भागलपुर के कन्या उर्दू विद्यालय में अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी, बच्चों के बेहतर भविष्य को लेकर बना साझा संकल्प

भागलपुर जिले के जगदीशपुर प्रखंड स्थित सलीमपुर कन्या उर्दू प्राथमिक विद्यालय में शनिवार को “हमारे बच्चे – हमारी जिम्मेदारी” विषय पर एक महत्वपूर्ण अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों की शिक्षा, संस्कार, स्वास्थ्य और भविष्य को लेकर अभिभावकों और शिक्षकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना था। विद्यालय परिसर में आयोजित इस संगोष्ठी में बड़ी संख्या में अभिभावकों ने भाग लिया और बच्चों के सर्वांगीण विकास को लेकर अपने विचार साझा किए।

“मिलकर बनाएं बच्चों का उज्ज्वल भविष्य” के संकल्प के साथ आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की प्रधान शिक्षिका स्मिता ने की, जबकि संचालन शिक्षक सलीम जावेद ने किया। संगोष्ठी के दौरान शिक्षा व्यवस्था, बच्चों की नियमित उपस्थिति, घर में पढ़ाई का माहौल, स्वच्छता, स्वास्थ्य और नैतिक मूल्यों जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बच्चों की शिक्षा में अभिभावकों की भूमिका पर जोर

संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि केवल विद्यालय की जिम्मेदारी से बच्चों का भविष्य नहीं संवारा जा सकता, बल्कि इसके लिए अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। प्रधान शिक्षिका स्मिता ने कहा कि जब तक शिक्षक और अभिभावक मिलकर बच्चों के विकास के लिए काम नहीं करेंगे, तब तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि बच्चों की नियमित उपस्थिति और घर पर पढ़ाई का वातावरण तैयार करना अभिभावकों की बड़ी जिम्मेदारी है। कई बार बच्चे स्कूल तो आते हैं, लेकिन घर में पढ़ाई के लिए उचित माहौल नहीं मिल पाता, जिससे उनका सीखने का स्तर प्रभावित होता है। इसलिए विद्यालय और परिवार दोनों को समान रूप से जिम्मेदारी निभानी होगी।

शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी

कार्यक्रम में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि आज के दौर में केवल किताबों की शिक्षा ही पर्याप्त नहीं है। बच्चों में नैतिकता, अनुशासन, सामाजिक व्यवहार और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी बेहद जरूरी है।

शिक्षकों ने कहा कि बच्चों को बचपन से ही अच्छे संस्कार दिए जाएं तो वे आगे चलकर समाज के जिम्मेदार नागरिक बनते हैं। इसके लिए विद्यालय में समय-समय पर सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का आयोजन किया जाना चाहिए।

अभिभावकों ने भी इस बात पर सहमति जताई कि मोबाइल और डिजिटल दुनिया के बढ़ते प्रभाव के बीच बच्चों को सकारात्मक दिशा देना आज सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है।

अभिभावकों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव

संगोष्ठी में मौजूद अभिभावकों ने विद्यालय की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कई सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित होने चाहिए ताकि शिक्षक और अभिभावकों के बीच संवाद बना रहे।

अभिभावकों ने बच्चों की पढ़ाई में सहयोग देने और उन्हें नियमित विद्यालय भेजने का भरोसा दिलाया। कई अभिभावकों ने यह भी कहा कि बच्चों के विकास के लिए घर और स्कूल दोनों जगह अनुशासन का माहौल जरूरी है।

विद्यालय शिक्षा समिति की सचिव बीबी तोहफा सहित अन्य अभिभावकों ने विद्यालय परिसर की स्वच्छता और शिक्षकों की सक्रियता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि बच्चों को बेहतर माहौल देने के लिए वे भी हर संभव सहयोग करेंगे।

स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता पर चर्चा

संगोष्ठी में बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण के मुद्दे पर भी विशेष चर्चा की गई। शिक्षकों ने अभिभावकों को बताया कि बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए संतुलित आहार बेहद जरूरी है।

साथ ही स्वच्छता को लेकर भी जागरूकता फैलाने पर जोर दिया गया। बच्चों को साफ-सफाई की आदतें सिखाने और विद्यालय परिसर को स्वच्छ बनाए रखने में अभिभावकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया।

प्रधान शिक्षिका स्मिता ने कहा कि विद्यालय में पेयजल और साफ-सफाई की व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम ने बढ़ाया उत्साह

संगोष्ठी के दौरान बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया, जिसे अभिभावकों और शिक्षकों ने खूब सराहा। बच्चों ने गीत, कविता और समूह प्रस्तुतियों के माध्यम से शिक्षा और संस्कार का संदेश दिया।

कार्यक्रम में मौजूद अभिभावकों ने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियों से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और उनमें छिपी प्रतिभा को मंच मिलता है। कई अभिभावकों ने विद्यालय से भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने का अनुरोध किया।

नियमित संवाद पर बनी सहमति

संगोष्ठी में शिक्षकों और अभिभावकों के बीच यह सहमति बनी कि बच्चों की पढ़ाई और प्रगति को लेकर नियमित संवाद किया जाएगा।

विद्यालय प्रशासन ने कहा कि समय-समय पर अभिभावक बैठक आयोजित की जाएगी ताकि बच्चों की समस्याओं और जरूरतों पर चर्चा हो सके। साथ ही बच्चों की उपस्थिति और पढ़ाई की नियमित समीक्षा भी की जाएगी।

बच्चों के सर्वांगीण विकास का संकल्प

प्रधान शिक्षिका स्मिता ने अपने संबोधन में कहा कि विद्यालय का लक्ष्य केवल परीक्षा परिणाम बेहतर करना नहीं, बल्कि बच्चों का सर्वांगीण विकास करना है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ बच्चों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव तभी संभव है जब अभिभावक और शिक्षक एक टीम की तरह काम करें। बच्चों का भविष्य केवल स्कूल या परिवार अकेले नहीं बना सकते, बल्कि दोनों की साझी जिम्मेदारी से ही मजबूत नींव तैयार होगी।

समाज के लिए सकारात्मक पहल

स्थानीय लोगों ने इस संगोष्ठी को एक सकारात्मक पहल बताया। उनका कहना था कि आज के समय में शिक्षा को लेकर इस प्रकार की जागरूकता बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विद्यालयों में नियमित रूप से अभिभावक-शिक्षक संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएं तो बच्चों की शिक्षा और व्यवहार में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

कार्यक्रम में शामिल रहे कई अभिभावक

संगोष्ठी में विद्यालय शिक्षा समिति की सचिव बीबी तोहफा, बीबी रेशमा, नुसरत, बीबी साजदा, नासरीन, बीबी मलका, नाजरीन खातून, गुलफसां नाज, गुफराना खातून, बीबी फरहत जहां, रहमती खातून सहित बड़ी संख्या में अभिभावक मौजूद रहे।

अंत में शिक्षक सलीम जावेद ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि बच्चों का उज्ज्वल भविष्य सभी की साझा जिम्मेदारी है और इस दिशा में विद्यालय लगातार प्रयास करता रहेगा।

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