
भागलपुर। गंगा की लहरों पर खड़ा विक्रमशिला सेतु केवल ईंट और कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि दक्षिण बिहार को उत्तर बिहार और सीमांचल से जोड़ने वाली एक मजबूत धड़कन है। लेकिन इस सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद से भागलपुर और आसपास के जिलों में परिवहन का जो महासंकट खड़ा हुआ है, उसने आम जनजीवन की रफ्तार को पूरी तरह बेपटरी कर दिया है। सड़कों पर पसरे सन्नाटे और बस स्टैंडों की वीरानी के बीच अब भारतीय रेलवे एक ‘संकटमोचक’ की भूमिका में सामने आया है। पूर्वी रेलवे ने जनहित और यात्रियों की बढ़ती परेशानियों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए देवघर और सरायगढ़ के बीच एक विशेष अनारक्षित ट्रेन चलाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। रविवार, 10 मई 2026 को कोलकाता स्थित पूर्वी रेलवे मुख्यालय से जारी अधिसूचना के अनुसार, यह ट्रेन सेवा उन हजारों लोगों के लिए संजीवनी साबित होगी जो पुल बाधित होने के कारण अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए जद्दोजहद कर रहे थे। यह ट्रेन न केवल भागलपुर को कोसी और सीमांचल से जोड़ेगी, बल्कि बांका और मुंगेर जैसे महत्वपूर्ण जिलों के बीच भी परिवहन की नई कड़ी बनेगी।
परिवहन के ‘लकवे’ का रेलवे ने निकाला समाधान
विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने का सबसे गहरा घाव उन व्यापारियों, छात्रों और दैनिक यात्रियों को लगा है जो प्रतिदिन गंगा पार कर अपनी आजीविका और शिक्षा के लिए निकलते हैं। भागलपुर से नवगछिया, कटिहार, सहरसा, मधेपुरा और किशनगंज जैसे क्षेत्रों का सड़क संपर्क टूटने से आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस भौगोलिक बाधा ने भागलपुर को एक तरह से शेष उत्तर बिहार से अलग-थलग कर दिया था। जनहित की इसी पुकार को सुनते हुए पूर्वी रेलवे ने त्वरित कार्रवाई की और देवघर-सरायगढ़ अनारक्षित मेमू (MEMU) विशेष ट्रेन सेवा की घोषणा की।
रेलवे के इस साहसिक हस्तक्षेप का उद्देश्य केवल ट्रेन चलाना नहीं, बल्कि उस विश्वास को बहाल करना है जो पुल टूटने के बाद डगमगा गया था। यह विशेष ट्रेन 31 मई 2026 तक संचालित की जाएगी, जिससे उम्मीद है कि तब तक पुल की मरम्मत या अन्य वैकल्पिक सड़क व्यवस्थाएं सुदृढ़ हो जाएंगी। यह सेवा उन लोगों के लिए वरदान है जो निजी वाहनों का महंगा किराया वहन करने में असमर्थ थे।
देवघर-सरायगढ़ स्पेशल: समय और परिचालन का पूरा ब्यौरा
पूर्वी रेलवे ने इस विशेष ट्रेन के परिचालन के लिए जो समय सारणी तैयार की है, वह यात्रियों की सुविधा और कनेक्टिविटी को ध्यान में रखकर बनाई गई है। यह एक पूरी तरह से अनारक्षित मेमू ट्रेन है, जिसका अर्थ है कि यात्रियों को लंबी प्रतीक्षा सूची या पहले से टिकट बुक कराने की झंझट से मुक्ति मिलेगी। वे सीधे स्टेशन पहुँचकर टिकट काउंटर से टिकट लेकर इस सुगम यात्रा का हिस्सा बन सकते हैं।
ट्रेन संख्या 05573 (सरायगढ़ से देवघर):
यह ट्रेन 31 मई 2026 तक प्रतिदिन संचालित होगी। सरायगढ़ स्टेशन से यह तड़के 03:05 बजे प्रस्थान करेगी। सुबह के समय प्रस्थान करने से उन व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों को बड़ी सुविधा होगी जो दिनभर का काम निपटाकर वापस लौटना चाहते हैं। यह ट्रेन उसी दिन सुबह 11:20 बजे देवघर पहुँचेगी। सरायगढ़ और कोसी क्षेत्र के लोगों के लिए देवघर (बाबाधाम) की यह सीधी कनेक्टिविटी न केवल परिवहन बल्कि धार्मिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।
ट्रेन संख्या 05574 (देवघर से सरायगढ़):
वापसी की दिशा में यह ट्रेन देवघर से प्रतिदिन सुबह 11:35 बजे प्रस्थान करेगी। यह समय उन यात्रियों के लिए अनुकूल है जो बांका या भागलपुर की ओर से सरायगढ़ की यात्रा करना चाहते हैं। देवघर से खुलकर यह ट्रेन रात्रि 22:15 बजे सरायगढ़ स्टेशन पहुँचेगी। रात्रि में सरायगढ़ पहुँचने के बावजूद, रेलवे ने सुरक्षा और स्टेशन पर आवश्यक सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए हैं ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुरक्षा महसूस न हो।
बांका, मुंगेर और भागलपुर के लिए विशेष स्टॉपेज
इस ट्रेन की सबसे बड़ी खूबी इसका रूट मैप है, जो पूर्वी बिहार के प्रमुख केंद्रों को कवर करता है। पूर्वी रेलवे के क्षेत्राधिकार में आने वाले जिन स्टेशनों पर यह ट्रेन रुकेगी, वे स्वयं में परिवहन के बड़े केंद्र हैं।
- बांका और बाराहाट: बांका जिले के लोगों के लिए भागलपुर और कोसी क्षेत्र की यात्रा हमेशा से चुनौतीपूर्ण रही है। इस ट्रेन के बाराहाट और बांका में रुकने से इन क्षेत्रों के किसानों और छोटे व्यापारियों को अपनी उपज और सामान बाजार तक पहुँचाने में आसानी होगी।
- भागलपुर और सुल्तानगंज: भागलपुर स्टेशन इस रूट का हृदय स्थल है। विक्रमशिला सेतु के अभाव में अब यही ट्रेन गंगा पार करने और उत्तर बिहार तक पहुँचने का सबसे भरोसेमंद माध्यम बनेगी। वहीं, सुल्तानगंज में ठहराव होने से उन श्रद्धालुओं और यात्रियों को लाभ मिलेगा जो गंगा स्नान या अन्य सामाजिक कार्यों के लिए इस ऐतिहासिक नगर में आते हैं।
- मुंगेर और रतनपुर: मुंगेर के रेल सह सड़क पुल के बाद यह मेमू सेवा मुंगेर और सरायगढ़ के बीच की दूरी को कम करेगी। रतनपुर जैसे छोटे स्टेशनों पर ठहराव देकर रेलवे ने ग्रामीण आबादी को भी मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया है।
दैनिक यात्रियों और छात्रों के लिए ‘लाइफलाइन’
विक्रमशिला सेतु के बंद होने से सबसे अधिक परेशानी उन छात्रों को हो रही थी जो भागलपुर के विभिन्न शिक्षण संस्थानों और कोचिंग सेंटरों में पढ़ाई करते हैं। पूर्णिया, सहरसा और मधेपुरा से आने वाले छात्रों के लिए अब यह ट्रेन एक सुरक्षित ‘लाइफलाइन’ बनेगी। रात को घर से निकलकर या तड़के ट्रेन पकड़कर वे समय पर भागलपुर पहुँच सकेंगे। इसी तरह, सरकारी और निजी दफ्तरों में काम करने वाले कर्मियों के लिए, जो प्रतिदिन नवगछिया या आसपास के इलाकों से भागलपुर आते थे, उनके लिए यह मेमू सेवा सड़क जाम और नाव के जोखिम भरे सफर का एक बेहतर विकल्प बनकर उभरी है।
व्यापारिक दृष्टिकोण से देखें तो भागलपुर का कपड़ा उद्योग और खाद्यान्न मंडी पूरी तरह से सीमांचल के बाजारों पर निर्भर है। ट्रकों की आवाजाही बाधित होने से माल ढुलाई प्रभावित हुई है। हालांकि मेमू ट्रेन मालवाहक नहीं है, लेकिन छोटे व्यापारियों के लिए अपने सैंपल लेकर बाजार तक पहुँचना और व्यापारिक सौदे करना अब आसान हो जाएगा। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यह कदम केवल परिवहन नहीं, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
31 मई तक का ‘सुरक्षा कवच’ और भविष्य की राह
पूर्वी रेलवे ने फिलहाल इस सेवा को 31 मई 2026 तक ही चलाने का निर्णय लिया है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इस अवधि के दौरान विक्रमशिला सेतु की स्थिति का पुनः मूल्यांकन किया जाएगा। यदि पुल की मरम्मत में अधिक समय लगता है, तो इस विशेष ट्रेन की अवधि को और बढ़ाया जा सकता है। रेलवे प्रशासन ने बांका से लेकर सरायगढ़ तक के सभी स्टेशनों को अलर्ट पर रखा है ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और यात्रियों को टिकट प्राप्त करने में कोई असुविधा न हो।
विशेष रूप से भागलपुर और मुंगेर जैसे स्टेशनों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल की तैनाती की गई है। चूंकि यह ट्रेन अनारक्षित है, इसलिए भीड़ बढ़ने की प्रबल संभावना है। इसके लिए रेलवे ने अतिरिक्त बोगियां जोड़ने का विकल्प भी खुला रखा है। इस ट्रेन सेवा की शुरुआत यह साबित करती है कि जब प्राकृतिक या ढांचेगत आपदाएं जनजीवन को रोकती हैं, तो भारतीय रेलवे ही वह सहारा बनता है जो राष्ट्र को निरंतर गतिमान रखता है। भागलपुर और सीमांचल के निवासियों ने रेलवे के इस फैसले का स्वागत किया है और इसे इस कठिन समय में एक बड़ी राहत करार दिया है।
समाचार डेस्क, भागलपुर।


