भागलपुर नगर निगम का कड़ा प्रहार: विकास योजनाओं में रोड़ा अटकाने वाले 31 ठेकेदारों को अंतिम चेतावनी; दो दिन में एग्रीमेंट नहीं तो होंगे ब्लैकलिस्ट

भागलपुर। सिल्क सिटी की सूरत संवारने के लिए कागजों पर बनी विकास की योजनाएं अब धरातल पर उतरने के लिए प्रशासनिक जद्दोजहद के दौर से गुजर रही हैं। भागलपुर नगर निगम के गलियारों में बुधवार को उस समय गहमागहमी बढ़ गई, जब नगर आयुक्त ने शहर के विकास की गति को थामने वाले लापरवाह ठेकेदारों के खिलाफ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की तैयारी कर ली। नगर निगम सभाकक्ष में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में नगर आयुक्त ने उन 31 ठेकेदारों की जमकर क्लास ली, जिन्होंने निविदा (Tender) प्रक्रिया पूरी होने और काम आवंटित होने के महीनों बाद भी सरकारी फाइलों को ठंडे बस्ते में डाल रखा है। इन ठेकेदारों ने जनवरी 2026 में निकाली गई महत्वपूर्ण निविदाओं के बावजूद अब तक एग्रीमेंट की प्रक्रिया को पूरा करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है। नगर आयुक्त ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल बातों से काम नहीं चलेगा; उन्होंने सभी 31 ठेकेदारों को महज दो दिनों का अल्टीमेटम दिया है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, तो इन संवेदकों को काली सूची (Blacklist) में डाल दिया जाएगा, जिसका सीधा अर्थ यह होगा कि वे भविष्य में किसी भी सरकारी निविदा प्रक्रिया में भाग लेने के अयोग्य हो जाएंगे।

नगर आयुक्त की दो टूक: काम शुरू करो या बाहर जाओ

​बुधवार को हुई समीक्षा बैठक सामान्य बैठकों से काफी अलग थी। बैठक शुरू होते ही नगर आयुक्त के तेवर काफी तल्ख नजर आए। उन्होंने कार्य में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों को जमकर फटकार लगाई। नगर आयुक्त का मुख्य रोष इस बात पर था कि जनवरी 2026 में ही निविदाएं आमंत्रित की गई थीं और सभी योग्य संवेदकों को उनके कार्यों का आवंटन कर दिया गया था। इसके बावजूद, मई का महीना शुरू हो जाने के बाद भी एग्रीमेंट की प्रक्रिया का पूरा न होना प्रशासनिक तंत्र की कार्यक्षमता पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है।

​नगर आयुक्त ने ठेकेदारों को संबोधित करते हुए कहा कि नगर निगम का उद्देश्य केवल टेंडर निकालना नहीं, बल्कि जनता को सुविधाएं प्रदान करना है। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि अगले दो दिनों के भीतर संवेदक अपनी अग्रधन की राशि (Earnest Money) जमा कर एफ 2 (F2) फॉर्म समर्पित नहीं करते हैं, तो उन पर सख्त विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यह अल्टीमेटम एक आधिकारिक पत्र के माध्यम से भी जारी किया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की कानूनी अड़चन न रहे।

अधर में लटकीं 15वें और छठे वित्त आयोग की योजनाएं

​ठेकेदारों की इस सुस्ती का सीधा असर शहर के उन महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर पड़ रहा है, जिनका इंतजार भागलपुर की जनता लंबे समय से कर रही है। एग्रीमेंट में हो रही अनावश्यक देरी की वजह से 15वें वित्त आयोग, षष्ठम वित्त आयोग और मलिन बस्ती योजना मद के अंतर्गत होने वाले दर्जनों प्रोजेक्ट अधर में लटके हुए हैं। इन योजनाओं में मुख्य रूप से:

  • पथ निर्माण: शहर की कई गलियों और मुख्य मार्गों का जीर्णोद्धार रुका हुआ है।
  • नाला निर्माण: मानसून की दस्तक से पहले नालों का बनना अनिवार्य है ताकि जलजमाव की समस्या न हो।
  • कलवर्ट और पुलिया: जल निकासी के लिए छोटे कलवर्ट्स का निर्माण बाधित है।
  • डीप बोरिंग: गर्मी के मौसम में पीने के पानी की समस्या को देखते हुए कई वार्डों में डीप बोरिंग होनी थी, जो अब तक शुरू नहीं हो पाई है।

​नगर आयुक्त ने चिंता व्यक्त की कि यदि ये कार्य समय पर शुरू नहीं हुए, तो आवंटित फंड के लैप्स होने का खतरा बना रहेगा, जो शहर के विकास के लिए एक बड़ा आघात होगा।

प्रशासनिक मुस्तैदी: योजना शाखा प्रभारी ने दी चेतावनी

​इस पूरे घटनाक्रम पर कार्यालय अधीक्षक सह योजना शाखा प्रभारी मो. रेहान अहमद ने विस्तृत जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि नगर निगम प्रशासन ने अब अपनी कार्यशैली को पूरी तरह से ‘रिजल्ट ओरिएंटेड’ बना लिया है। एग्रीमेंट नहीं कराने वाले ठेकेदारों की सूची तैयार कर ली गई है और सभी 31 संवेदकों को व्यक्तिगत रूप से भी सूचित किया जा रहा है। रेहान अहमद ने स्पष्ट किया कि समय सीमा समाप्त होने के बाद किसी भी प्रकार का बहाना या दावा मान्य नहीं होगा।

​योजना शाखा के अनुसार, ठेकेदारों की इस लापरवाही से न केवल विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि नगर निगम के प्रशासनिक रिकॉर्ड पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। विभाग अब इस फिराक में है कि यदि ये 31 ठेकेदार पीछे हटते हैं, तो उन कार्यों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए ताकि विकास की गाड़ी पटरी से न उतरे। काली सूची में डालने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद इन ठेकेदारों की सिक्योरिटी मनी जब्त करने की भी योजना है।

ठेकेदारों की चुप्पी और भविष्य का संकट

​दूसरी ओर, इस अल्टीमेटम के बाद ठेकेदारों के खेमे में सन्नाटा पसरा हुआ है। हालांकि कुछ ठेकेदारों का दबी जुबान में कहना है कि कच्ची सामग्री की कीमतों में उतार-चढ़ाव और कुछ तकनीकी दिक्कतों के कारण एग्रीमेंट में देरी हुई, लेकिन नगर आयुक्त ने इन तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका तर्क है कि निविदा प्रक्रिया में शामिल होने से पहले सभी ठेकेदारों को शर्तों और बाजार की स्थिति की पूरी जानकारी थी।

​काली सूची में डालने का डर ठेकेदारों के लिए बहुत बड़ा आर्थिक और राजनैतिक झटका साबित हो सकता है। एक बार ब्लैकलिस्ट होने के बाद कोई भी फर्म या व्यक्ति अगले कई वर्षों तक बिहार के किसी भी सरकारी विभाग के लिए काम नहीं कर सकेगा। यह न केवल उनके वर्तमान राजस्व को प्रभावित करेगा, बल्कि उनकी प्रतिष्ठा पर भी दाग लगाएगा। अब देखना यह होगा कि नगर आयुक्त के इस कड़े रुख के बाद आगामी 48 घंटों में कितने ठेकेदार एग्रीमेंट के लिए आगे आते हैं।

शहरवासियों की नजरें और मानसून की चुनौती

​भागलपुर के नागरिक, जो हर साल जलजमाव और टूटी सड़कों का दंश झेलते हैं, इस प्रशासनिक कड़ाई का स्वागत कर रहे हैं। मानसून की आहट शुरू हो चुकी है और यदि जून के पहले सप्ताह तक नाला निर्माण और मरम्मत के कार्य शुरू नहीं हुए, तो शहर एक बार फिर टापू में तब्दील हो सकता है। 15वें वित्त आयोग की राशि का सही उपयोग शहर के ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने के लिए किया जाना है, जो इन 31 लापरवाह ठेकेदारों के कारण रुका पड़ा है।

​नगर आयुक्त ने विभाग के कनीय अभियंताओं और सहायक अभियंताओं को भी निर्देश दिया है कि वे एग्रीमेंट की प्रक्रिया में ठेकेदारों की मदद करें, लेकिन किसी भी प्रकार की शिथिलता को स्वीकार न करें। भागलपुर नगर निगम अब इस मूड में है कि वह विकास की रफ़्तार को किसी भी कीमत पर रुकने नहीं देगा। अगले दो दिन भागलपुर के शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अत्यंत निर्णायक होने वाले हैं।

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