​सहरसा-सुपौल मार्ग पर काल बनी तेज रफ्तार: एसडीएम के गार्ड कमलेश कुमार ने तोड़ा दम, तीन अन्य घायलों का संघर्ष जारी

सहरसा। बिहार की सड़कों पर बेलगाम रफ्तार एक बार फिर मासूम जिंदगियों के लिए काल साबित हुई है। सहरसा-सुपौल मुख्य मार्ग पर हुए एक भीषण सड़क हादसे ने प्रशासनिक महकमे सहित आम जनमानस को झकझोर कर रख दिया है। सत्तर कटैया प्रखंड के तुलसियाही गांव के समीप दो बाइकों के बीच हुई आमने-सामने की जोरदार भिड़ंत में सुपौल अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) के अंगरक्षक कमलेश कुमार की इलाज के दौरान मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना में एक महिला सहित तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका उपचार स्थानीय अस्पतालों में चल रहा है। यह हादसा न केवल दो परिवारों के लिए दुखों का पहाड़ लेकर आया है, बल्कि सहरसा और सुपौल को जोड़ने वाले इस व्यस्त मार्ग पर सुरक्षा मानकों और यातायात नियमों की अनदेखी को भी उजागर करता है। समस्तीपुर के रहने वाले कमलेश कुमार की मौत की खबर मिलते ही सुपौल प्रशासन और उनके पैतृक गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।

तुलसियाही के समीप खूनी भिड़ंत: चीख-पुकार से दहला इलाका

​हादसे की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दोनों बाइकों के परखच्चे उड़ गए और टक्कर की आवाज सुनकर आसपास के खेतों में काम कर रहे ग्रामीण सहम गए। जानकारी के अनुसार, सहरसा-सुपौल मुख्य मार्ग पर तुलसियाही गांव के पास दो तेज रफ्तार मोटर साइकिलें विपरीत दिशा से आ रही थीं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोनों चालकों ने एक-दूसरे को बचाने की कोशिश की, लेकिन रफ्तार इतनी अधिक थी कि संतुलन खो गया और दोनों के बीच आमने-सामने की सीधी टक्कर हो गई।

​टक्कर के बाद सड़क पर खून और मलबे का ढेर लग गया। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि भिड़ंत के बाद चारों लोग सड़क पर गिरकर तड़पने लगे। घायलों में एक महिला भी शामिल थी, जिसकी स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई थी। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत इसकी सूचना बिहरा थाना और डायल 112 की टीम को दी। हादसे के बाद सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और लोग बचाव कार्य में जुट गए।

एसडीएम के गार्ड की गई जान: समस्तीपुर में पसरा मातम

​इस दुर्घटना का सबसे दुखद पहलू सुपौल एसडीएम के गार्ड कमलेश कुमार का निधन रहा। कमलेश कुमार मूल रूप से समस्तीपुर जिले के रहने वाले थे और वर्तमान में सुपौल एसडीएम के अंगरक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। बताया जा रहा है कि वे किसी आधिकारिक या व्यक्तिगत कार्य से इस मार्ग से गुजर रहे थे, तभी तुलसियाही के पास वे इस जानलेवा हादसे का शिकार हो गए।

​हादसे के तुरंत बाद कमलेश कुमार को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। एक अनुशासित और कर्तव्यनिष्ठ पुलिसकर्मी के रूप में पहचाने जाने वाले कमलेश कुमार की असमय मौत ने पुलिस बल के मनोबल पर भी असर डाला है। जैसे ही उनकी मौत की आधिकारिक पुष्टि हुई, सुपौल अनुमंडल कार्यालय में सन्नाटा पसर गया। उनके परिजनों को सूचना दे दी गई है, जिसके बाद समस्तीपुर स्थित उनके घर में कोहराम मचा हुआ है।

रेस्क्यू ऑपरेशन और मेडिकल रिस्पॉन्स: डायल 112 की सक्रियता

​सड़क दुर्घटनाओं में ‘गोल्डन आवर’ (हादसे के तुरंत बाद का समय) बहुत महत्वपूर्ण होता है और इस मामले में बिहरा थाना की डायल 112 टीम ने त्वरित कार्रवाई का परिचय दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम ने बिना देरी किए तुलसियाही गांव के समीप घटनास्थल पर दस्तक दी। पुलिस ने स्थानीय लोगों के सहयोग से चारों घायलों को सड़क से उठाकर एंबुलेंस के जरिए नजदीकी अस्पताल पहुँचाया।

​अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टरों की टीम ने घायलों का प्राथमिक उपचार शुरू किया। हालांकि, घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए और शरीर के अंदरूनी हिस्सों में लगी चोटों के कारण, उन्हें बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया गया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों के अनुसार, घायलों में से एक की स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि दुर्घटना के समय बाइक की रफ्तार कितनी थी और क्या किसी तकनीकी खराबी के कारण यह हादसा हुआ।

सहरसा-सुपौल मार्ग पर बढ़ते खतरे: सत्तर कटैया क्षेत्र में सुरक्षा की चुनौती

​सहरसा-सुपौल मुख्य मार्ग इन दिनों अपनी जर्जर स्थिति और अनियंत्रित यातायात के कारण दुर्घटनाओं का केंद्र बनता जा रहा है। विशेष रूप से सत्तर कटैया प्रखंड के अंतर्गत आने वाले तुलसियाही जैसे ग्रामीण इलाकों में, जहाँ मुख्य सड़क आबादी के बीच से गुजरती है, वहां पैदल यात्रियों और दोपहिया वाहनों के लिए जोखिम काफी बढ़ गया है।

  • तेज रफ्तार: इस मार्ग पर चलने वाले भारी वाहन और युवा बाइकर्स अक्सर निर्धारित गति सीमा का उल्लंघन करते हैं, जिससे आमने-सामने की टक्कर की संभावना बढ़ जाती है।
  • घुमावदार मोड़: तुलसियाही गांव के समीप कुछ अंधे मोड़ हैं जहाँ दृश्यता (Visibility) कम होने के कारण चालक सामने से आने वाले वाहनों का अंदाजा नहीं लगा पाते।
  • हेलमेट की अनदेखी: पुलिस की प्रारंभिक रिपोर्टों में अक्सर यह बात सामने आती है कि सिर पर लगी चोटें ही मौतों का मुख्य कारण बनती हैं। इस हादसे में भी हेलमेट की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया और आगामी कदम

​कमलेश कुमार की मौत के बाद बिहरा थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त दोनों बाइकों को जब्त कर लिया है और मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है। सुपौल जिला प्रशासन ने भी अपने कर्मी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है और नियमानुसार सहायता राशि और अन्य लाभों की प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया है।

​स्थानीय निवासियों ने इस हादसे के बाद मांग की है कि तुलसियाही जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में सड़क पर ‘स्पीड ब्रेकर’ या ‘रंबल स्ट्रिप्स’ लगाए जाएं। साथ ही, व्यस्त समय में पुलिस गश्ती बढ़ाने की भी मांग की गई है ताकि तेज रफ्तार वाहनों पर लगाम लगाई जा सके। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सड़क पर चलते समय सावधानी बरतें और विशेष रूप से मुख्य मार्गों पर गति सीमा का कड़ाई से पालन करें।

​यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि सड़क पर आपकी एक छोटी सी लापरवाही न केवल आपकी जान ले सकती है, बल्कि दूसरों के हंसते-खेलते परिवारों को भी उजाड़ सकती है। सुपौल एसडीएम के गार्ड कमलेश कुमार अब हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनकी मौत ने सुरक्षा व्यवस्था और यातायात अनुशासन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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