश्विक संकट लंबा खिंच सकता है, इसलिए सतर्कता और संरक्षण ही सबसे सुरक्षित मार्ग है।
आयातित उत्पादों पर निर्भरता और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को फिर से दोहराया। उन्होंने कहा कि विदेशी उत्पादों के प्रति बढ़ता आकर्षण संकट के समय में देश के लिए कमजोरी साबित होता है। नागरिकों को उन उत्पादों के प्रति अपनी पसंद बदलनी होगी जो सीधे तौर पर आयात किए जाते हैं। प्रधानमंत्री ने वडोदरा और वेरावल की अपनी सभाओं में युवाओं से विशेष रूप से संवाद किया और उन्हें तकनीकी समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया ताकि घर से काम और ऑनलाइन शिक्षा की प्रक्रिया और अधिक सहज और प्रभावी हो सके।
उन्होंने कहा कि संकट चाहे कितना भी बड़ा हो, यदि 140 करोड़ देशवासी एक साथ संकल्प ले लें, तो कोई भी वैश्विक हलचल भारत की प्रगति को नहीं रोक सकती। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से सार्वजनिक जीवन में मितव्ययिता अपनाने की अपील करते हुए कहा कि वर्तमान स्थिति में विलासिता को त्याग कर राष्ट्र की जरूरतों के प्रति संवेदनशील होना समय की मांग है। वेरावल की सभा में प्रधानमंत्री ने सोमनाथ के आध्यात्मिक गौरव को आधुनिक भारत की संकल्प शक्ति से जोड़ते हुए देशवासियों को एक नई ऊर्जा देने का प्रयास किया।
प्रधानमंत्री की इस दोहरी अपील के बाद अब देश भर में सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में केंद्र और राज्य सरकारें वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन कक्षाओं को लेकर कुछ विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर सकती हैं। फिलहाल, सरकार का पूरा जोर इस बात पर है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न होने वाले संभावित ‘एनर्जी शॉक’ से भारत की अर्थव्यवस्था को कम से कम नुकसान हो। नागरिकों के बीच प्रधानमंत्री की इस सादगी भरी लेकिन गंभीर अपील का असर दिखने लगा है और सोशल मीडिया से लेकर बाजारों तक, मितव्ययिता और स्वदेशी के संकल्प की चर्चा होने लगी है। सरकार की ओर से पेट्रोलियम और रक्षा मंत्रालयों के जरिए दिए गए आश्वासन ने जनता के बीच किसी भी संभावित भगदड़ या जमाखोरी की आशंका को फिलहाल समाप्त कर दिया है।


