
भागलपुर/नाथनगर। बिहार की सत्ता में आज हुए बड़े फेरबदल और 32 मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह के बाद राज्य का राजनैतिक तापमान चरम पर पहुँच गया है। एक तरफ जहाँ गांधी मैदान में एनडीए के नेता जीत का जश्न मना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इस नए मंत्रिमंडल को ‘परिवारवाद का नया गढ़’ करार दिया है। नाथनगर विधानसभा क्षेत्र से राजद के विधायक प्रत्याशी (2025) जेड हसन के कार्यालय से जारी एक तीखे प्रेस वक्तव्य में एनडीए सरकार की इस नई टीम पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जेड हसन ने आरोप लगाया है कि जिस परिवारवाद का विरोध कर भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दल सत्ता की सीढ़ियां चढ़े थे, आज उसी परिवारवाद के आगे उन्होंने घुटने टेक दिए हैं। राजद के अनुसार, 32 मंत्रियों की इस जंबो टीम में लगभग 12 चेहरे ऐसे हैं जिनका एकमात्र आधार उनकी राजनैतिक विरासत है। इस बयान के बाद भागलपुर और आसपास के इलाकों में राजनैतिक बहस छिड़ गई है कि क्या वाकई एनडीए ने अपनी पुरानी विचारधारा को दरकिनार कर केवल ‘पुत्र और करीबियों’ को सत्ता में तरजीह दी है।
सत्ता की मलाई और विरासत का खेल: जेड हसन का बड़ा प्रहार
जेड हसन ने अपने बयान में कहा कि बिहार मंत्रिमंडल के गठन का जो वास्तविक स्वरूप आज जनता के सामने आया है, वह चौंकाने वाला और चिंताजनक है। उनके अनुसार, मंत्रिमंडल की सूची में शामिल 12 मंत्रियों का सीधा संबंध किसी न किसी बड़े राजनैतिक परिवार से है। राजद नेता ने सवाल उठाया कि जो एनडीए गठबंधन दिन-रात लालू प्रसाद और उनके परिवार पर परिवारवाद का आरोप लगाता रहा, वह आज खुद उसी रास्ते पर क्यों चल पड़ा है? उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि आज एनडीए के उन नेताओं के गले का शोर थम गया है जो खुद को परिवारवाद का विरोधी बताते थे। आज उनके अपने घरों में जब सत्ता की लालसा बढ़ी, तो विचारधारा को खूंटी पर टांग दिया गया।
राजद कार्यालय से जारी विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि इस मंत्रिमंडल में कई चेहरे ऐसे हैं जिन्होंने आज तक एक छोटा चुनाव भी नहीं लड़ा। बिना जनता के बीच गए, बिना किसी संघर्ष के, केवल अपने नाम और परिवार के रसूख के दम पर वे सीधे बिहार सचिवालय की सबसे ऊँची कुर्सियों पर जा बैठे हैं। जेड हसन ने इसे लोकतंत्र की मर्यादाओं के खिलाफ बताया और कहा कि यह बिहार के उन लाखों निष्ठावान कार्यकर्ताओं का अपमान है जो वर्षों से झंडा ढो रहे हैं, लेकिन मलाई केवल ‘विरासत’ वालों को मिल रही है।
तेजस्वी यादव का संघर्ष बनाम एनडीए का ‘सिल्वर स्पून’ कल्चर
राजद नेता ने अपने बयान में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के राजनैतिक सफर की तुलना एनडीए के नवनियुक्त मंत्रियों से की। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव ने जब सक्रिय राजनीति में कदम रखा, तो वे सीधे किसी पद पर नहीं बैठे। उन्होंने एक साधारण कार्यकर्ता की तरह पूरे बिहार का भ्रमण किया, गाँव-गाँव जाकर जनता की नब्ज टटोली और उनके दुख-दर्द को समझा। उसके बाद ही जनता ने उन्हें अपने आशीर्वाद से विधायक बनाया और वे उपमुख्यमंत्री के पद तक पहुँचे। राजद का तर्क है कि तेजस्वी यादव का कद उनके काम और जनता के प्रति उनके संघर्ष से बना है, न कि केवल नाम से।
इसके विपरीत, एनडीए में आज जिस तरह से मंत्रियों का चयन हुआ है, उसमें संघर्ष की कमी साफ झलकती है। जेड हसन ने कहा कि यहाँ जनता के आशीर्वाद की जरूरत नहीं समझी गई, बल्कि केवल यह देखा गया कि किसका बेटा या किसका रिश्तेदार कौन है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई ऐसे मंत्री हैं जिन्हें विभाग भी ऐसे दिए गए हैं जो सीधे तौर पर राज्य की किस्मत तय करते हैं, लेकिन क्या उनके पास उन विभागों को संभालने का कोई जमीनी अनुभव है? यह बिहार के भविष्य के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है।
महिला आरक्षण का नाम और परिवारवाद का काम: 33 फीसदी का सच
जेड हसन ने एनडीए सरकार को महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य में एनडीए की सरकारें महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का ढिंढोरा पीटती रही हैं। लेकिन जब वास्तव में अधिकार देने की बात आई, तो मंत्रिमंडल में महिलाओं के स्थान पर 33 फीसदी ‘परिवारवाद’ वाले नेताओं को स्थान दे दिया गया। राजद का आरोप है कि इस मंत्रिमंडल में महिलाओं की संख्या नगण्य है और जो कुछ महिलाएं शामिल भी हैं, उनमें से भी कई किसी न किसी बड़े नेता की रिश्तेदार हैं।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि बिहार की माताएं और बहनें यह सब देख रही हैं। जिस महिला शक्ति के नाम पर वोट बटोरे गए, उन्हें कैबिनेट में वह स्थान नहीं मिला जिसकी वे हकदार थीं। जेड हसन ने कहा कि एनडीए का यह दोहरा चरित्र अब बिहार की जनता के सामने बेनकाब हो चुका है। एक तरफ वे आरक्षण की बात करते हैं और दूसरी तरफ सत्ता की बंदरबांट में केवल अपने चहेतों को आगे बढ़ाते हैं।
जनता की चिंता और राजद का लोकतांत्रिक संघर्ष
नाथनगर के पूर्व प्रत्याशी ने बिहार की जनता से अपील की है कि वे इस राजनैतिक बदलाव को गहराई से समझें। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि जनता ‘सच बोलने वाली पार्टी’ और ‘झूठ परोसने वाली पार्टी’ के बीच का अंतर स्पष्ट करे। बिहार का भविष्य केवल नारों से नहीं संवरेगा, बल्कि उसे उन लोगों की जरूरत है जो जनता के प्रति जवाबदेह हों। राजद नेता ने विश्वास व्यक्त किया कि बिहार की जनता मालिक है और वह इस अपमान का बदला लोकतांत्रिक तरीके से आने वाले समय में जरूर लेगी।
जेड हसन ने अंत में कहा कि राष्ट्रीय जनता दल को बिहार की 13 करोड़ जनता की चिंता है और हमेशा रहेगी। लालू प्रसाद की विचारधारा पर चलते हुए पार्टी हमेशा पिछड़ों, दलितों और शोषितों के हक की बात करती रहेगी। उन्होंने संकल्प लिया कि राजद इस ‘परिवारवादी एनडीए’ के खिलाफ अपना लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेगी। सचिवालय से लेकर सड़क तक जनता के मुद्दों को उठाया जाएगा। जेड हसन ने कहा कि नाथनगर और भागलपुर की जनता भी इस भेदभाव को देख रही है, जहाँ एक तरफ विकास के नाम पर केवल वादे किए जा रहे हैं और दूसरी तरफ सत्ता का विकेंद्रीकरण करने के बजाय उसे चंद परिवारों तक सीमित कर दिया गया है।
इस प्रेस विज्ञप्ति ने भागलपुर के स्थानीय राजनैतिक हलकों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। जेड हसन के इस कड़े रुख ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर चुका है।


