बिहार में बड़े प्रशासनिक सुधारों की तैयारी तेज, 15 दिनों में निपटेंगे डीरेगुलेशन फेज-2 के लंबित मामले

बिहार में निवेश बढ़ाने, व्यापारिक प्रक्रियाओं को आसान बनाने और पुराने कानूनों को खत्म करने की दिशा में सरकार ने अब तेजी दिखानी शुरू कर दी है। शुक्रवार को पटना स्थित मुख्य सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिवालय के विशेष सचिव के.के. पाठक ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि डीरेगुलेशन फेज-2 के तहत लंबित सभी मामलों को अगले 15 दिनों के भीतर पूरा कर पोर्टल पर अपलोड किया जाए। उन्होंने साफ कहा कि इस काम में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक की संयुक्त अध्यक्षता बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने की। इसमें वित्त, उद्योग, नगर विकास, भवन निर्माण और अन्य विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में राज्य में व्यापार सुगमता यानी “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” को बेहतर बनाने, निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल करने और पुराने व जटिल नियमों को खत्म करने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

विशेष सचिव के.के. पाठक ने अधिकारियों से कहा कि राज्य के सभी विभाग अपने-अपने क्षेत्र में अनावश्यक “कम्प्लायंस बर्डन” यानी अनुपालन बोझ को कम करने की दिशा में तेजी से काम करें।

उन्होंने कहा कि कई पुराने नियम, रजिस्टर और प्रक्रियाएं अब विकास और निवेश की राह में बाधा बन चुकी हैं। इसलिए विभाग ऐसे सभी नियमों और प्रक्रियाओं की सूची तैयार करें जिन्हें समाप्त किया जा सकता है।

बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि अगर कोई सुधार एक से अधिक विभागों से जुड़ा है तो कैबिनेट सचिवालय विभाग समन्वय की भूमिका निभाए ताकि फाइलें लंबे समय तक लंबित न रहें।

विशेष सचिव ने कहा कि सभी विभागीय नोडल अधिकारी हर शुक्रवार को प्रगति रिपोर्ट कैबिनेट सचिवालय को भेजेंगे, जिसकी समीक्षा उच्च स्तर पर की जाएगी।

बैठक के दौरान व्यावसायिक कानूनों में बदलाव को लेकर भी बड़ा संकेत दिया गया। के.के. पाठक ने कहा कि छोटी तकनीकी चूकों के लिए कारावास जैसे कठोर प्रावधानों को हटाकर उन्हें आर्थिक दंड यानी पेनालिटी में बदला जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम व्यापार और उद्योग जगत के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है। कई बार छोटी प्रक्रियागत गलतियों के कारण कारोबारियों को कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

बैठक में बुनियादी ढांचे और शहरी विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई। सतत विकास के लिए राष्ट्रीय भवन संहिता (NBCS) 2026 के नए मानकों को बिहार के बिल्डिंग बायलॉज में शामिल करने पर विस्तार से विचार किया गया।

अधिकारियों का कहना है कि इससे राज्य में आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल निर्माण व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

इसके अलावा शहरी नियोजन को अधिक व्यवस्थित और आधुनिक बनाने के लिए फ्लोर एरिया रेशियो यानी FAR के नियमों को तर्कसंगत बनाने पर भी चर्चा हुई।

विशेष सचिव ने सरकारी संपत्तियों के बेहतर उपयोग और प्रबंधन के लिए “टोटल फैसिलिटी मैनेजमेंट” यानी TFM मॉडल अपनाने के निर्देश भी दिए।

बैठक में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी विभागों को “सिंगल विंडो सिस्टम” और “सेल्फ सर्टिफिकेशन” व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि इससे सरकारी प्रक्रियाओं में मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही निवेशकों और आम लोगों को भी तेज और आसान सेवाएं मिल सकेंगी।

मुख्य सचिव ने कहा कि सभी विभाग “मिशन मोड” में काम करें ताकि सुधार केवल कागजों तक सीमित न रहें बल्कि उनका असर जमीन पर भी दिखाई दे।

विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार लंबे समय से निवेश और उद्योग के क्षेत्र में अन्य राज्यों की तुलना में पीछे माना जाता रहा है। इसकी एक बड़ी वजह जटिल प्रक्रियाएं, मंजूरी में देरी और पुरानी प्रशासनिक व्यवस्था रही है।

ऐसे में सरकार की यह नई पहल बिहार को अधिक निवेश अनुकूल राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

राजनीतिक और आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर डीरेगुलेशन सुधार सही तरीके से लागू होते हैं तो इससे उद्योगों, व्यापारियों और निवेशकों को बड़ी राहत मिल सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार “सिंगल विंडो सिस्टम” और “सेल्फ सर्टिफिकेशन” जैसी व्यवस्थाएं व्यापार शुरू करने और उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया को काफी आसान बना सकती हैं।

बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया गया कि सुधारों में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी लंबित मामलों को तय समय सीमा के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा।

के.के. पाठक ने बिहार द्वारा अब तक किए गए सुधारों पर संतोष जताया और कहा कि राज्य तेजी से राष्ट्रीय मानकों की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार इस दिशा में बिहार को हर संभव सहयोग देगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकार गैरजरूरी नियमों और जटिल प्रक्रियाओं को कम करने में सफल होती है तो इससे बिहार में निवेश का माहौल बेहतर हो सकता है।

व्यापार जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि छोटी तकनीकी चूकों पर जेल के बजाय आर्थिक दंड का प्रावधान कारोबारियों के लिए सकारात्मक बदलाव साबित होगा।

फिलहाल बिहार सरकार प्रशासनिक सुधारों और निवेश आधारित विकास मॉडल पर तेजी से काम करती नजर आ रही है। आने वाले समय में इन सुधारों का कितना असर जमीन पर दिखता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अगले 15 दिनों के भीतर विभाग डीरेगुलेशन फेज-2 के लंबित मामलों को किस गति से पूरा करते हैं और क्या इन सुधारों से बिहार में निवेश और उद्योगों के लिए वास्तव में बेहतर माहौल तैयार हो पाता है या नहीं।

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