​लोदीपुर में कतरिया नदी बनी काल: मवेशी को बचाने के चक्कर में डूबा 14 वर्षीय आनंद, परिजनों की चीख-पुकार से दहला बिशनपुर

भागलपुर। जिले के लोदीपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत जीछो बिशनपुर गांव में सोमवार की सुबह खुशियों के आंगन में मातम का ऐसा सन्नाटा पसरा कि हर आंख नम हो गई। कतरिया नदी की चंचल लहरें एक मासूम परिवार के लिए काल बन गईं। रविवार की दोपहर अपने मवेशियों को चराने निकला 14 वर्षीय आनंद कुमार अब इस दुनिया में नहीं रहा। मवेशी की जान बचाने की जद्दोजहद में आनंद ने खुद की जान गंवा दी। 11 मई 2026 की अलसुबह जब स्थानीय गोताखोरों ने नदी की गहराइयों से उसका बेजान शरीर बाहर निकाला, तो गांव का आसमान चीख-पुकार से गूंज उठा। यह हृदयविदारक हादसा उस समय हुआ जब आनंद एक बेजुबान जानवर को नदी की तेज धारा से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा था। भागलपुर के ग्रामीण अंचलों में इस घटना ने एक बार फिर उन खतरों की ओर ध्यान खींचा है, जो नदियों के किनारे रहने वाले परिवारों के सिर पर हमेशा मंडराते रहते हैं।

रविवार की वो काली दोपहर: जब शुरू हुआ हादसों का सिलसिला

​घटना की शुरुआत 10 मई, रविवार की दोपहर से हुई थी। जीछो बिशनपुर निवासी अनिल यादव का पुत्र आनंद कुमार हर रोज की तरह अपने घर के मवेशियों को लेकर पास के बहियार (चरागाह) में गया था। आनंद उम्र में भले ही छोटा था, लेकिन अपने पारिवारिक दायित्वों को बखूबी समझता था। दोपहर के वक्त जब मवेशी घास चर रहे थे, तभी उनमें से एक मवेशी प्यास बुझाने या अनजाने में कतरिया नदी की ढलान की ओर चला गया। नदी के किनारे फिसलन अधिक थी और देखते ही देखते मवेशी गहरे पानी की ओर बढ़ने लगा।

​प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, आनंद अपने मवेशी को डूबता देख बेचैन हो गया। उसने बिना अपनी जान की परवाह किए नदी के किनारे जाकर जानवर को वापस खींचने का प्रयास किया। इसी दौरान उसका पैर मिट्टी की फिसलन के कारण डगमगा गया और वह संतुलन खो बैठा। नदी का वह हिस्सा काफी गहरा था और आनंद पानी की गहराई का अंदाजा नहीं लगा सका। वह सीधे गहरे पानी में समा गया। कुछ पल की छटपटाहट के बाद आनंद पानी के भीतर ओझल हो गया।

पूरी रात बेचैनी में कटा वक्त: ग्रामीणों का सघन खोज अभियान

​जब शाम ढलने लगी और मवेशी तो वापस लौट आए लेकिन आनंद घर नहीं पहुँचा, तो परिवार के सदस्यों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आईं। अनिल यादव और गांव के अन्य लोग तुरंत बहियार की ओर दौड़े। वहां नदी के किनारे आनंद के पैरों के निशान और मवेशी के संघर्ष के संकेत मिले, जिससे अनहोनी की आशंका गहरा गई। रविवार की पूरी रात ग्रामीणों ने अपने स्तर से टॉर्च और लाठियों के सहारे नदी के किनारों पर खोजबीन की, लेकिन अंधेरा अधिक होने और पानी गहरा होने के कारण सफलता नहीं मिली।

​सोमवार की सुबह होते ही गांव के अनुभवी गोताखोरों की टीम को बुलाया गया। 11 मई की सुबह करीब 6 बजे से ही दोबारा सघन तलाशी अभियान शुरू किया गया। दर्जनों ग्रामीण नदी के किनारे जमा थे और हर कोई आनंद की सलामती की दुआ कर रहा था। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद गोताखोरों को नदी के एक शांत कोने में पानी की सतह पर तैरता हुआ एक शव दिखाई दिया। जब उसे बाहर लाया गया, तो उसकी पहचान आनंद कुमार के रूप में हुई।

परिजनों का कोहराम और प्रशासनिक कार्यवाही

​आनंद का शव मिलते ही बिशनपुर गांव में हाहाकार मच गया। पिता अनिल यादव अपने इकलौते बेटे के बेजान शरीर को देखकर सुध-बुध खो बैठे। मां की स्थिति ऐसी थी कि उन्हें संभालना मुश्किल हो रहा था। ग्रामीणों ने तुरंत इस घटना की सूचना लोदीपुर थाना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुँचा और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर कागजी प्रक्रिया पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (मायागंज) भेज दिया।

​थाना प्रभारी ने बताया कि यह प्रथम दृष्टया डूबने का मामला प्रतीत होता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मृत्यु के सही कारणों की पुष्टि हो सकेगी। पुलिस ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और सरकारी नियमानुसार मिलने वाली सहायता राशि के लिए आवश्यक दस्तावेज तैयार करने का निर्देश दिया। गांव के लोगों ने बताया कि आनंद एक मेधावी और आज्ञाकारी बालक था, जो पढ़ाई के साथ-साथ खेती-बाड़ी में भी अपने पिता का हाथ बंटाता था।

नदियों के किनारे बढ़ता खतरा और सुरक्षा के सवाल

​कतरिया नदी में हुई यह मौत भागलपुर के उन तमाम इलाकों के लिए एक चेतावनी है जहाँ नदियाँ और जलप्रपात आबादी के बिल्कुल करीब हैं। गर्मी के मौसम में अक्सर नदियों का जलस्तर कम होने के बावजूद कुछ जगहों पर गड्ढे और दलदल काफी गहरे होते हैं। बच्चों को अक्सर पानी की इन बारीकियों का पता नहीं होता। आनंद का हादसा यह भी बताता है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मवेशी कितने महत्वपूर्ण हैं कि एक किशोर ने उन्हें बचाने के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी।

​ग्रामीणों की मांग है कि नदी के उन संवेदनशील घाटों पर जहाँ मवेशी पानी पीने जाते हैं या जहाँ बच्चे खेलते हैं, वहां सुरक्षा के कुछ पुख्ता इंतजाम होने चाहिए। कम से कम चेतावनी बोर्ड या स्थानीय स्तर पर निगरानी की व्यवस्था अनिवार्य है। बिशनपुर के ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से जिला प्रशासन से मांग की है कि मृतक के परिवार को तत्काल अनुग्रह अनुदान राशि प्रदान की जाए, क्योंकि परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर है और आनंद ही भविष्य में अपने पिता का सबसे बड़ा सहारा बनने वाला था।

मातम में डूबा बिशनपुर: एक भविष्य का दुखद अंत

​11 मई की दोपहर तक आनंद का शव पोस्टमार्टम के बाद गांव वापस लाया गया, जहाँ गमगीन माहौल में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। गांव का हर चूल्हा आज ठंडा रहा और हर कोई इस छोटी उम्र के बालक की बहादुरी और उसके दुखद अंत की चर्चा कर रहा था। अनिल यादव के घर पर संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लगा रहा। लोगों ने कहा कि यह केवल एक परिवार की क्षति नहीं है, बल्कि पूरे गांव ने एक होनहार बेटे को खो दिया है।

​भागलपुर के लोदीपुर इलाके में हुई इस घटना ने सुरक्षा मानकों और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर भी सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय स्तर पर गोताखोरों की कमी और त्वरित राहत कार्य में देरी अक्सर ऐसी घटनाओं को और भी ज्यादा पीड़ादायक बना देती है। फिलहाल, कतरिया नदी की लहरें शांत हैं, लेकिन वे बिशनपुर के एक घर में जो जख्म छोड़ गई हैं, उन्हें भरने में सालों लग जाएंगे। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को नदियों और गहरे तालाबों के पास अकेले न जाने दें, विशेषकर उन जगहों पर जहाँ पानी की गहराई अनिश्चित हो।

​इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को कभी न भूलने वाला गम दे दिया है। आनंद की शहादत (मवेशी को बचाने का प्रयास) भले ही गांव की चर्चाओं में जीवित रहे, लेकिन उसके माता-पिता के लिए यह शून्य कभी नहीं भरेगा। पुलिस की तफ्तीश जारी है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। भागलपुर में आज की यह सबसे दुखद खबर रही जिसने इंसानी संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया।

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