
बिहार सरकार के युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग की जिम्मेदारी संभालते ही मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने राज्य के युवाओं को रोजगार और कौशल विकास से जोड़ने को लेकर बड़ा विजन सामने रखा है। शुक्रवार को पटना स्थित नियोजन भवन में विधिवत पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने विभागीय अधिकारियों के साथ लंबी समीक्षा बैठक की और साफ कहा कि सरकार का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में एक करोड़ युवाओं को रोजगार से जोड़ना है।
पदभार ग्रहण समारोह के दौरान विभाग के सचिव डॉ. कौशल किशोर ने पुष्पगुच्छ देकर मंत्री का स्वागत किया। इस अवसर पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न इकाइयों के प्रतिनिधि और कर्मचारी मौजूद रहे।
कार्यभार संभालने के तुरंत बाद मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने विभाग के विभिन्न प्रभागों के अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक की। बैठक में निदेशालय, नियोजन एवं प्रशिक्षण, बिहार कौशल विकास मिशन, बिहार राज्य समुद्र पार नियोजन ब्यूरो और बिहार युवा आयोग के अधिकारियों ने विभागीय योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी दी।
बैठक के दौरान कौशल विकास, रोजगार सृजन, प्रशिक्षण योजनाओं और युवाओं को रोजगार से जोड़ने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। मंत्री ने विभाग की मौजूदा चुनौतियों और संभावनाओं को लेकर अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी।
अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि वर्तमान समय में बिहार के युवाओं के लिए रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा है। ऐसे में युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने “सात निश्चय पार्ट-3” के तहत वर्ष 2025 से 2030 के बीच एक करोड़ युवाओं को रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य तय किया है। यह केवल एक सरकारी घोषणा नहीं, बल्कि विभाग की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
मंत्री ने कहा कि यह विभाग अभी नया है और करीब पांच महीने पहले ही इसका गठन किया गया है। ऐसे में शुरुआती स्तर पर कुछ चुनौतियां स्वाभाविक हैं, लेकिन विभाग को इन चुनौतियों को अवसर में बदलना होगा।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि समस्याओं की सही पहचान और लगातार समीक्षा के जरिए ही बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। विभाग को केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जमीन पर प्रभावी परिणाम देने होंगे।
बैठक के दौरान मंत्री ने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों यानी आईटीआई में खाली पड़ी सीटों और प्रशिक्षण पदों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई संस्थानों में संसाधन और सीटें होने के बावजूद बड़ी संख्या में पद खाली रह जाते हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि युवाओं को प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए और रिक्त सीटों को भरने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।
मंत्री ने कहा कि बिहार के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, जरूरत केवल उन्हें सही प्रशिक्षण और अवसर देने की है।
बैठक में विभागीय इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता पर भी गंभीर चर्चा हुई। अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि कई बार निजी संस्थानों को पर्याप्त आधारभूत संरचना के बिना मान्यता दे दी जाती है, जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थानों की निगरानी सख्ती से की जाएगी और जहां कमियां होंगी वहां आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों की चुनौतियों को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि जिन संस्थानों में विशेष समस्याएं हैं, उन्हें चिन्हित कर प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि विभाग की योजनाओं को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और परिणाम आधारित बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को अधिक जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करना होगा।
अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि युवाओं को केवल डिग्री नहीं, बल्कि रोजगार योग्य कौशल उपलब्ध कराना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। विभाग इस दिशा में आधुनिक और उद्योग आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देगा।
उन्होंने कहा कि बिहार को विकसित भारत 2047 के विजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है और इसमें राज्य के युवाओं का योगदान सबसे अहम होगा।
मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार के युवा देश की विकास यात्रा में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं, अगर उन्हें सही दिशा और अवसर मिले।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में बड़ी युवा आबादी मौजूद है, लेकिन रोजगार और कौशल प्रशिक्षण की चुनौतियां लंबे समय से बनी हुई हैं। बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करते हैं।
ऐसे में सरकार द्वारा कौशल विकास और रोजगार पर विशेष फोकस को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राजनीतिक और आर्थिक जानकारों का कहना है कि अगर सरकार एक करोड़ युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लक्ष्य पर गंभीरता से काम करती है तो इसका बिहार की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे पर बड़ा असर पड़ सकता है।
बैठक में बिहार युवा आयोग के सचिव विकास कुमार, बिहार कौशल विकास मिशन के अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी हेमंत कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
विभागीय सचिव डॉ. कौशल किशोर ने कहा कि मंत्री अरुण शंकर प्रसाद के नेतृत्व में विभाग नई ऊर्जा और सकारात्मक दिशा में काम करेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारी पूरी प्रतिबद्धता के साथ योजनाओं को सफल बनाने में जुटेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार में रोजगार और कौशल विकास की चुनौतियां काफी बड़ी हैं। ऐसे में केवल सरकारी नौकरियों पर निर्भर रहने के बजाय कौशल आधारित रोजगार, उद्यमिता और निजी क्षेत्र में अवसर बढ़ाने पर भी ध्यान देना होगा।
फिलहाल मंत्री अरुण शंकर प्रसाद के पदभार संभालने के बाद विभाग में नई रणनीतियों और तेज कार्यशैली को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। खासकर एक करोड़ युवाओं को रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
अब यह देखना अहम होगा कि आने वाले समय में विभाग किस तरह योजनाओं को जमीन पर उतारता है और क्या बिहार के युवाओं को वास्तव में बड़े पैमाने पर रोजगार और कौशल विकास के अवसर मिल पाते हैं या नहीं।


