कटिहार रेलवे स्टेशन पर ‘जहरीले’ खीरे का खेल उजागर, वायरल वीडियो के बाद रेलवे प्रशासन में मचा हड़कंप

बिहार के कटिहार रेलवे स्टेशन से सामने आए एक वायरल वीडियो ने रेलवे स्टेशन पर बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे वीडियो में कथित तौर पर कुछ महिला वेंडर खीरे को कृत्रिम तरीके से हरा और ताजा दिखाने के लिए रंगीन घोल में डुबोती नजर आ रही हैं। इस घटना के सामने आने के बाद यात्रियों के बीच डर और नाराजगी का माहौल है, जबकि रेलवे सुरक्षा बल यानी आरपीएफ ने मामले में तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है।

कटिहार रेलवे स्टेशन बिहार के प्रमुख रेलवे जंक्शनों में गिना जाता है, जहां हर दिन हजारों यात्री आते-जाते हैं। लंबी दूरी की यात्रा के दौरान लोग प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले खीरे, सलाद और फलों को हल्का और स्वास्थ्यवर्धक भोजन मानकर खरीदते हैं। खासकर गर्मी के मौसम में खीरे की मांग ज्यादा बढ़ जाती है। लेकिन अब वायरल वीडियो ने इस भरोसे को बड़ा झटका दिया है।

वायरल वीडियो में दो महिलाएं खीरे को गहरे हरे रंग के एक घोल में डुबोती दिखाई दे रही हैं। दावा किया जा रहा है कि पीले और बासी दिख रहे खीरों को इस केमिकल मिश्रण में डालने के बाद उन्हें कृत्रिम रूप से ताजा और चमकदार बनाया जा रहा था। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे यात्रियों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ बताया।

वीडियो वायरल होते ही कटिहार आरपीएफ हरकत में आ गई। रेलवे सुरक्षा बल ने स्टेशन परिसर और ट्रेनों में अवैध तरीके से सामान बेचने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान नौ महिला वेंडरों को हिरासत में लिया गया। पुलिस अब उनसे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे मामले के पीछे कौन लोग शामिल हैं और यह रंग कहां से लाया जा रहा था।

आरपीएफ अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन परिसर में अवैध तरीके से खाद्य सामग्री बेचने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन वायरल वीडियो के बाद जांच और सख्त कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार यह केवल एक छोटे स्तर का मामला नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क भी हो सकता है।

कटिहार आरपीएफ इंस्पेक्टर विक्रम जी ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि वायरल वीडियो को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने बताया कि वीडियो सामने आने के तुरंत बाद छापेमारी की गई और संदिग्ध महिला वेंडरों को पकड़ा गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि रेलवे परिसर में यात्रियों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार सब्जियों और फलों को कृत्रिम रूप से चमकदार और हरा दिखाने के लिए कई बार खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें मैलाकाइट ग्रीन जैसे केमिकल शामिल हो सकते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक माने जाते हैं। ऐसे रसायनों का सेवन लंबे समय तक किया जाए तो यह शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह के केमिकल युक्त खाद्य पदार्थ खाने से पेट दर्द, उल्टी, फूड पॉइजनिंग, लीवर और किडनी संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में लंबे समय तक सेवन करने पर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों को यात्रा के दौरान खुले में बिकने वाले कटे हुए फल और रंगीन दिखने वाले खाद्य पदार्थ खरीदने से बचना चाहिए। खासकर अत्यधिक चमकदार और असामान्य रूप से हरे दिखने वाले खीरे या सब्जियां संदेह पैदा करती हैं।

घटना के बाद कई यात्रियों ने रेलवे स्टेशन पर बिकने वाले खाने-पीने के सामान की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। लोगों का कहना है कि रेलवे स्टेशन पर बिकने वाले खाद्य पदार्थों की नियमित जांच होनी चाहिए। यात्रियों का आरोप है कि प्लेटफॉर्म पर कई वेंडर बिना लाइसेंस के खुलेआम खाद्य सामग्री बेचते हैं और उन पर निगरानी बेहद कमजोर है।

कुछ यात्रियों ने बताया कि वे सफर के दौरान स्टेशन पर मिलने वाले खीरे और सलाद को इसलिए खरीदते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि रेलवे परिसर में बिकने वाला सामान सुरक्षित होगा। लेकिन इस घटना ने उनका भरोसा तोड़ दिया है।

सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से चर्चा में बना हुआ है। कई लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और रेलवे स्टेशनों पर खाद्य सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू किया जाए। कुछ लोगों ने यह भी मांग की कि स्टेशन परिसर में खाद्य पदार्थ बेचने वाले सभी वेंडरों की जांच और सत्यापन अनिवार्य किया जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों पर खाद्य सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण विषय है क्योंकि यहां हर दिन हजारों लोग खाना और पेय पदार्थ खरीदते हैं। अगर गुणवत्ता की निगरानी मजबूत नहीं होगी तो यह बड़े स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकता है।

आरपीएफ अब इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं स्टेशन पर बिकने वाले अन्य खाद्य पदार्थों में भी इसी तरह की मिलावट तो नहीं की जा रही। इसके लिए रेलवे प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग के बीच समन्वय बढ़ाने की बात भी सामने आ रही है।

रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत वेंडरों से ही खाद्य सामग्री खरीदें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत रेलवे अधिकारियों को दें। यात्रियों को यह भी सलाह दी गई है कि बहुत अधिक चमकदार या अप्राकृतिक रंग वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाकर रखें।

कटिहार रेलवे स्टेशन से सामने आया यह मामला केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्थानों पर खाद्य सुरक्षा की बड़ी चुनौती को सामने लाता है। कुछ रुपयों के लालच में अगर लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जाएगा तो यह गंभीर सामाजिक और कानूनी मुद्दा बन सकता है।

फिलहाल रेलवे प्रशासन और आरपीएफ पूरे मामले की जांच में जुटे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में क्या खुलासे होते हैं और दोषियों के खिलाफ कितनी सख्त कार्रवाई की जाती है। वहीं यात्रियों के लिए यह घटना एक चेतावनी बन गई है कि सफर के दौरान खाने-पीने की चीजों का चुनाव बेहद सावधानी से करना जरूरी है।

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