पटना सिटी में अपराधियों का कहर: दीदारगंज में बुजुर्ग कार चालक की गोली मारकर हत्या; 24 घंटे में दो कत्ल से दहला इलाका

पटना। बिहार की राजधानी के पटना सिटी इलाके में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब पुलिस का इकबाल पूरी तरह खत्म होता नजर आ रहा है। दीदारगंज थाना क्षेत्र के खानमिर्जा गांव में अपराधियों ने एक 62 वर्षीय कार चालक की गोली मारकर हत्या कर दी। शनिवार की सुबह जब ग्रामीण अपने खेतों की ओर निकले, तो एक बुजुर्ग का लथपथ शव देखकर इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान सोनावा गांव निवासी रामप्रवेश सिंह के रूप में हुई है। इस घटना ने न केवल पुलिस की गश्ती पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि स्थानीय लोगों के मन में गहरा खौफ पैदा कर दिया है। दीदारगंज इलाके में पिछले 24 घंटों के भीतर यह दूसरी हत्या है, जिससे स्पष्ट होता है कि अपराधियों के मन में कानून का कोई भय शेष नहीं रह गया है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, लेकिन हत्या के कारणों पर अभी भी सस्पेंस बरकरार है।

खेतों के बीच मिला लहूलुहान शव: मर्डर या सोची-समझी साजिश?

​शनिवार की सुबह खानमिर्जा गांव के लिए एक डरावनी खबर लेकर आई। खेतों के बीचों-बीच एक बुजुर्ग का शव पड़ा था, जिनके सीने पर गोली के गहरे निशान थे। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण वहां जमा हो गए। शिनाख्त के दौरान पता चला कि यह शव रामप्रवेश सिंह का है, जो पेशे से कार चालक थे और सोनावा गांव के रहने वाले थे। घटनास्थल का नजारा चीख-चीख कर गवाही दे रहा था कि हत्या से पहले वहां बड़ी कशमकश हुई थी।

​घटना की सूचना मिलते ही फतुहा डीएसपी अवधेश कुमार और दीदारगंज थानाध्यक्ष सुनील कुमार दल-बल के साथ मौके पर पहुँचे। फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम ने भी साक्ष्य जुटाने के लिए जमीन की बारीकी से जांच की। पुलिस के अनुसार, हत्या का तरीका बताता है कि अपराधी रामप्रवेश को पहले से जानते थे या उन्हें किसी बहाने से सुनसान जगह पर बुलाया गया था। फिलहाल, पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए नालंदा मेडिकल कॉलेज (NMC) भेज दिया है।

हाथापाई और संघर्ष के निशान: मौत से पहले हुई थी जंग

​मृतक के चचेरे भाई सतीश कुमार ने घटना के बारे में जो जानकारियां साझा की हैं, वे काफी चौंकाने वाली हैं। सतीश के अनुसार, शुक्रवार की शाम करीब सात बजे रामप्रवेश के मोबाइल पर किसी का फोन आया था। फोन पर बात करने के बाद उन्होंने परिजनों से कहा कि वे कुछ देर में लौट आएंगे और घर से निकल गए। जब देर रात तक वे वापस नहीं आए, तो परिजनों ने उनकी खोजबीन शुरू की। उनके मोबाइल पर लगातार कॉल किया गया, लेकिन वह बंद मिला। शनिवार की सुबह ग्रामीणों से उनकी हत्या की सूचना मिली।

​सतीश कुमार ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद बताया कि रामप्रवेश और अपराधियों के बीच संभवतः भीषण हाथापाई हुई थी। जिस खेत में शव पड़ा था, वहां के पौधे पूरी तरह कुचले हुए थे। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि बुजुर्ग ने अपनी जान बचाने के लिए अपराधियों से लोहा लिया होगा या गोली लगने के बाद वे भागने की कोशिश में लड़खड़ा कर गिरे होंगे। शव से थोड़ी ही दूरी पर उनका मोबाइल फोन फेंका हुआ मिला, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अपराधियों का उद्देश्य लूटपाट नहीं, बल्कि केवल उनकी हत्या करना था। मोबाइल के कॉल रिकॉर्ड्स अब इस मामले की सबसे अहम कड़ी साबित हो सकते हैं।

24 घंटे में दो हत्याएं: दीदारगंज में ‘क्राइम वेव’ का खौफ

​दीदारगंज थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। रामप्रवेश सिंह की हत्या से ठीक 24 घंटे पहले, गुरुवार की रात कोठिया गांव में ‘हर्ष’ नाम के एक युवक की उसके ही दोस्तों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। बताया जाता है कि हर्ष को उसके दोस्तों ने आपसी रंजिश में घर से बुलाकर मौत के घाट उतार दिया था। एक ही थाना क्षेत्र में महज 24 घंटे के अंतराल पर दो हत्याओं ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

​स्थानीय निवासियों का कहना है कि शाम ढलते ही दीदारगंज के खानमिर्जा और कोठिया जैसे इलाकों में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है। पुलिस की गश्ती केवल मुख्य सड़कों तक सीमित रहती है, जिसका फायदा उठाकर अपराधी ग्रामीण इलाकों और खेतों में वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। हर्ष के हत्यारे भी अब तक पुलिस की पकड़ से दूर हैं और अब रामप्रवेश की हत्या ने पुलिस की चुनौतियों को दोगुना कर दिया है। लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं और पुलिस केवल कागजी खानापूर्ति में जुटी है।

तफ्तीश का रुख: कॉल रिकॉर्ड्स और आपसी रंजिश पर नजर

​फतुहा डीएसपी अवधेश कुमार ने मौके पर जांच पड़ताल के बाद बताया कि परिजनों के विस्तृत बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस की एक विशेष टीम रामप्रवेश सिंह के कॉल डिटेल्स निकाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि शुक्रवार की शाम उन्हें आखिरी फोन किसका आया था। पुलिस को शक है कि कोई करीबी व्यक्ति या जान-पहचान का शख्स ही उन्हें घर से बुलाकर ले गया होगा।

​थानाध्यक्ष सुनील कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। परिजनों की ओर से अभी लिखित आवेदन मिलना बाकी है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या रामप्रवेश सिंह का किसी के साथ कोई पुराना विवाद या जमीन से जुड़ा झगड़ा था। हाथापाई के निशान यह भी संकेत देते हैं कि अपराधी एक से अधिक रहे होंगे। एफएसएल की टीम ने घटनास्थल से कुछ उंगलियों के निशान और अन्य सुराग जुटाए हैं, जिन्हें लैब भेजा गया है।

दहशत में डूबे ग्रामीण: शाम होते ही घरों में दुबकने को मजबूर

​लगातार हो रही हत्याओं ने दीदारगंज के गांवों में डर का माहौल पैदा कर दिया है। लोग अब शाम के बाद घर से बाहर निकलने में डर रहे हैं। रामप्रवेश सिंह जैसे बुजुर्ग और शांत स्वभाव के व्यक्ति की हत्या ने हर किसी को डरा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि एक कार चालक, जिसकी किसी से कोई बड़ी दुश्मनी नहीं थी, वह सुरक्षित नहीं है, तो आम आदमी की सुरक्षा का क्या होगा?

​पुलिस ने अपराधियों के संभावित ठिकानों पर छापेमारी का दावा किया है, लेकिन धरातल पर अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। हर्ष हत्याकांड के आरोपी भी 24 घंटे बाद गिरफ्त से बाहर हैं, जो पुलिस की विफलता को दर्शाता है। पुलिस के वरीय अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही दोनों मामलों का खुलासा कर लिया जाएगा और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। फिलहाल, रामप्रवेश सिंह के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे शासन-प्रशासन से केवल एक ही मांग कर रहे हैं—’इंसाफ’।

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