
पटना। बिहार की वह पावन माटी, जिसकी पहचान कभी बिस्मिल्लाह खान की शहनाई, भिखारी ठाकुर के लोकगीतों और शारदा सिन्हा के सुरीले कंठ से हुआ करती थी, आज डिजिटल युग की अश्लीलता के कारण एक अजीबोगरीब संकट से गुजर रही है। पिछले कुछ वर्षों में ‘सस्ती लोकप्रियता’ हासिल करने की होड़ में कुछ गायकों और संगीत निर्माताओं ने लोक-संस्कृति के नाम पर जो फूहड़ता परोसी है, उसने न केवल प्रदेश की छवि को धूमिल किया है, बल्कि नई पीढ़ी के संस्कारों पर भी गहरा प्रहार किया है। इस सांस्कृतिक पतन को रोकने के लिए अब सरकार ने निर्णायक जंग का ऐलान कर दिया है। नवनियुक्त कला एवं संस्कृति मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने पदभार ग्रहण करते ही इस दिशा में कड़े रुख का परिचय दिया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अश्लीलता के जरिए समाज में जहर घोलने वाले कलाकारों और निर्माताओं की अब खैर नहीं है। प्रमोद चंद्रवंशी की इस चेतावनी ने उन लोगों के बीच खलबली मचा दी है जो द्विअर्थी संवादों और फूहड़ शब्दों के दम पर करोड़ों व्यूज बटोरने का काम कर रहे थे। सरकार की इस पहल को बिहार की सांस्कृतिक अस्मिता को बचाने के एक बड़े अभियान के रूप में देखा जा रहा है।
फूहड़ता पर सीधा प्रहार: “समाज को दूषित करने वाले होंगे ठीक”
कला और संस्कृति विभाग की जिम्मेदारी संभालने के बाद प्रमोद चंद्रवंशी ने अपनी प्राथमिकताओं की सूची में अश्लीलता के खात्मे को सबसे ऊपर रखा है। पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी मंशा साफ कर दी। उन्होंने कहा कि अश्लील गानों के माध्यम से समाज का माहौल खराब करने वालों को सबसे पहले सरकार ‘ठीक’ करने का काम करेगी। विभाग अब ऐसी नियमावली तैयार कर रहा है जिसके तहत आपत्तिजनक सामग्री बनाने और उसे प्रसारित करने वालों पर सीधा कानूनी एक्शन लिया जा सके। प्रमोद चंद्रवंशी ने कड़े शब्दों में कहा कि कला का उद्देश्य समाज का निर्माण करना है, न कि उसे गंदा करना। अगर कोई कलाकार अपनी गायकी के जरिए सामाजिक मर्यादाओं को लांघता है, तो विभाग मूकदर्शक बनकर नहीं बैठा रहेगा। आने वाले समय में ऐसे गानों की निगरानी के लिए एक विशेष सेल का गठन भी किया जा सकता है जो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज होने वाले कंटेंट की बारीकी से जांच करेगा।
लोक संस्कृति के नाम पर ‘सौदागिरी’ बर्दाश्त नहीं
बिहार की लोक परंपराएं विश्व स्तर पर अपनी सादगी और गहराई के लिए जानी जाती हैं। सोहर, चैता, कजरी और झूमर जैसे लोकगीत हमारे जीवन के अभिन्न अंग रहे हैं। लेकिन आधुनिकता की आड़ में कुछ लोगों ने इन विधाओं को ‘बाजारूपन’ का शिकार बना दिया है। प्रमोद चंद्रवंशी ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि कला समाज को जोड़ने का माध्यम है, उसे बिगाड़ने का नहीं। उन्होंने रेखांकित किया कि बिहार की सांस्कृतिक विरासत बहुत समृद्ध है और इसे किसी अश्लीलता की बैसाखी की जरूरत नहीं है। कला संस्कृति वह तत्व है जो व्यक्ति के अंतर्मन को निखारती है और उसके व्यक्तित्व का विकास करती है। जब संगीत में फूहड़ता का समावेश हो जाता है, तो वह मनोरंजन नहीं रह जाता, बल्कि एक सामाजिक बुराई बन जाता है। विभाग अब ऐसी व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है जिससे वास्तविक लोक कलाकारों को मंच मिले और अश्लीलता फैलाने वाले स्वघोषित ‘स्टार’ हाशिए पर चले जाएं।
युवा पीढ़ी और सामाजिक मूल्यों की सुरक्षा
बिहार में हाल के वर्षों में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जहाँ विवादित गानों के कारण सामाजिक तनाव और हिंसक झड़पें हुई हैं। जातिगत वैमनस्य या अश्लील तंज कसने वाले गाने ग्रामीण इलाकों में शांति भंग करने का बड़ा कारण बनते रहे हैं। प्रमोद चंद्रवंशी का मानना है कि संगीत का असर सीधा दिमाग पर होता है और यदि युवा पीढ़ी दिन-रात फूहड़ता सुनेगी, तो समाज का पतन निश्चित है। सरकार अब इस ‘सांस्कृतिक प्रदूषण’ को रोकने के लिए कमर कलय चुकी है। विभाग अब न केवल गायकों, बल्कि उन रिकॉर्डिंग स्टूडियो और म्यूजिक कंपनियों पर भी शिकंजा कसेगा जो व्यावसायिक लाभ के लिए मर्यादाओं को ताक पर रख देते हैं। मंत्री ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि विभाग जल्द ही गृह विभाग के साथ मिलकर एक ऐसी कार्ययोजना पेश करेगा, जिसमें अश्लील गानों के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई का प्रावधान होगा।
गौरवशाली पहचान की बहाली और नया विजन
प्रमोद चंद्रवंशी के विजन में बिहार का सांस्कृतिक उत्थान सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि विभाग अब राज्य की सकारात्मक पहचान को दुनिया के सामने रखने के लिए नए कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर रहा है। विभाग का प्रयास होगा कि उन प्रतिभावान कलाकारों को आगे लाया जाए जो शास्त्रीय संगीत और शुद्ध लोक विधाओं के संरक्षण में जुटे हैं। इसके लिए जिला स्तर पर ‘प्रतिभा खोज’ जैसे आयोजनों को गति दी जाएगी। मंत्री ने कहा कि बिहार हमेशा से ज्ञान और कला का केंद्र रहा है और इस छवि को कुछ फूहड़ गायकों के कारण बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। विभाग अब ऐसे सांस्कृतिक उत्सवों का आयोजन करेगा जो समाज में भाईचारा और सकारात्मकता का संचार करें। कला समाज को सही दिशा देने का काम करती है, और इसी मूल उद्देश्य को केंद्र में रखकर विभाग की नई नीतियों का निर्माण किया जा रहा है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और ‘सस्ती लोकप्रियता’ को चुनौती
यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने जहाँ एक ओर प्रतिभा को मंच दिया है, वहीं दूसरी ओर अश्लीलता का बाजार भी खड़ा कर दिया है। प्रमोद चंद्रवंशी ने चेतावनी दी है कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब अश्लीलता परोसना नहीं है। विभाग की नजर अब उन डिजिटल चैनलों पर भी है जो बिहार के नाम पर फूहड़ता बेच रहे हैं। आने वाले दिनों में केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के साथ समन्वय स्थापित कर ऐसे आपत्तिजनक कंटेंट को ब्लॉक कराने या उन पर अंकुश लगाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। मंत्री ने साफ कहा कि सस्ती लोकप्रियता के चक्कर में लोग बिहार की भाषा और संस्कृति का अपमान कर रहे हैं, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार अब अश्लीलता के खिलाफ एक व्यापक जन-आंदोलन खड़ा करने की तैयारी में है, जिसमें समाज के प्रबुद्ध वर्ग और अभिभावकों की भी बड़ी भूमिका होगी।
समाज से बहिष्कार की अपील
प्रमोद चंद्रवंशी ने केवल सरकारी कार्रवाई पर ही भरोसा नहीं जताया है, बल्कि उन्होंने समाज के हर वर्ग से अपील की है कि वे ऐसे अश्लील गानों का बहिष्कार करें। उन्होंने कहा कि जब तक श्रोता ऐसे गानों को नकार नहीं देंगे, तब तक इसे बनाने वाले अपनी हरकतों से बाज नहीं आएंगे। जनता को यह समझना होगा कि वे क्या सुन रहे हैं और उसका उनके बच्चों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। विभाग अब जागरूकता अभियान भी चलाएगा ताकि लोगों को साफ-सुथरे और सार्थक संगीत की ओर वापस लाया जा सके। मंत्री की यह सख्ती उन कलाकारों के लिए एक आखिरी चेतावनी है जो बिहार के नाम को कलंकित कर रहे हैं। अब देखना होगा कि विभाग की यह कड़ाई धरातल पर कितनी जल्दी उतरती है और बिहार की सड़कों और समारोहों में बजने वाले गानों की शुचिता कितनी बहाल होती है। कला और संस्कृति विभाग ने साफ़ कर दिया है कि बिहार की अस्मिता के साथ खिलवाड़ करने वालों का समय अब समाप्त हो चुका है।


