​बिहार के बदलते ‘अक्स’ और सुशासन के 20 साल: सूचना मंत्री श्रवण कुमार ने मीडिया को बताया विकास का सारथी, नकारात्मकता मिटाने का आह्वान

पटना। बिहार की छवि जो कभी देश और दुनिया के पटल पर पिछड़ेपन और अव्यवस्था का पर्याय मानी जाती थी, पिछले दो दशकों में उसमें आए क्रांतिकारी बदलावों ने एक नई पटकथा लिख दी है। इस बदलाव की कहानी को जन-जन तक पहुँचाने में जहाँ सरकार की नीतियां आधार बनीं, वहीं मीडिया ने एक सशक्त सेतु के रूप में कार्य किया। सोमवार, 11 मई 2026 को राजधानी पटना के सूचना भवन स्थित ‘संवाद कक्ष’ में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (आईपीआरडी) के मंत्री श्रवण कुमार ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ एक विशेष संवाद सत्र आयोजित किया। पदभार ग्रहण करने के बाद अपने पहले औपचारिक मीडिया मिलन में श्रवण कुमार ने न केवल पिछले 20 वर्षों के ‘सकारात्मक शासन’ का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया, बल्कि बिहार की नई पहचान को और अधिक मजबूती देने के लिए मीडिया से रचनात्मक सहयोग की अपील भी की।

सूचना भवन में संवाद की नई शुरुआत: मीडिया के प्रति कृतज्ञता

​शुक्रवार को विभाग की कमान संभालने के बाद श्रवण कुमार ने सोमवार की दोपहर वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों के साथ चर्चा के लिए चुनी। इस मुलाकात का मूल उद्देश्य सरकार और सूचना तंत्र के बीच एक जीवंत संवाद स्थापित करना था। श्रवण कुमार ने खुले मन से स्वीकार किया कि बिहार की छवि को वैश्विक स्तर पर सुधारने में मीडिया की खबरों और उनकी सकारात्मक प्रस्तुतियों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं कितनी भी प्रभावी क्यों न हों, जब तक वे मीडिया के माध्यम से लोगों की चर्चा का विषय नहीं बनतीं, उनका प्रभाव सीमित रहता है।

​मंत्री ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि बिहार को लेकर दूसरे राज्यों और विदेशों में जो एक ‘नकारात्मक सोच’ वर्षों से घर कर गई थी, उसे तोड़ने में पिछले 20 वर्षों का ‘ट्रैक रिकॉर्ड’ सफल रहा है। सड़क, बिजली, पानी और कानून-व्यवस्था जैसे बुनियादी क्षेत्रों में हुए सुधारों को मीडिया ने जिस तरह से प्रस्तुत किया, उसी का परिणाम है कि आज बिहार को एक ‘उभरती हुई अर्थव्यवस्था’ के रूप में देखा जा रहा है।

नींव से इमारत तक: नीतीश कुमार का विजन और वर्तमान कैबिनेट का संकल्प

​श्रवण कुमार ने अपने संबोधन में बिहार के राजनीतिक और प्रशासनिक निरंतरता की ओर इशारा करते हुए एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लंबे कार्यकाल में काम करने का अनुभव रहा है और अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई कैबिनेट में भी उन्हें वही जिम्मेदारी मिली है। यह तालमेल बिहार के विकास की उस ‘इमारत’ को और ऊंचा ले जाने का अवसर है, जिसकी नींव नीतीश कुमार के शासनकाल में रखी गई थी।

प्रगति के प्रमुख आधार:

  • महिला सशक्तिकरण: मंत्री ने जीविका दीदियों और पंचायती राज में महिलाओं को दिए गए आरक्षण जैसे ऐतिहासिक फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि इन बदलावों ने बिहार के सामाजिक ढांचे को अंदर से मजबूत किया है।
  • ग्रामीण विकास: गांवों की उन्नति और ‘सात निश्चय’ जैसी योजनाओं ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकी है।
  • सांस्कृतिक पहचान: बिहार के पर्यटन और सांस्कृतिक धरोहरों के पुनरुद्धार ने राज्य की सॉफ्ट-पावर को बढ़ाया है।

रचनात्मक आलोचना का स्वागत: सरकार और मीडिया के बीच नया तालमेल

​सूचना मंत्री ने मीडिया से केवल प्रशंसा की अपेक्षा नहीं की, बल्कि उन्होंने एक परिपक्व लोकतंत्र की दुहाई देते हुए ‘रचनात्मक आलोचना’ का भी स्वागत किया। उन्होंने वरिष्ठ संवाददाताओं से अपील की कि यदि राज्य के विकास कार्यो में कहीं कोई चूक दिखाई दे, या योजनाओं के क्रियान्वयन में कोई कमी नजर आए, तो उसे तथ्यों के साथ सरकार के सामने लाएं। इससे प्रशासन को अपनी गलतियों को सुधारने और विकास की गति को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

​श्रवण कुमार का यह रुख यह दर्शाता है कि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग अब केवल ‘एकतरफा संवाद’ के बजाय ‘दोतरफा संवाद’ (Two-way communication) की नीति पर काम करना चाहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार और मीडिया के बीच का संबंध ‘विरोधी’ का नहीं बल्कि ‘सहयोगी’ का होना चाहिए, जहाँ दोनों का अंतिम लक्ष्य बिहार की प्रगति और समृद्धि हो।

आईपीआरडी की नई भूमिका: तकनीक और सूचना का समन्वय

​सत्र के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा चलाई जा रही जन कल्याणकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर भी विस्तृत चर्चा हुई। श्रवण कुमार ने कहा कि विभाग अब आधुनिक संचार माध्यमों का उपयोग कर योजनाओं को सीधे लाभार्थी तक पहुँचाने के लिए नए ‘डिजिटल रोडमैप’ पर काम कर रहा है। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक अनिल कुमार, अपर सचिव राजीव कुमार सिंह और संयुक्त निदेशक रवि भूषण सहाय ने भी इस दौरान मंत्री के विजन को धरातल पर उतारने के लिए की जा रही तकनीकी तैयारियों की जानकारी दी।

​बैठक में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे मीडिया के साथ सूचनाओं का आदान-प्रदान और अधिक सुलभ और तीव्र बनाएं। किसी भी बड़ी सरकारी घोषणा या योजना की जानकारी पत्रकारों तक समय पर पहुँचे, इसके लिए विभाग अब रियल-टाइम अपडेट सिस्टम को और अधिक मजबूत कर रहा है।

नकारात्मकता से मुक्ति और सुनहरे बिहार का सपना

​श्रवण कुमार ने भावुक होते हुए कहा कि बिहार का इतिहास गौरवशाली रहा है और अब उसका वर्तमान भी उसी गौरव को पुनर्स्थापित कर रहा है। उन्होंने मीडिया बंधुओं से आग्रह किया कि वे राज्य की छोटी-छोटी सफलताओं को भी प्रमुखता दें, क्योंकि ये छोटी कहानियां ही मिलकर एक बड़े बदलाव का माहौल बनाती हैं। विदेशों में रह रहे बिहारियों के मन में अपने राज्य के प्रति बढ़ता सम्मान इसी सकारात्मक पत्रकारिता की देन है।

​11 मई 2026 की यह दोपहर सूचना भवन के लिए केवल एक परिचय सत्र नहीं था, बल्कि यह बिहार की छवि को ‘री-ब्रैंड’ (Re-brand) करने की एक नई शुरुआत थी। श्रवण कुमार ने जिस गर्मजोशी के साथ मीडिया प्रतिनिधियों का स्वागत किया और उनके सुझावों को सुना, उससे यह उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग और अधिक गतिशील होकर उभरेगा।

​बिहार के 20 वर्षों के संघर्ष और सफलता के सफर को जब श्रवण कुमार ने ‘इमारत’ की संज्ञा दी, तो वहां उपस्थित पत्रकारों ने भी इस बात को स्वीकार किया कि राज्य ने लंबी दूरी तय की है। अब चुनौती इस इमारत को और अधिक भव्य और टिकाऊ बनाने की है। सूचना मंत्री ने अंत में सभी को धन्यवाद देते हुए कहा कि बिहार के विकास की इस यात्रा में मीडिया के बिना मंजिल तक पहुँचना संभव नहीं है। प्रशासनिक मुस्तैदी और मीडिया की सजगता ही बिहार को समृद्धि की नई ऊंचाइयों तक पहुँचाएगी।

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