बिहार में बुजुर्गों को घर बैठे मिलेगा राशन? पदभार संभालते ही मंत्री अशोक चौधरी का बड़ा ऐलान

बिहार सरकार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की जिम्मेदारी संभालते ही मंत्री अशोक चौधरी ने बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में 80 वर्ष से अधिक उम्र के राशन कार्डधारकों को उनके घर तक राशन पहुंचाने की व्यवस्था लागू करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। मंत्री के इस बयान को राज्य के बुजुर्ग और जरूरतमंद लोगों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

शुक्रवार सुबह पटना स्थित विभागीय कार्यालय पहुंचकर अशोक चौधरी ने आधिकारिक रूप से पदभार ग्रहण किया। इस दौरान विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया और विभागीय योजनाओं तथा कार्यों की जानकारी दी।

पदभार ग्रहण समारोह के दौरान विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह, विशेष सचिव विभूति रंजन चौधरी, बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम के प्रबंध निदेशक सुनील कुमार, संयुक्त सचिव रवीन्द्र कुमार और विशेष कार्य पदाधिकारी सृष्टि प्रिया सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

पदभार संभालने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग बिहार के करोड़ों लोगों के जीवन से सीधे जुड़ा हुआ विभाग है। उन्होंने कहा कि राज्य में आठ करोड़ से अधिक लोग राशन कार्ड योजना का लाभ ले रहे हैं, इसलिए विभाग की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।

उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश होगी कि कोई भी योग्य और जरूरतमंद परिवार राशन कार्ड योजना के लाभ से वंचित न रहे। साथ ही बुजुर्गों और कमजोर वर्ग के लोगों को राहत देने के लिए नई व्यवस्थाओं पर भी काम किया जाएगा।

मंत्री ने विशेष रूप से 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग राशन कार्डधारकों का जिक्र करते हुए कहा कि कई बुजुर्गों को राशन दुकान तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे लोगों को राहत देने के लिए घर तक राशन पहुंचाने की व्यवस्था लागू करने की दिशा में विभाग गंभीरता से विचार करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह योजना लागू होती है तो राज्य के लाखों बुजुर्ग लाभार्थियों को बड़ी राहत मिल सकती है। खासकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले बुजुर्गों को राशन लेने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे उन्हें परेशानी होती है।

अशोक चौधरी ने कहा कि खाद्य सुरक्षा केवल राशन वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गरीब और जरूरतमंद परिवारों की बुनियादी सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। इसलिए विभाग की प्राथमिकता होगी कि राशन वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाया जाए।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राशन वितरण से जुड़ी शिकायतों और समस्याओं पर विशेष ध्यान दिया जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि जरूरतमंद लोगों को समय पर अनाज उपलब्ध हो।

मंत्री ने विभागीय अधिकारियों से विभिन्न योजनाओं और कार्यप्रणाली की जानकारी भी ली। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाया जाए ताकि लाभार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

राज्य में राशन कार्ड योजना के तहत करोड़ों परिवारों को हर महीने अनाज उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार जैसे बड़े राज्य में राशन वितरण प्रणाली को सुचारू रूप से चलाना एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती होती है। कई बार लाभार्थियों को राशन वितरण में देरी, नाम कटने या तकनीकी समस्याओं जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

मंत्री अशोक चौधरी के बयान के बाद अब लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं कि विभाग में कुछ नई और जनहितकारी पहल देखने को मिल सकती हैं।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार नई सरकार में विभागीय जिम्मेदारियां संभालने वाले मंत्री अब जनता से सीधे जुड़े मुद्दों पर तेजी से फैसले लेने का संकेत दे रहे हैं। बुजुर्गों को घर तक राशन पहुंचाने की योजना भी इसी दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो बिहार उन राज्यों में शामिल हो सकता है जहां वृद्ध और असहाय लाभार्थियों के लिए विशेष राशन वितरण सुविधा उपलब्ध होगी।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि कई बुजुर्ग ऐसे हैं जिनके परिवार के सदस्य बाहर रहते हैं या वे खुद चलने-फिरने में सक्षम नहीं होते। ऐसे में घर तक राशन पहुंचाने की सुविधा उनके लिए बेहद उपयोगी साबित होगी।

हालांकि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस तरह की योजना लागू करने के लिए मजबूत निगरानी तंत्र और अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत होगी। क्योंकि राज्य में लाभार्थियों की संख्या बहुत अधिक है।

मंत्री ने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसलिए खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, वितरण प्रणाली और शिकायत निवारण व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी काम किया जाएगा।

उन्होंने संकेत दिया कि विभाग आने वाले समय में कई नई योजनाओं और सुधारात्मक कदमों पर काम कर सकता है। साथ ही राशन वितरण व्यवस्था में तकनीक के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

इस दौरान विभागीय अधिकारियों ने मंत्री को विभिन्न योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट और मौजूदा चुनौतियों की जानकारी दी। मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

विशेषज्ञों के अनुसार सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार और डिजिटल निगरानी बढ़ने से लाभार्थियों को काफी राहत मिल सकती है। इससे फर्जीवाड़ा और गड़बड़ी पर भी नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।

फिलहाल मंत्री अशोक चौधरी के पदभार संभालने के बाद विभाग में नई रणनीतियों और योजनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। खासकर बुजुर्ग राशन कार्डधारकों को घर तक राशन पहुंचाने का प्रस्ताव लोगों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग इस दिशा में किस तरह की योजना तैयार करता है और कब तक इसे जमीन पर उतारने की प्रक्रिया शुरू होती है। लेकिन इतना तय है कि मंत्री के इस बयान ने राज्य के लाखों बुजुर्ग लाभार्थियों के बीच उम्मीद जरूर जगा दी है।

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