किसानों की समृद्धि और सिंचाई का नया रोडमैप: लघु जल संसाधन मंत्री संतोष कुमार सुमन ने संभाला कार्यभार; बोले—खेतों तक पानी पहुँचाना सर्वोच्च प्राथमिकता

पटना। बिहार के कृषि प्रधान अर्थतंत्र की धड़कन माने जाने वाले लघु जल संसाधन विभाग में शनिवार को एक नई ऊर्जा और विजन का संचार हुआ। राजधानी पटना के विकास भवन स्थित विभागीय मुख्यालय में शनिवार, 09 मई 2026 की दोपहर उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब नवनियुक्त मंत्री संतोष कुमार सुमन ने अपनी नई जिम्मेदारी को विधिवत रूप से स्वीकार किया। पदभार ग्रहण करने का यह अवसर केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता मात्र नहीं था, बल्कि यह बिहार के उन लाखों किसानों के लिए एक भरोसे का संदेश भी था जो हर फसल चक्र के साथ सिंचाई के संकट से जूझते हैं। संतोष कुमार सुमन ने अपनी कुर्सी संभालते ही स्पष्ट कर दिया कि उनके नेतृत्व में विभाग का मुख्य केंद्र ‘खेत’ और उसे सींचने वाला ‘किसान’ होगा। उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं की फेहरिस्त में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और जल संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन को सबसे ऊपर रखा है।

विकास भवन में स्वागत और नई शुरुआत

​शनिवार की सुबह विकास भवन के लघु जल संसाधन विभाग के कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति ने एक उत्सव जैसा माहौल बना दिया था। जैसे ही संतोष कुमार सुमन अपने निर्धारित कक्ष में पहुँचे, विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनकी अगवानी की। इस दौरान विभाग के सचिव बी. कार्तिकेय धनजी ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया और नई पारी के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं।

​स्वागत की इस कड़ी में अपर सचिव संगीता सिंह, अपर सचिव सुशांत कुमार और अभियंता प्रमुख सुनील कुमार सहित विभाग के अन्य वरीय पदाधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों के इस हुजूम ने यह संदेश दिया कि विभाग के भीतर नेतृत्व के प्रति एक सकारात्मक विश्वास है। पदभार ग्रहण करने की प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत संतोष कुमार सुमन ने अधिकारियों के साथ अनौपचारिक चर्चा की और विभाग की कार्यसंस्कृति को समझने का प्रयास किया। उनके आगमन से विभाग के तकनीकी और प्रशासनिक अमले में एक नई कार्यशैली की आहट महसूस की जा रही है।

अद्यतन प्रगति और भविष्य की रूपरेखा पर मंथन

​पदभार संभालने के तुरंत बाद संतोष कुमार सुमन ने ‘एक्शन मोड’ में आते हुए विभाग की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की। सचिव बी. कार्तिकेय धनजी ने मंत्री को विभाग द्वारा संचालित विभिन्न लघु सिंचाई योजनाओं की अद्यतन प्रगति से विस्तारपूर्वक अवगत कराया। बैठक के दौरान उन योजनाओं पर विशेष चर्चा हुई जो वर्तमान में निर्माणाधीन हैं या फिर किन्हीं तकनीकी कारणों से लंबित हैं।

​मंत्री को भविष्य की उन कार्य योजनाओं का भी खाका दिखाया गया, जो आने वाले समय में बिहार के कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकती हैं। सचिव ने प्रजेंटेशन के माध्यम से बताया कि राज्य के किन हिस्सों में भू-जल स्तर की क्या स्थिति है और उसे सुधारने के लिए कौन-कौन से लघु सिंचाई उपाय अपनाए जा रहे हैं। संतोष कुमार सुमन ने प्रत्येक बिंदु पर गहराई से सवाल पूछे और यह जानने की कोशिश की कि सरकारी फाइलों में दर्ज आंकड़े धरातल पर किसानों के जीवन में कितना बदलाव ला रहे हैं।

किसानों की आर्थिक उन्नति ही विभाग का पैमाना

​मीडिया से मुखातिब होते हुए संतोष कुमार सुमन ने अपने विजन को बेहद स्पष्ट और प्रभावी शब्दों में साझा किया। उन्होंने कहा कि सिंचाई सुविधाओं में विस्तार लाना केवल एक तकनीकी लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह किसानों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को बेहतर करने का एक मानवीय मिशन है। उनका मानना है कि जब तक किसान के खेत तक पानी की अंतिम बूंद नहीं पहुँचती, तब तक विभाग के लक्ष्यों को सफल नहीं माना जा सकता।

​संतोष कुमार सुमन ने रेखांकित किया कि जल संसाधनों का समुचित प्रबंधन ही वह कुंजी है जिससे ग्रामीण बिहार के चेहरे पर मुस्कान लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि लघु जल संसाधन विभाग की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सूक्ष्म स्तर पर जल स्रोतों (तालाब, आहर-पइन, नलकूप) का प्रबंधन करता है, जो सीधे तौर पर छोटे और सीमांत किसानों को लाभ पहुँचाते हैं। सिंचाई का विस्तार होने से न केवल कृषि उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि यह किसानों की क्रय शक्ति में वृद्धि कर राज्य के समग्र विकास में योगदान देगा।

नियमित समीक्षा और नए नवाचारों का संकल्प

​विभाग के कामकाज में पारदर्शिता और गति लाने के लिए संतोष कुमार सुमन ने एक नई कार्ययोजना की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वे केवल कार्यालय में बैठकर आदेश जारी करने में विश्वास नहीं रखते, बल्कि नियमित रूप से विभागीय अधिकारियों के साथ ‘मंथन’ और ‘समीक्षा बैठकें’ आयोजित करेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को पहचानना और उन्हें तत्काल दूर करना होगा।

​मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि बदलते मौसम के मिजाज और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए पुरानी पड़ चुकी तकनीकों के स्थान पर नई और आधुनिक सिंचाई योजनाओं को प्रारंभ किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे सीधे किसानों के बीच जाकर उनकी आवश्यकताओं का आकलन करें, ताकि योजनाएं कागजों पर नहीं बल्कि किसानों की वास्तविक जरूरतों के आधार पर बनाई जा सकें। उनका स्पष्ट मत है कि यदि कृषि उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित करनी है, तो विभाग को अपनी पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकलकर नवाचारों को अपनाना होगा।

जल संचयन और ग्रामीण सुदृढ़ीकरण की चुनौती

​लघु जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी ऐसे समय में और भी बढ़ जाती है जब बिहार के कई जिलों में जल स्तर चिंताजनक रूप से गिर रहा है। संतोष कुमार सुमन ने जल संचयन (Water Harvesting) को अपनी कार्ययोजना का अहम हिस्सा बताया है। उन्होंने कहा कि सिंचाई के साथ-साथ जल स्तर में वृद्धि करना भी उनकी प्राथमिकता है। इसके लिए राज्य के पुराने जल निकायों के पुनरुद्धार और नए जल संचयन ढांचों के निर्माण पर बल दिया जाएगा।

​ग्रामीण बिहार की सुदृढ़ता के लिए उन्होंने एक ‘बहु-आयामी दृष्टिकोण’ अपनाने की बात कही है। सिंचाई सुविधाओं के बेहतर होने से किसान साल में दो से अधिक फसलें ले सकेंगे, जिससे उनकी सालाना आय में सीधा इजाफा होगा। संतोष कुमार सुमन की यह सोच बिहार के ‘कृषि रोडमैप’ के लक्ष्यों के साथ मेल खाती है। पदभार ग्रहण के दौरान उनके तेवर और उनकी बातों से यह स्पष्ट हो गया है कि वे आने वाले समय में विभाग के भीतर कड़े फैसले लेने और लंबित कार्यों को युद्ध स्तर पर पूरा कराने के मूड में हैं। विकास भवन से शुरू हुई यह नई पारी अब बिहार के खेतों तक पहुँचने के लिए तैयार है।

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