​समस्तीपुर-दरभंगा रेलखंड पर दोहरीकरण की अंतिम जंग: भागलपुर-जयनगर सहित कई एक्सप्रेस ट्रेनें शॉर्ट-टर्मिनेट, बदले मार्ग से चलेंगी गाड़ियां

कोलकाता/समस्तीपुर। उत्तर बिहार की रेल कनेक्टिविटी को आधुनिक और तीव्र बनाने की दिशा में पूर्व मध्य रेलवे ने एक निर्णायक कदम उठाया है। समस्तीपुर मंडल के अंतर्गत आने वाले समस्तीपुर-दरभंगा रेलखंड पर दोहरीकरण के शेष बचे कार्यों को पूर्ण करने के लिए रेल प्रशासन ने कमर कस ली है। इस महत्वपूर्ण रेलखंड पर बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से रामभद्रपुर, हायाघाट और थलवारा स्टेशनों पर ‘प्री-नॉन इंटरलॉकिंग’ (Pre-NI) और ‘नॉन-इंटरलॉकिंग’ (NI) का कार्य शुरू किया गया है। 9 मई 2026 से शुरू हुआ यह अभियान 14 मई 2026 तक चलेगा, जिसमें दोहरीकरण के साथ-साथ रेल संरक्षा आयुक्त (CRS) द्वारा गहन निरीक्षण भी शामिल है। इस तकनीकी अपग्रेडेशन के कारण पूर्व रेलवे और पूर्व मध्य रेलवे के बीच चलने वाली कई प्रमुख ट्रेनों के परिचालन में व्यापक बदलाव किया गया है। रेलवे का यह कदम भविष्य में ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने और परिचालन में होने वाली देरी को कम करने के लिए अनिवार्य माना जा रहा है, हालांकि तात्कालिक रूप से इससे यात्रियों को रूट डायवर्जन और ट्रेनों के शॉर्ट-टर्मिनेशन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

समस्तीपुर-दरभंगा दोहरीकरण: क्यों जरूरी है यह ब्लॉक?

​समस्तीपुर-दरभंगा रेलखंड उत्तर बिहार की रेल जीवनरेखा माना जाता है। इस रूट पर बढ़ते दबाव को देखते हुए रेलवे काफी समय से दोहरीकरण परियोजना पर काम कर रहा था। अब इस परियोजना के अंतिम चरण के कार्यों को अमलीजामा पहनाने के लिए रामभद्रपुर, हायाघाट और थलवारा स्टेशनों पर सिग्नलों और पॉइंटों के आधुनिकिकरण (Non-Interlocking) का कार्य किया जा रहा है। नॉन-इंटरलॉकिंग के दौरान स्टेशन का सिग्नल सिस्टम मैनुअल या अस्थायी रूप से बंद रहता है ताकि नई पटरियों को मुख्य लाइन से जोड़ा जा सके।

​इसी क्रम में सीआरएस (CRS) का निरीक्षण भी निर्धारित है, जो यह सुनिश्चित करेगा कि नया ट्रैक और सिग्नलिंग सिस्टम यात्रियों की सुरक्षा के मानकों पर खरा उतरता है या नहीं। इस पूरे कार्य के दौरान सुरक्षा कारणों से ट्रेनों का सुचारू परिचालन संभव नहीं है, जिसके कारण 11 मई से 14 मई के बीच कई गाड़ियों को जयनगर, दरभंगा और रक्सौल के बजाय बीच के स्टेशनों पर ही रोकने का निर्णय लिया गया है।

प्रमुख गाड़ियों के मार्ग में परिवर्तन (Diversion)

​रेलवे द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, रक्सौल और तिरुपति की ओर जाने वाली कुछ महत्वपूर्ण विशेष ट्रेनों को उनके नियमित मार्ग समस्तीपुर-दरभंगा-सीतामढ़ी के बजाय परिवर्तित मार्ग से चलाया जाएगा। यह बदलाव यात्रियों के लिए यात्रा के समय में थोड़ी बढ़ोतरी कर सकता है, लेकिन ट्रेन को पूरी तरह रद्द करने के बजाय यह एक बेहतर विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

  1. गाड़ी संख्या 07006 रक्सौल-चार्लपल्ली स्पेशल: यह ट्रेन 13 मई 2026 को अपने नियमित मार्ग समस्तीपुर-दरभंगा-सीतामढ़ी-रक्सौल के स्थान पर अब समस्तीपुर-मुजफ्फरपुर-सगौली-रक्सौल होकर चलाई जाएगी।
  2. गाड़ी संख्या 07051 तिरुपति-रक्सौल स्पेशल (JCO 11.05.2026) एवं 07052 रक्सौल-तिरुपति स्पेशल (JCO 14.05.2026): ये दोनों विशेष ट्रेनें अपने निर्धारित रूट के बजाय समस्तीपुर-मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी होकर अपने गंतव्य तक पहुँचेंगी।
  3. हावड़ा-रक्सौल एक्सप्रेस (13043/13044): 13 मई को हावड़ा से खुलने वाली और 14 मई को रक्सौल से खुलने वाली यह एक्सप्रेस ट्रेन भी समस्तीपुर-मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी के डाइवर्टेड रूट से संचालित होगी।

​इन बदलावों से उन यात्रियों को असुविधा हो सकती है जिनके टिकट दरभंगा स्टेशन के लिए थे। रेलवे ने आग्रह किया है कि डाइवर्टेड रूट वाली गाड़ियों में सफर करने से पहले यात्री नेशनल ट्रेन इंक्वायरी सिस्टम (NTES) पर अपनी गाड़ी की लाइव स्थिति जरूर जांच लें।

बरौनी और समस्तीपुर में थमेंगे ट्रेनों के पहिए (Short-Termination)

​दोहरीकरण कार्य के कारण सबसे अधिक प्रभाव जयनगर और दरभंगा की ओर जाने वाली गाड़ियों पर पड़ा है। कई एक्सप्रेस ट्रेनों को जयनगर तक जाने की अनुमति नहीं दी गई है और उन्हें बरौनी जंक्शन या समस्तीपुर जंक्शन पर ही ‘शॉर्ट-टर्मिनेट’ (यात्रा समाप्त) करने का फैसला किया गया है।

बरौनी जंक्शन पर समाप्त होने वाली ट्रेनें:

जयनगर जाने वाली तीन प्रमुख ट्रेनें अब बरौनी तक ही जाएंगी और वहीं से वापस लौटेंगी:

  • 13185 सियालदह-जयनगर गंगासागर एक्सप्रेस: 11, 12 और 13 मई 2026 को यह ट्रेन जयनगर नहीं जाएगी, बल्कि बरौनी में ही रुक जाएगी।
  • 13031 हावड़ा-जयनगर एक्सप्रेस: 11, 12 और 13 मई 2026 को इसका गंतव्य बरौनी जंक्शन होगा।
  • 15553 भागलपुर-जयनगर एक्सप्रेस: भागलपुर से जयनगर जाने वाली यह महत्वपूर्ण इंटरसिटी 12, 13 और 14 मई 2026 को केवल बरौनी जंक्शन तक ही संचालित होगी।

​इसी तरह, वापसी दिशा में जयनगर-सियालदह (13186), जयनगर-हावड़ा (13032) और जयनगर-भागलपुर (15554) गाड़ियां जयनगर के स्थान पर बरौनी जंक्शन से ही अपनी यात्रा शुरू (Short-Originate) करेंगी। दरभंगा-चार्लपल्ली एक्सप्रेस (17008) भी 12 मई को बरौनी से ही खुलेगी।

समस्तीपुर जंक्शन पर समाप्त होने वाली ट्रेनें:

कुछ गाड़ियों को समस्तीपुर जंक्शन पर ही समाप्त करने का निर्णय लिया गया है:

  • 18105 राउरकेला-जयनगर एक्सप्रेस (12.05.2026) और 17007 चार्लपल्ली-दरभंगा एक्सप्रेस (12.05.2026) अपनी यात्रा समस्तीपुर जंक्शन पर ही पूरी करेंगी।
  • ​वापसी में 18106 जयनगर-राउरकेला एक्सप्रेस 13 मई को जयनगर के बजाय समस्तीपुर जंक्शन से अपनी यात्रा शुरू करेगी।

भागलपुर-जयनगर एक्सप्रेस के समय में बदलाव

​भागलपुर से चलने वाली गाड़ी संख्या 15553 भागलपुर-जयनगर एक्सप्रेस के यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना है। 11 मई 2026 को यह ट्रेन अपने निर्धारित समय से 1 घंटा विलंब से भागलपुर स्टेशन से रवाना होगी। हालांकि यह ट्रेन 11 मई को जयनगर तक जा रही है (अगले तीन दिनों के शॉर्ट-टर्मिनेशन से पहले), लेकिन री-शेड्यूलिंग के कारण यात्रियों को स्टेशन पर अतिरिक्त समय बिताना पड़ सकता है। भागलपुर रेल खंड से मिथिलांचल की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए यह ट्रेन काफी लोकप्रिय है, इसलिए इस समय परिवर्तन का व्यापक प्रभाव पड़ेगा।

​रेलवे के अनुसार, री-शेड्यूलिंग का निर्णय परिचालन संबंधी कारणों और लिंक रैक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे प्रस्थान के नए समय के अनुसार ही स्टेशन पहुँचें।

यात्री सुविधाओं और सूचना तंत्र पर रेलवे का ध्यान

​समस्तीपुर मंडल में चल रहे इस व्यापक कार्य को देखते हुए रेलवे ने विभिन्न स्टेशनों पर पूछताछ काउंटरों को सक्रिय कर दिया है। बरौनी और समस्तीपुर जैसे महत्वपूर्ण जंक्शनों पर यात्रियों की संभावित भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और सहायता व्यवस्था पुख्ता की जा रही है। चूंकि कई गाड़ियां बरौनी में ही समाप्त हो रही हैं, इसलिए वहां से दरभंगा या जयनगर जाने वाले यात्रियों को सड़क मार्ग या अन्य स्थानीय परिवहन का सहारा लेना पड़ सकता है।

​रेलवे अधिकारियों का कहना है कि दोहरीकरण का यह कार्य पूरा होते ही समस्तीपुर-दरभंगा रेलखंड पर गाड़ियों की क्रॉसिंग के लिए होने वाला इंतजार खत्म हो जाएगा। वर्तमान में सिंगल लाइन होने के कारण एक ट्रेन को पास देने के लिए दूसरी ट्रेन को काफी समय तक बाहरी स्टेशनों पर खड़ा रहना पड़ता है। दोहरीकरण के बाद यह समस्या स्थायी रूप से हल हो जाएगी, जिससे इस रूट पर नई ट्रेनों के परिचालन की संभावना भी बढ़ेगी।

​11 मई से 14 मई के बीच की यह अवधि रेल यात्रियों के लिए धैर्य की परीक्षा वाली हो सकती है, लेकिन रेल प्रशासन का मानना है कि बुनियादी ढांचे में यह सुधार भविष्य की सुगम यात्रा के लिए एक निवेश है। उत्तर बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच रेल संपर्क को सुदृढ़ करने की इस कड़ी में यात्रियों का सहयोग अपेक्षित है। रेलवे ने डिजिटल माध्यमों और स्टेशन घोषणा प्रणाली (PAS) के जरिए पल-पल की जानकारी साझा करने की व्यवस्था की है।

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