​पटना के विश्वेश्वरैया भवन में नई प्रशासनिक पारी: प्रणव कुमार ने संभाली भवन निर्माण विभाग की कमान, ‘आइकॉनिक’ प्रोजेक्ट्स और समयबद्धता पर रहेगा जोर

पटना। बिहार के आधारभूत ढांचे को आधुनिक और विश्वस्तरीय स्वरूप देने में अग्रणी भूमिका निभाने वाले भवन निर्माण विभाग में सोमवार को एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव हुआ। वरिष्ठ अधिकारी प्रणव कुमार ने राजधानी पटना के विश्वेश्वरैया भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में सचिव, भवन निर्माण विभाग के रूप में विधिवत पदभार ग्रहण कर लिया। 11 मई 2026 की यह तिथि विभाग के लिए नई प्राथमिकताओं और कार्य संस्कृति के विस्तार का संकेत दे रही है। पदभार ग्रहण करने के इस औपचारिक अवसर पर निवर्तमान सचिव कुमार रवि सहित विभाग के तमाम वरीय पदाधिकारी और अभियंता उपस्थित रहे। पदभार की अदला-बदली के साथ ही नए सचिव ने अपनी कार्यशैली का परिचय देते हुए तुरंत विभाग की समीक्षा शुरू कर दी, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि आने वाले समय में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समय पर पूर्णता ही विभाग का मुख्य मंत्र होगा।

पदभार ग्रहण और समीक्षा का दौर: ‘पावरपॉइंट’ से समझा विभाग का विजन

​पदभार ग्रहण करने की औपचारिकताओं के तुरंत बाद, प्रणव कुमार ने विभाग के पदाधिकारियों और अभियंताओं के साथ एक उच्चस्तरीय परिचयात्मक बैठक की। इस बैठक का उद्देश्य केवल परिचय प्राप्त करना नहीं था, बल्कि विभाग द्वारा वर्तमान में कार्यान्वित की जा रही विभिन्न योजनाओं की वास्तविक स्थिति को समझना था। विभाग की वर्तमान कार्यप्रणाली, चल रहे प्रोजेक्ट्स, मेंटेनेंस और भविष्य के लक्ष्यों को एक विस्तृत पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से सचिव के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

​प्रस्तुतीकरण के दौरान प्रणव कुमार ने एक-एक बिंदु पर बारीकी से चर्चा की। उन्होंने योजनाओं की प्रगति के साथ-साथ उनके कार्यान्वयन में आने वाली तकनीकी बाधाओं और वित्तीय प्रबंधन की भी जानकारी ली। बैठक में उपस्थित अभियंताओं को यह आभास हो गया कि नए नेतृत्व के तहत केवल कागजी रिपोर्ट से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर दिख रहे परिणामों को ही सफलता का मानक माना जाएगा।

बापू टावर से बुद्ध संग्रहालय तक: प्रतिष्ठित परियोजनाओं की अद्यतन स्थिति

​समीक्षा बैठक के दौरान प्रणव कुमार को राज्य के उन प्रतिष्ठित और आईकॉनिक भवनों के बारे में विस्तार से अवगत कराया गया, जिन्होंने हाल के वर्षों में बिहार को वैश्विक मानचित्र पर एक नई पहचान दी है। विभाग ने सफलतापूर्वक जिन परियोजनाओं को पूर्ण किया है और जो निर्माण के अंतिम चरण में हैं, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • बापू टावर: महात्मा गांधी के विचारों और उनके जीवन दर्शन को समर्पित यह टावर पटना की नई पहचान बन चुका है।
  • राजगीर खेल परिसर: अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला यह परिसर बिहार में खेल प्रतिभाओं को निखारने का मुख्य केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।
  • बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय एवं स्मृति स्तूप: वैशाली में निर्मित यह परियोजना बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए आकर्षण का वैश्विक केंद्र है।
  • पटना समाहरणालय: गंगा किनारे निर्मित यह नया परिसर आधुनिक प्रशासनिक सुविधा का उत्कृष्ट उदाहरण है।

​सचिव को इन भवनों की अद्यतन स्थिति के साथ-साथ उन भविष्य की महत्वपूर्ण परियोजनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई, जो पाइपलाइन में हैं। प्रणव कुमार ने इन परियोजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि बिहार के गौरव को बढ़ाने वाले ऐसे प्रतिष्ठित भवनों का निर्माण विभाग की श्रेष्ठता को सिद्ध करता है।

नया विजन: निर्माण के साथ-साथ संरक्षण और सौंदर्यीकरण पर बल

​प्रणव कुमार ने बैठक के दौरान एक बहुत ही संतुलित और दूरदर्शी दृष्टिकोण पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग की जिम्मेदारी केवल ईंट और पत्थर से नए भवनों का निर्माण कर देना मात्र नहीं है। उन्होंने अभियंताओं को निर्देश दिया कि सरकारी भवनों का बेहतर रखरखाव, तकनीकी मेंटेनेंस और सौंदर्यीकरण सुनिश्चित करना भी उनकी प्राथमिकता में शामिल होना चाहिए।

उनके निर्देशों के प्रमुख बिंदु:

  1. दीर्घकालिक संरक्षण तंत्र: सचिव ने कहा कि जिन भवनों का निर्माण सफलतापूर्वक हो चुका है, उनके लंबे समय तक सुरक्षित और व्यवस्थित रहने के लिए एक ‘प्रभावी तंत्र’ विकसित किया जाए। यह तंत्र केवल सिविल इंजीनियरिंग तक सीमित न रहकर तकनीकी मेंटेनेंस और निरंतर साफ-सफाई पर आधारित होना चाहिए।
  2. गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं: निर्माण कार्य के दौरान सामग्री और तकनीक की उच्चतम गुणवत्ता बनाए रखना अनिवार्य है ताकि राज्य की ढांचागत संपत्तियां आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहें।
  3. समय सीमा की पवित्रता: प्रणव कुमार ने परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूर्ण करने को अपनी ‘सर्वोच्च प्राथमिकता’ बताया। उन्होंने कहा कि देरी न केवल लागत बढ़ाती है बल्कि विकास के उद्देश्यों को भी बाधित करती है।

प्रशासनिक मुस्तैदी और टीम भावना का आह्वान

​विश्वेश्वरैया भवन की इस बैठक में विभाग के लगभग सभी प्रमुख चेहरों की मौजूदगी रही। अपर सचिव, संयुक्त सचिव, अभियंता प्रमुख और मुख्य अभियंताओं के साथ-साथ मुख्यालय के सभी पदाधिकारियों ने नए सचिव के विजन को सुना। प्रणव कुमार ने सभी को टीम भावना के साथ काम करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यालय से लेकर फील्ड में तैनात जूनियर इंजीनियर तक की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

​प्रणव कुमार का पिछला प्रशासनिक अनुभव और उनकी कार्य करने की रफ़्तार को देखते हुए यह माना जा रहा है कि भवन निर्माण विभाग अब ‘मेंटेनेंस और एस्थेटिक्स’ (सौंदर्यबोध) की दिशा में अधिक मुखर होगा। उन्होंने साफ-सफाई की व्यवस्था पर विशेष जोर दिया और कहा कि किसी भी सरकारी भवन की बाहरी और आंतरिक स्वच्छता ही वहां की कार्य संस्कृति का दर्पण होती है। उनके अनुसार, सरकारी कार्यालयों को इस प्रकार व्यवस्थित किया जाना चाहिए कि वहां आने वाली जनता और वहां काम करने वाले कर्मियों को एक सकारात्मक ऊर्जा महसूस हो।

भविष्य की ओर: बिहार के शहरी परिदृश्य का विस्तार

​11 मई 2026 की यह बैठक आने वाले समय में बिहार के शहरी बुनियादी ढांचे में आने वाले बड़े बदलावों की आधारशिला मानी जा रही है। प्रणव कुमार ने संकेत दिया कि वे जल्द ही राज्य के प्रमुख निर्माण स्थलों का औचक निरीक्षण भी करेंगे ताकि समीक्षा रिपोर्ट और धरातल की हकीकत के बीच के अंतर को समझा जा सके। उनका यह ‘प्रो-एक्टिव’ रुख उन ठेकेदारों और एजेंसियों के लिए भी एक चेतावनी है जो काम में ढिलाई बरतते रहे हैं।

​भवन निर्माण विभाग अब केवल कंक्रीट के ढांचे खड़ा करने वाली इकाई से आगे बढ़कर एक ऐसी संस्था के रूप में विकसित हो रहा है, जो वास्तुकला (Architecture) और आधुनिक सुविधाओं के सामंजस्य पर काम कर रही है। पटना के आसमान में उभरते नए स्काईलाइन्स और राजगीर से लेकर वैशाली तक फैले सांस्कृतिक गौरव के भवनों को सुरक्षित रखने की चुनौती अब प्रणव कुमार के कंधों पर है। विभाग के सभी वरीय पदाधिकारियों ने उनके नेतृत्व में योजनाओं को सफल बनाने का संकल्प लिया। फिलहाल, विश्वेश्वरैया भवन में फाइलों की रफ़्तार और अभियंताओं की सक्रियता यह बता रही है कि भवन निर्माण विभाग एक नए प्रशासनिक वेग के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार है।

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