नेहरू मेमोरियल तालाब निर्माण की राह हुई आसान, पेड़ों की कटाई के बदले लगाए जाएंगे चार गुना पौधे

भागलपुर: सैंडिस कंपाउंड स्थित ऐतिहासिक नेहरू मेमोरियल तालाब के निर्माण और सौंदर्यीकरण की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। लंबे समय से तकनीकी और पर्यावरणीय कारणों से अटका यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अब जल्द ही जमीन पर उतरता दिखाई दे रहा है। नगर निगम और वन विभाग के बीच हुई अहम बैठक में उन बाधाओं को दूर करने पर सहमति बनी, जिनकी वजह से निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो पा रहा था। सबसे महत्वपूर्ण फैसला यह लिया गया कि यदि निर्माण कार्य के दौरान किसी अपरिहार्य परिस्थिति में पेड़ या झाड़ियों की कटाई करनी पड़ती है, तो उसकी भरपाई के लिए चार गुना अधिक पौधे लगाए जाएंगे।

शनिवार को भागलपुर की माननीय महापौर महोदया ने जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO) से उनके कार्यालय में मुलाकात कर नेहरू मेमोरियल तालाब परियोजना पर विस्तार से चर्चा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य वन विभाग की ओर से लंबित अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) से संबंधित समस्याओं का समाधान निकालना था, ताकि निर्माण कार्य में हो रही देरी समाप्त हो सके।

बैठक के दौरान वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि तालाब निर्माण स्थल पर कुछ पेड़ों और झाड़ियों की मौजूदगी के कारण NOC निर्गत करने की प्रक्रिया रुकी हुई थी। वन विभाग पर्यावरण संरक्षण के नियमों के तहत बिना उचित क्षतिपूर्ति योजना के अनुमति देने की स्थिति में नहीं था। इस पर महापौर महोदया ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने का प्रस्ताव रखा।

महापौर ने कहा कि शहर के विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी नगर निगम की प्राथमिकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि निर्माण कार्य के लिए कुछ पेड़ों को हटाना जरूरी हो, तो उनकी भरपाई के लिए चार गुना अधिक पौधे लगाए जाएं। इस प्रस्ताव को वन विभाग ने सकारात्मक रूप से स्वीकार किया।

बैठक में यह तय किया गया कि नगर निगम और वन विभाग संयुक्त रूप से पौधारोपण अभियान चलाएंगे। निर्माण कार्य से प्रभावित हर पेड़ के बदले चार नए पौधे लगाए जाएंगे और उनकी देखभाल की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी। इस सहमति के बाद जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी ने संकेत दिया कि जल्द ही NOC जारी कर दी जाएगी, जिससे नेहरू मेमोरियल तालाब के निर्माण कार्य का रास्ता साफ हो जाएगा।

महापौर महोदया ने बैठक के बाद कहा कि नेहरू मेमोरियल तालाब केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि भागलपुर शहर की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय पहचान से जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने कहा कि तालाब के पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण से न केवल शहर की सुंदरता बढ़ेगी, बल्कि जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को भी मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि तेजी से शहरीकरण के बीच जल स्रोतों का संरक्षण बेहद जरूरी हो गया है। तालाबों और जलाशयों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए आवश्यक है। ऐसे में नगर निगम इस परियोजना को केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि इसे पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मॉडल बनाना चाहता है।

बैठक के बाद महापौर महोदया ने सुंदरवन स्थित वन विभाग के विभिन्न संरक्षण केंद्रों का भी भ्रमण किया। उन्होंने वहां संचालित गरुड़ संरक्षण पार्क सह अस्पताल और कछुआ संरक्षण पार्क का निरीक्षण किया। वन विभाग के अधिकारियों ने उन्हें इन परियोजनाओं की कार्यप्रणाली और संरक्षण गतिविधियों की जानकारी दी।

गरुड़ संरक्षण पार्क में घायल पक्षियों के इलाज और संरक्षण की व्यवस्था को देखकर महापौर ने संतोष जताया। उन्होंने कहा कि वन्य जीवों और पक्षियों के संरक्षण के लिए इस प्रकार के प्रयास समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का काम करते हैं।

इसके अलावा उन्होंने कछुआ संरक्षण पार्क का भी दौरा किया और वहां चल रहे संरक्षण कार्यक्रमों की जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि इन केंद्रों का उद्देश्य जैव विविधता को बचाना और विलुप्त होती प्रजातियों के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है।

महापौर महोदया ने वन विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि शहर के विकास कार्यों में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है और भागलपुर नगर निगम इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहा है।

नेहरू मेमोरियल तालाब परियोजना को लेकर शहरवासियों में भी लंबे समय से उत्सुकता बनी हुई थी। सैंडिस कंपाउंड भागलपुर का प्रमुख सार्वजनिक स्थल माना जाता है और यहां स्थित तालाब का ऐतिहासिक महत्व भी है। वर्षों से उपेक्षा का शिकार रहे इस तालाब के पुनर्निर्माण की मांग लगातार उठती रही है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि तालाब का विकास होने से यह स्थान पर्यटन और मनोरंजन का प्रमुख केंद्र बन सकता है। साथ ही शहर में जल संरक्षण की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में तालाबों का संरक्षण भूजल स्तर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। यदि तालाबों का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्विकास किया जाए तो इससे वर्षा जल संचयन को भी बढ़ावा मिलता है।

नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, निर्माण कार्य शुरू होने के बाद तालाब परिसर को आधुनिक सुविधाओं से विकसित किया जाएगा। यहां साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, बैठने की सुविधा और हरियाली बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य इसे पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित करना है।

महापौर महोदया ने कहा कि भागलपुर को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण अनुकूल शहर बनाने के लिए नगर निगम लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वन विभाग के सहयोग से यह परियोजना जल्द ही शुरू होगी और शहरवासियों को एक नया आकर्षक सार्वजनिक स्थल मिलेगा।

नेहरू मेमोरियल तालाब परियोजना को लेकर नगर निगम और वन विभाग के बीच बनी यह सहमति विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का एक सकारात्मक उदाहरण मानी जा रही है। स्थानीय लोगों को अब उम्मीद है कि वर्षों से लंबित यह परियोजना जल्द पूरी होगी और भागलपुर शहर को एक नई पहचान मिलेगी।

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