
बिहार और झारखंड के बीच कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाली मुंगेर–मिर्जाचौकी ग्रीनफील्ड फोरलेन सड़क अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। करीब 124 किलोमीटर लंबी यह महत्वाकांक्षी परियोजना 30 जून तक पूरी तरह तैयार हो सकती है। इसके शुरू होते ही बिहार से झारखंड और पश्चिम बंगाल की यात्रा तेज, सुरक्षित और सुगम हो जाएगी।
कोसी और सीमांचल को मिलेगा बड़ा फायदा
इस फोरलेन सड़क के शुरू होने से खगड़िया, बेगूसराय, कोसी और सीमांचल क्षेत्रों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। भारी वाहनों से लेकर आम यात्रियों तक सभी के लिए सफर आसान होगा।
नई सड़क बनने के बाद यात्रा समय में बड़ी कमी आएगी और लंबे जाम की समस्या से भी राहत मिलने की उम्मीद है।
अंतिम चरण में निर्माण कार्य
परियोजना का निर्माण National Highways Authority of India (NHAI) द्वारा कराया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और केवल कुछ हिस्सों में अंतिम चरण का काम जारी है। पाटम से तेलिया तालाब के पास आंशिक निर्माण कार्य चल रहा है, जबकि अकबरनगर क्षेत्र में बिजली ट्रांसमिशन लाइन शिफ्टिंग का काम अंतिम दौर में है।
परियोजना निदेशक Manish Kumar ने बताया कि पैकेज-3 में रसलपुर के पास तकनीकी दिक्कत है, जिसे जल्द दूर कर लिया जाएगा।
करीब 5000 करोड़ की परियोजना
करीब 5000 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना पहले NH-80 के नाम से जानी जाती थी, जिसे अब बदलकर NH-33 कर दिया गया है।
यह सड़क बिहार के कई प्रमुख शहरों को जोड़ते हुए झारखंड और पश्चिम बंगाल तक सीधा संपर्क स्थापित करेगी।
चार पैकेज में तैयार हो रहा फोरलेन
पैकेज-1
मुंगेर–खड़िया–पिपरा तक 26 किलोमीटर
लागत: 981 करोड़ रुपये
पैकेज-2
खड़िया–भागलपुर बाईपास तक 29 किलोमीटर
लागत: 981 करोड़ रुपये
पैकेज-3
बाईपास चौधरीडीह–रसलपुर तक 32 किलोमीटर
लागत: 1012 करोड़ रुपये
पैकेज-4
रसलपुर–मिर्जाचौकी तक 36 किलोमीटर
लागत: 892 करोड़ रुपये
चारों पैकेज का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और अंतिम फिनिशिंग व कनेक्टिविटी का काम तेजी से चल रहा है।
परिवहन और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा
फोरलेन शुरू होने के बाद खगड़िया, बेगूसराय, कोसी और सीमांचल की ओर जाने वाले वाहन कृष्ण सेतु के पास सर्विस लेन का उपयोग कर आसानी से अपने मार्ग पर जा सकेंगे।
वहीं मुंगेर से मिर्जाचौकी की ओर जाने वाले वाहन सीधे फ्लाईओवर से तेज गति में गुजर पाएंगे।
विकास को मिलेगी नई दिशा
इस परियोजना के पूरा होने के बाद बिहार और झारखंड के बीच यात्रा आसान होने के साथ-साथ व्यापार, उद्योग और परिवहन क्षेत्र को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि यह सड़क क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देगी और आर्थिक गतिविधियों को भी गति प्रदान करेगी।


