
मालदा। भारतीय रेलवे लगातार आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को अपनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। इसी कड़ी में पूर्व रेलवे के मालदा मंडल ने एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि हासिल की है। जमालपुर लोको शेड में ऑन-साइट ऑक्सी-हाइड्रोजन फ्यूल गैस जनरेटर प्रणाली की सफल स्थापना और कमीशनिंग कर दी गई है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह नई तकनीक न केवल औद्योगिक कार्यों को अधिक सुरक्षित बनाएगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन को कम करने और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
रेलवे की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, जमालपुर लोको शेड में स्थापित की गई इस नई प्रणाली का नाम AG-4000 ऑक्सी-हाइड्रोजन फ्यूल गैस जनरेटर है। इस परियोजना को मालदा मंडल के मंडल रेल प्रबंधक Manish Kumar Gupta के मार्गदर्शन और वरिष्ठ मंडल यांत्रिक अभियंता (डीजल) जमालपुर Krishna Kumar Das के नेतृत्व में पूरा किया गया है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह प्रणाली रेलवे कार्यशालाओं और लोको शेड में उपयोग होने वाली पारंपरिक गैस प्रणाली की तुलना में अधिक सुरक्षित और प्रभावी मानी जा रही है। अब तक भारी स्टील प्लेटों की कटिंग के लिए डिसॉल्व्ड एसीटिलीन गैस यानी DA गैस का इस्तेमाल किया जाता था, जिसके लिए बड़े सिलेंडरों को संग्रहित, परिवहन और सुरक्षित रूप से स्टोर करना पड़ता था। यह पूरी प्रक्रिया न केवल महंगी थी बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी चुनौतीपूर्ण मानी जाती थी।
नई ऑक्सी-हाइड्रोजन प्रणाली के शुरू होने के बाद अब 100 मिमी तक मोटाई वाली माइल्ड स्टील प्लेटों की ऑक्सी-कटिंग बिना DA गैस के की जा सकेगी। यह तकनीक RO और DM जल के इलेक्ट्रोलिसिस के जरिए हाइड्रोजन गैस तैयार करती है, जिसे औद्योगिक कटिंग कार्यों में इस्तेमाल किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रक्रिया पारंपरिक गैस प्रणाली की तुलना में अधिक स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऑक्सी-हाइड्रोजन गैस प्रणाली कई मायनों में आधुनिक औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप है। इसमें इस्तेमाल होने वाला हाइड्रोजन गैस उत्पादन ऑन-साइट यानी उसी स्थान पर होता है, जहां इसका उपयोग किया जाना है। इससे सिलेंडरों की ढुलाई और भंडारण की आवश्यकता लगभग समाप्त हो जाती है। इसके साथ ही यह प्रणाली फ्लैश बैक अरेस्टर जैसी आधुनिक सुरक्षा तकनीकों से भी लैस है, जिससे किसी भी प्रकार की दुर्घटना की संभावना कम हो जाती है।
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना के पीछे सबसे बड़ा उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षित औद्योगिक संचालन को बढ़ावा देना है। भारतीय रेलवे पिछले कुछ वर्षों से कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए लगातार कई पहल कर रहा है। इलेक्ट्रिक ट्रेनों के विस्तार, सौर ऊर्जा परियोजनाओं और ऊर्जा दक्ष उपकरणों के इस्तेमाल के बाद अब रेलवे औद्योगिक इकाइयों में भी हरित तकनीकों को अपनाने पर जोर दे रहा है।
जमालपुर लोको शेड में शुरू हुई यह पहल उसी दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। रेलवे के मुताबिक, नई तकनीक के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी। साथ ही परिचालन लागत भी घटेगी क्योंकि अब गैस सिलेंडरों की खरीद, रखरखाव और परिवहन पर होने वाला खर्च काफी कम हो जाएगा।
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस तरह की प्रणालियां रेलवे की अन्य कार्यशालाओं और लोको शेड में भी स्थापित की जा सकती हैं। यदि यह परियोजना पूरी तरह सफल रहती है, तो भारतीय रेलवे के औद्योगिक संचालन में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे न केवल सुरक्षा मानकों में सुधार होगा, बल्कि पर्यावरण के प्रति रेलवे की जिम्मेदारी भी मजबूत होगी।
रेलवे कर्मचारियों के अनुसार, पारंपरिक एसीटिलीन गैस सिलेंडरों के साथ काम करना कई बार जोखिम भरा होता था। सिलेंडरों में गैस के उच्च दबाव और ज्वलनशीलता के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती थी। लेकिन नई प्रणाली में गैस का उत्पादन नियंत्रित तरीके से और जरूरत के अनुसार किया जाता है, जिससे सुरक्षा स्तर काफी बेहतर हो जाता है।
मालदा मंडल ने इस परियोजना को रेलवे के आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा बताया है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में रेलवे केवल यात्री सुविधाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तकनीकी और औद्योगिक स्तर पर भी आधुनिक बदलावों को तेजी से अपनाएगा। रेलवे कार्यशालाओं में नई तकनीकों का उपयोग कर्मचारियों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण तैयार करने में भी मदद करेगा।
रेलवे सूत्रों के मुताबिक, जमालपुर लोको शेड लंबे समय से तकनीकी नवाचारों के लिए जाना जाता रहा है। यहां पहले भी कई आधुनिक परियोजनाओं को सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है। अब ऑक्सी-हाइड्रोजन फ्यूल गैस जनरेटर की शुरुआत ने इस लोको शेड को फिर चर्चा में ला दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाइड्रोजन आधारित तकनीक भविष्य की औद्योगिक जरूरतों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रही है। दुनियाभर में उद्योगों और परिवहन क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों पर जोर बढ़ रहा है। ऐसे में रेलवे की यह पहल न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी हरित तकनीकों की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।
रेलवे प्रशासन ने इस परियोजना को सफल बनाने वाले इंजीनियरों और तकनीकी कर्मचारियों की सराहना की है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की तकनीकें भारतीय रेलवे को भविष्य के लिए अधिक सक्षम, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाएंगी।
जमालपुर लोको शेड में शुरू हुई यह नई व्यवस्था अब रेलवे के लिए एक मॉडल परियोजना के रूप में देखी जा रही है। आने वाले समय में यदि इसे अन्य मंडलों और कार्यशालाओं में भी लागू किया जाता है, तो भारतीय रेलवे अपने हरित और सुरक्षित परिचालन के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ी छलांग लगा सकता है।


