​मालदा रेल मंडल की बड़ी कार्रवाई: बरहरवा में घर से भागी किशोरी का रेस्क्यू और भागलपुर स्टेशन पर विदेशी शराब का जखीरा बरामद

भागलपुर/मालदा। भारतीय रेलवे न केवल देश की जीवन रेखा है, बल्कि लाखों यात्रियों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा की जिम्मेदारी भी इसी तंत्र के कंधों पर होती है। मालदा रेल मंडल के तहत आने वाले विभिन्न स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने की दिशा में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने सोमवार, 11 मई 2026 को दो अलग-अलग और महत्वपूर्ण सफलताओं की जानकारी साझा की है। यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, संकटग्रस्त बच्चों के संरक्षण और रेल परिसरों में अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने के अपने निरंतर अभियान के तहत आरपीएफ ने बरहरवा स्टेशन पर एक 14 वर्षीय किशोरी को रेस्क्यू किया है, वहीं भागलपुर स्टेशन पर लावारिस अवस्था में भारी मात्रा में विदेशी शराब जब्त की गई है। ये दोनों अभियान मालदा मंडल रेल प्रबंधक मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन और मंडल सुरक्षा आयुक्त आशिम कुमार कुल्लू के पर्यवेक्षण में चलाए जा रहे विशेष निगरानी तंत्र का परिणाम हैं। आरपीएफ की इस सक्रियता ने एक तरफ एक परिवार को टूटने से बचाया है, तो दूसरी तरफ नशा तस्करों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है।

बरहरवा स्टेशन: घर से भागी किशोरी के लिए ढाल बना सुरक्षा बल

​पहली घटना 10 मई 2026 की है, जब बरहरवा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 02 पर नियमित गश्त के दौरान आरपीएफ के जवानों की नजर एक अकेली और घबराई हुई किशोरी पर पड़ी। लगभग 14 वर्ष की यह बालिका स्टेशन के कोलाहल के बीच असुरक्षित और दिशाहीन नजर आ रही थी। संदेह होने पर जब आरपीएफ कर्मियों ने संवेदनशीलता के साथ उससे पूछताछ की, तो एक दुखद पारिवारिक कहानी सामने आई। किशोरी ने बताया कि घर में हुए विवाद और तनाव के कारण वह अत्यधिक क्षुब्ध थी और बिना किसी को बताए घर छोड़कर निकल गई थी। इसी आपाधापी में वह गलत ट्रेन में सवार हो गई और बरहरवा स्टेशन पहुँच गई, जहाँ उसे समझ नहीं आ रहा था कि अब आगे क्या करना है।

​आरपीएफ की टीम ने तत्काल उसे अपनी सुरक्षा में लिया और बरहरवा पोस्ट पर लाया गया। यहाँ उसे भोजन और पानी उपलब्ध कराने के साथ-साथ उसकी काउंसलिंग की गई ताकि वह मानसिक तनाव से बाहर निकल सके। घटना की गंभीरता को देखते हुए चाइल्ड हेल्पलाइन को तुरंत सूचित किया गया। विधिक औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद, किशोरी को भविष्य की देखभाल और पुनर्वास के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन के प्रतिनिधियों को सुपुर्द कर दिया गया। यह रेस्क्यू ऑपरेशन केवल एक प्रशासनिक कार्य नहीं है, बल्कि यह रेलवे के उस मानवीय चेहरे को दर्शाता है जो अक्सर भीड़भाड़ वाले स्टेशनों पर खोई हुई मासूमियतों की रक्षा करता है।

भागलपुर स्टेशन: शराबबंदी के बीच तस्करी की कोशिश नाकाम

​दूसरी बड़ी सफलता भागलपुर रेलवे स्टेशन पर मिली, जो बिहार के सबसे व्यस्त स्टेशनों में से एक है। विशेष एंटी-कॉन्ट्राबैंड (अवैध सामग्री रोधी) जांच अभियान के दौरान आरपीएफ भागलपुर की टीम प्लेटफॉर्म संख्या 01 पर तलाशी ले रही थी। इसी दौरान टीम की नजर कुछ लावारिस बैगों पर पड़ी जो संदिग्ध अवस्था में रखे हुए थे। काफी देर तक जब उन बैगों का कोई मालिक सामने नहीं आया, तो आरपीएफ ने उन्हें अपने कब्जे में लेकर जांच की। बैग खोलते ही सुरक्षाकर्मी दंग रह गए, क्योंकि उनके भीतर विदेशी शराब की बोतलें बड़ी चालाकी से छिपाई गई थीं।

​गणना करने पर कुल 49 बोतल विदेशी शराब बरामद की गई, जिसका अनुमानित बाजार मूल्य लगभग 3,380 रुपये बताया जा रहा है। हालांकि राशि बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन ट्रेनों के माध्यम से शराब की तस्करी के बढ़ते पैटर्न को देखते हुए यह जब्ती महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जब्त की गई शराब को विधिवत प्रक्रिया के तहत आबकारी विभाग, भागलपुर को सौंप दिया गया है ताकि दोषियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके। यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि रेलवे अब तस्करों के लिए सुरक्षित रास्ता नहीं रह गया है और सुरक्षा एजेंसियां हर संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रखे हुए हैं।

रेलवे सुरक्षा बल की रणनीति और सामाजिक सरोकार (विशेष विश्लेषण)

​मालदा मंडल आरपीएफ द्वारा संचालित ये अभियान आधुनिक रेल पुलिसिंग के दो अलग-अलग आयामों को प्रकट करते हैं। एक तरफ जहाँ ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ के तहत बच्चों का रेस्क्यू किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ ‘ऑपरेशन सतर्क’ के जरिए नशीले पदार्थों के अवैध व्यापार पर चोट की जा रही है।

  1. सक्रिय निगरानी का तंत्र: मनीष कुमार गुप्ता और आशिम कुमार कुल्लू के नेतृत्व में आरपीएफ ने केवल सूचना मिलने पर प्रतिक्रिया देने के बजाय ‘प्रोएक्टिव’ (अग्रिम) दृष्टिकोण अपनाया है। स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरों की मदद और सादे लिबास में तैनात जवानों के कारण अब अपराधियों के लिए बच निकलना कठिन हो रहा है।
  2. बाल संरक्षण और काउंसलिंग: रेलवे स्टेशनों को अक्सर मानव तस्करी और बच्चों के घर से भागने के मुख्य केंद्र के रूप में देखा जाता है। बरहरवा में किशोरी का रेस्क्यू यह साबित करता है कि आरपीएफ के जवान अब केवल ‘गार्ड’ नहीं हैं, बल्कि वे बाल अधिकारों के प्रति संवेदनशील रक्षक भी हैं। चाइल्ड हेल्पलाइन के साथ उनका समन्वय इस तंत्र को और अधिक मजबूत बनाता है।
  3. शराब तस्करी की चुनौती: बिहार जैसे राज्य में, जहाँ शराबबंदी कानून कड़ाई से लागू है, ट्रेनों का उपयोग तस्करी के लिए एक बड़े माध्यम के रूप में किया जाता रहा है। भागलपुर स्टेशन पर हुई यह जब्ती दर्शाती है कि तस्कर अक्सर लावारिस सामान का सहारा लेते हैं ताकि पकड़े जाने पर वे अपनी पहचान छिपा सकें। लेकिन आरपीएफ की निरंतर जांच ने इस ‘स्लीपर’ तकनीक को नाकाम कर दिया है।

सुरक्षा के मानक और भविष्य की चुनौतियां

​मालदा मंडल की ओर से जारी बयान में यह स्पष्ट किया गया है कि यात्रियों की सुरक्षा केवल ट्रेनों के भीतर तक सीमित नहीं है, बल्कि स्टेशन के चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा का घेरा होना अनिवार्य है। भागलपुर और बरहरवा जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों पर इस तरह की सफलताएं आरपीएफ के मनोबल को बढ़ाती हैं। हालांकि, इन सफलताओं के बीच कुछ चुनौतियां भी खड़ी हैं। लावारिस बैगों के मालिकों का पता लगाना और तस्करी के नेटवर्क के मुख्य सरगनाओं तक पहुँचना अब भी एक बड़ी पहेली है। अक्सर छोटे ‘कैरियर’ ही पकड़ में आते हैं, जबकि मुख्य नेटवर्क पर्दे के पीछे सुरक्षित रहता है।

​सुरक्षा आयुक्त आशिम कुमार कुल्लू ने निर्देश दिया है कि आने वाले दिनों में ट्रेनों में औचक निरीक्षण और स्टेशनों पर ‘एंटी-क्राइम’ गश्त को और अधिक सघन किया जाएगा। विशेष रूप से उन ट्रेनों पर नजर रखी जा रही है जो पड़ोसी राज्यों से आती हैं और जहाँ से शराब या अन्य प्रतिबंधित सामग्री की तस्करी की अधिक संभावना रहती है। वहीं, सामाजिक दृष्टिकोण से देखें तो बरहरवा की घटना यह सोचने पर मजबूर करती है कि पारिवारिक कलह किस तरह बच्चों को असुरक्षित रास्तों पर धकेल रही है।

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