नासिक TCS कांड की मुख्य आरोपी निदा खान गिरफ्तार: छत्रपति संभाजी नगर में पुलिस ने दबोचा; धर्मांतरण और यौन शोषण के गंभीर आरोपों में थी फरार

छत्रपति संभाजी नगर/नासिक। महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के बीपीओ यूनिट में हुए कथित धर्मांतरण, यौन उत्पीड़न और ब्लैकमेलिंग के सनसनीखेज मामले में पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। इस पूरे षड्यंत्र की मुख्य सूत्रधार और मास्टरमाइंड मानी जाने वाली निदा एजाज खान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के अनुसार, निदा खान की गिरफ्तारी छत्रपति संभाजी नगर (पूर्व नाम औरंगाबाद) के एक थाना क्षेत्र से हुई है, जहाँ वह अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद से छिपी हुई थी। नासिक पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) पिछले कई दिनों से उसकी तलाश में महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में छापेमारी कर रही थी। निदा खान पर एक दलित युवती का जबरन धर्मांतरण कराने, उसे नशीला पदार्थ खिलाकर उसका यौन शोषण करने और उसे देश से बाहर भेजने की साजिश रचने जैसे कई संगीन आरोप हैं। इस गिरफ्तारी के बाद अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में कई और बड़े राज खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।

छत्रपति संभाजी नगर में ‘डिजिटल ट्रैप’: ऐसे पकड़ी गई निदा खान

​निदा खान की गिरफ्तारी की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। नासिक की सत्र अदालत द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद से ही निदा खान अपना मोबाइल फोन बंद कर भूमिगत हो गई थी। उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए अपनी दो महीने की गर्भावस्था का भी हवाला दिया था, लेकिन अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसे राहत नहीं दी थी। नासिक पुलिस की एसआईटी (SIT) को तकनीकी सर्विलांस और गुप्त सूचनाओं के आधार पर पता चला कि वह छत्रपति संभाजी नगर में अपने किसी करीबी के यहाँ शरण लिए हुए है।

​गुरुवार, 07 मई 2026 की शाम नासिक पुलिस की एक विशेष टीम ने छत्रपति संभाजी नगर पुलिस के समन्वय से स्थानीय थाना क्षेत्र में घेराबंदी की। पुलिस को सटीक इनपुट मिला था कि निदा वहां से अपना ठिकाना बदलने की फिराक में है। जैसे ही वह बाहर निकली, सादे लिबास में तैनात पुलिसकर्मियों ने उसे दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे स्थानीय थाने ले जाया गया, जहाँ आवश्यक कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी की गई। अब नासिक पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर लेकर नासिक लाएगी, जहाँ उसे विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।

क्या है पूरा मामला? टीसीएस बीपीओ के भीतर चलता था ‘सिंडिकेट’

​यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब नासिक स्थित टीसीएस बीपीओ में काम करने वाली एक 19 वर्षीय युवती ने पुलिस में अपनी आपबीती सुनाई। पीड़िता, जो अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से ताल्लुक रखती है, उसने आरोप लगाया कि ऑफिस में उसकी सहकर्मी निदा खान ने पहले उससे दोस्ती की और फिर धीरे-धीरे उसका ब्रेनवॉश करना शुरू किया।

  • नशीला पदार्थ और शोषण: एफआईआर के अनुसार, निदा खान ने पीड़िता को अपने घर बुलाया और वहां उसे ‘शीरा खुरमा’ और कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया। जब पीड़िता बेहोश हो गई, तो वहां मौजूद अन्य आरोपियों ने उसका यौन शोषण किया और उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें व वीडियो बना लिए।
  • ब्लैकमेलिंग और धर्मांतरण: इन वीडियो के आधार पर पीड़िता को ब्लैकमेल किया जाने लगा। निदा खान ने उसे इस्लाम स्वीकार करने के लिए मजबूर किया। पीड़िता को ऑफिस में ही हिजाब पहनने, नमाज पढ़ने और इस्लामिक ऐप्स का उपयोग करने के लिए प्रताड़ित किया जाता था।
  • नाम परिवर्तन और मलेशिया की साजिश: जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने पीड़िता का नाम बदलकर ‘हानिया’ रख दिया था। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह था कि निदा खान और उसके साथी पीड़िता को मलेशिया भेजने की योजना बना रहे थे, जिसके लिए पासपोर्ट और अन्य दस्तावेजों की प्रक्रिया भी गुपचुप तरीके से शुरू कर दी गई थी।

8 आरोपी पहले ही जा चुके हैं जेल: अब निदा से होगी ‘आमने-सामने’ पूछताछ

​नासिक पुलिस इस मामले में अब तक निदा खान के पति दानिश शेख और तौसीफ अत्तार सहित कुल 8 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि यह केवल एक व्यक्तिगत अपराध नहीं था, बल्कि एक संगठित सिंडिकेट की तरह काम कर रहा था जो भोली-भाली लड़कियों को निशाना बनाकर उनका धर्मांतरण कराता था। निदा खान इस पूरे नेटवर्क की ‘कंट्रोलर’ की भूमिका में थी।

​अब जबकि निदा खान पुलिस की गिरफ्त में है, एसआईटी (SIT) उसे अन्य आरोपियों के सामने बैठाकर पूछताछ करेगी। पुलिस यह जानना चाहती है कि इस सिंडिकेट को फंडिंग कहाँ से मिल रही थी और क्या इनके तार किसी अंतर्राष्ट्रीय धर्मांतरण रैकेट से जुड़े हैं। नासिक की अदालत ने पहले ही टिप्पणी की थी कि यह एक “बहुआयामी और बहुस्तरीय” साजिश है, जिसमें गहन जांच की आवश्यकता है।

कठोर धाराओं के तहत दर्ज है मामला: ‘एटॉसिटी एक्ट’ भी शामिल

​निदा खान और उसके साथियों के खिलाफ पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अत्यंत कठोर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इसमें जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून, यौन उत्पीड़न, नशीला पदार्थ खिलाना, ब्लैकमेलिंग और आपराधिक साजिश की धाराएं शामिल हैं। चूँकि पीड़िता दलित समुदाय से है, इसलिए इस मामले में SC/ST (Atrocities) Act की धाराएं भी लगाई गई हैं।

​पुलिस सूत्रों के अनुसार, निदा खान ने गिरफ्तारी के दौरान भी खुद को बेगुनाह बताने की कोशिश की और स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया, लेकिन पुलिस के पास मौजूद डिजिटल साक्ष्य, पीड़ित के बयान और अन्य गिरफ्तार आरोपियों की गवाहियां उसके खिलाफ पुख्ता सबूत पेश कर रही हैं। पुलिस ने उसके पास से कुछ डिजिटल उपकरण भी बरामद किए हैं, जिनका डेटा रिकवर किया जा रहा है।

कॉर्पोरेट जगत में हड़कंप: टीसीएस की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति

​इस मामले ने भारत के आईटी और बीपीओ सेक्टर में कार्यस्थल की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) जैसी प्रतिष्ठित कंपनी के भीतर इस तरह की गतिविधि होने से कॉर्पोरेट जगत स्तब्ध है। कंपनी ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी कर्मचारियों को सेवा से निष्कासित कर दिया है और जांच में पुलिस को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है। कंपनी ने एक आंतरिक जांच समिति भी गठित की है जो यह देख रही है कि कैसे ऑफिस परिसर के भीतर इस तरह का ‘ब्रेनवॉशिंग’ और ‘धार्मिक दबाव’ का खेल चल रहा था।

सामाजिक और राजनैतिक प्रतिक्रियाएं: न्याय की मांग

​निदा खान की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही नासिक और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में विभिन्न सामाजिक संगठनों ने संतोष व्यक्त किया है। हिंदूवादी संगठनों और दलित संगठनों ने इस मामले में ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ में सुनवाई की मांग की है ताकि दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी सजा मिल सके। राजनैतिक गलियारों में भी इस मुद्दे पर काफी गहमागहमी है। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ने ही इस तरह के धर्मांतरण रैकेट के खिलाफ सख्त कानून बनाने और उसे कड़ाई से लागू करने की वकालत की है।

​छत्रपति संभाजी नगर से नासिक तक का यह सफर निदा खान के लिए अब सलाखों के पीछे खत्म हो रहा है। कल जब उसे नासिक की अदालत में पेश किया जाएगा, तो पुलिस उसकी अधिकतम रिमांड की मांग करेगी। एसआईटी को उम्मीद है कि निदा खान से पूछताछ के बाद इस रैकेट में शामिल कुछ ‘सफेदपोश’ लोगों और बाहरी मददगारों के नाम भी सामने आ सकते हैं। फिलहाल, निदा खान की गिरफ्तारी को पुलिस की एक बड़ी रणनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।

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