
पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफा नहीं देने पर अड़े रहने के बाद राज्यपाल आरएन रवि ने राज्य सरकार को बर्खास्त कर प्रशासन की कमान अपने हाथ में ले ली। इसी दिन राज्य विधानसभा का पांच साल का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा था।
इस्तीफा देने से ममता का इनकार
संवैधानिक परंपरा के अनुसार, विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने से पहले मुख्यमंत्री राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपते हैं। इसके बाद नई सरकार के गठन तक उन्हें कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में काम करने की अनुमति दी जाती है।
हालांकि, ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि उनकी पार्टी चुनाव नहीं हारी, बल्कि भाजपा ने चुनाव “लूटा” है। इसी कारण उन्होंने पद छोड़ने से साफ मना कर दिया।
राज्यपाल ने अपने हाथ में लिया शासन
ममता बनर्जी द्वारा इस्तीफा नहीं देने की स्थिति में राज्यपाल ने उन्हें कार्यवाहक मुख्यमंत्री नियुक्त नहीं किया। इसके बाद राज्यपाल आरएन रवि ने अंतरिम तौर पर प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथ में लेने का फैसला किया।
भाजपा 9 मई को बनाएगी सरकार
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 207 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि टीएमसी को 80 सीटों पर संतोष करना पड़ा। राज्य में बहुमत का आंकड़ा 148 सीटों का है।
भाजपा ने नई सरकार के शपथ ग्रहण के लिए 9 मई, रवींद्र जयंती का दिन चुना है। पार्टी का मानना है कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर नई सरकार की शुरुआत बंगाल के लिए शुभ संकेत होगी।
राज्यपाल के पास क्या थे विकल्प?
राज्यपाल के सामने दो प्रमुख विकल्प थे। पहला, परंपरा के अनुसार ममता बनर्जी को नई सरकार के शपथ ग्रहण तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनाए रखना। दूसरा, अस्थायी रूप से शासन की जिम्मेदारी खुद संभालना या कोई वैकल्पिक प्रशासनिक व्यवस्था लागू करना।
संविधान क्या कहता है?
संविधान के अनुच्छेद 164 के अनुसार मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद “राज्यपाल की इच्छा तक” पद पर बने रहते हैं। चुनाव में बहुमत खोने के बाद राज्यपाल सरकार को बर्खास्त कर बहुमत वाली पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं।
ममता बनर्जी का बयान
चुनाव परिणाम आने के बाद ममता बनर्जी ने भाजपा और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा,
“हम चुनाव नहीं हारे हैं। नैतिक रूप से हमारी जीत हुई है। मैं किसी दबाव में इस्तीफा नहीं दूंगी।”


