​विक्रमशिला पुल संकट के बीच थमी रफ़्तार को फिर से पंख: भागलपुर से रांची और पूर्णिया के लिए शुरू हुआ बसों का संचालन; यात्रियों को बड़ी राहत

भागलपुर। सिल्क सिटी भागलपुर और उत्तर बिहार के बीच संपर्क का मुख्य आधार कहे जाने वाले विक्रमशिला महासेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद उपजे परिवहन संकट ने पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और जनजीवन को एक तरह से ‘लॉक’ कर दिया था। 3 मई की वह काली रात जब महासेतु का एक स्लैब अचानक भरभराकर गिर गया, उसके बाद से ही सड़कों पर गाड़ियों की लंबी कतारें और यात्रियों की बेबसी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी थी। लेकिन अब इस दिशा में प्रशासन और निजी ऑपरेटरों ने मिलकर समाधान का एक नया ‘रूट मैप’ तैयार किया है। तकनीकी अवरोधों और पुल के बंद होने के कारण पूरी तरह ठप पड़ चुकी बस सेवाओं को अब वैकल्पिक रास्तों और रणनीतिक केंद्रों के जरिए फिर से बहाल किया जा रहा है। गुरुवार, 07 मई 2026 की सुबह से भागलपुर के विभिन्न स्टैंडों से झारखंड और सीमांचल के जिलों के लिए बसों का धुआं फिर से सड़कों पर दिखाई देने लगा है। हालांकि यह व्यवस्था अभी अपनी पूर्ण क्षमता में नहीं है, लेकिन इसने उन हजारों मुसाफिरों के लिए उम्मीद की खिड़की खोल दी है जो पिछले चार दिनों से नावों और पैदल सफर के बीच फंसे हुए थे। पथ परिवहन निगम और निजी बस मालिकों के इस साझा प्रयास ने भागलपुर को एक बार फिर रांची, बोकारो और पूर्णिया जैसे प्रमुख शहरों से जोड़ दिया है।

नवगछिया बना सीमांचल का नया ‘ट्रांजिट हब’

​विक्रमशिला पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण भागलपुर शहर से उत्तर बिहार की ओर जाने वाला सीधा रास्ता फिलहाल बंद है। ऐसे में बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (BSRTC) ने एक चतुराई भरी व्यवस्था के तहत नवगछिया को अपना मुख्य केंद्र बनाया है। निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक अमित कुमार ने बताया कि यात्रियों की बढ़ती परेशानियों को देखते हुए बुधवार से ही प्रायोगिक तौर पर बसों का परिचालन शुरू कर दिया गया है。 वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, निगम की चार सरकारी बसें अब नवगछिया स्टैंड से सीधे पूर्णिया और जोगबनी के लिए रवाना हो रही हैं。

​इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ उन लोगों को मिल रहा है जो गंगा पार कर किसी तरह नवगछिया पहुँच रहे हैं। अमित कुमार के अनुसार, पूर्णिया के लिए दो और जोगबनी के लिए दो बसें फिलहाल अपनी सेवाएं दे रही हैं。 सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि आपदा की इस घड़ी में भी निगम ने किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं की है; नवगछिया से इन गंतव्यों तक का किराया उतना ही रखा गया है जितना पुल टूटने से पहले निर्धारित था。 क्षेत्रीय प्रबंधक का कहना है कि जैसे ही मुंगेर वाले वैकल्पिक रूट पर वाहनों का भारी दबाव कम होगा, निगम अपनी बसों की संख्या में और इजाफा करेगा ताकि लोगों को नावों के सफर के बाद पैदल न चलना पड़े।

झारखंड के लिए निजी ऑपरेटरों की ‘लाइफलाइन’

​सरकारी बसों के साथ-साथ निजी बस स्टैंड से भी सात महत्वपूर्ण बसों का परिचालन शुरू किया गया है, जो भागलपुर को पड़ोसी राज्य झारखंड के औद्योगिक केंद्रों से जोड़ रही हैं。 निजी बस स्टैंड के प्रभारी (किरानी) राजेश कुमार ने बताया कि यात्रियों की बढ़ती मांग और बोकारो-रांची जाने वाले लोगों की विवशता को देखते हुए नए बस स्टैंड से परिचालन की अनुमति दी गई है。 वर्तमान में भागलपुर से होकर जमशेदपुर जाने वाली बस का संचालन शुरू हो चुका है, जो पूर्णिया से आती है。

​झारखंड रूट की विस्तृत जानकारी देते हुए राजेश कुमार ने बताया कि कोयला डिपो से जमशेदपुर के लिए विशेष रूप से दो बसें चलाई जा रही हैं。 इसके अलावा, झारखंड की राजधानी रांची और स्टील सिटी बोकारो के लिए भी एक-एक बस का परिचालन नियमित कर दिया गया है。 निजी संचालकों की इस पहल से उन छात्रों और व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है जिनका कारोबार और पढ़ाई झारखंड के इन शहरों पर निर्भर है। पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत होने तक ये बसें मुंगेर और अन्य वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेकर अपने गंतव्य तक पहुँच रही हैं, जिससे यात्रा का समय भले ही बढ़ा है, लेकिन कनेक्टिविटी फिर से बहाल हो गई है।

मुंगेर रूट पर दबाव और प्रशासनिक रणनीति

​विक्रमशिला पुल के बंद होने के बाद भागलपुर से पटना या उत्तर बिहार जाने का एकमात्र सड़क मार्ग अब मुंगेर का श्रीकृष्ण सेतु ही बचा है। यही कारण है कि भागलपुर प्रशासन और परिवहन विभाग मुंगेर वाले रास्ते पर वाहनों के बोझ को लेकर अत्यंत सतर्क है। क्षेत्रीय प्रबंधक अमित कुमार ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में मुंगेर रूट पर ट्रैफिक जाम और दबाव काफी अधिक है。 यदि इसी दबाव के बीच और अधिक बसें उतार दी गईं, तो मुंगेर पुल पर भी ‘ग्रिड लॉक’ की स्थिति पैदा हो सकती है, जो संपूर्ण पूर्वी बिहार के लिए घातक होगी।

​प्रशासन की योजना है कि धीरे-धीरे बसों की संख्या बढ़ाई जाए ताकि मुंगेर के रास्ते पर ट्रैफिक का प्रवाह बना रहे। फिलहाल, छोटी गाड़ियों और आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही को प्राथमिकता दी जा रही है। जैसे ही मुंगेर पुल और संबंधित पहुंच पथों पर वाहनों का दबाव कम होगा, पथ परिवहन निगम अपनी अन्य लंबी दूरी की बसों को भी सड़कों पर उतार देगा। यह एक संतुलित दृष्टिकोण है ताकि एक पुल के टूटने का असर दूसरे सुरक्षित पुल पर न पड़े।

यात्रियों का संघर्ष और वैकल्पिक व्यवस्था का सच

​भले ही बसों का परिचालन शुरू हो गया है, लेकिन यात्रियों के लिए सफर अभी भी किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। भागलपुर शहर से नवगछिया जाने के लिए लोगों को पहले बरारी घाट तक पहुँचना पड़ता है, फिर वहां से नाव के जरिए गंगा पार करनी पड़ती है और उसके बाद नवगछिया स्टैंड तक पैदल या ऑटो का सहारा लेना पड़ता है। इस ‘मल्टी-मॉडल’ यात्रा ने लोगों के पसीने छुड़ा दिए हैं।

​हालांकि, रांची और बोकारो जाने वाली बसों के परिचालन ने एक बड़ा मानसिक बोझ कम किया है। पहले लोगों को लग रहा था कि वे भागलपुर में पूरी तरह कैद हो गए हैं, लेकिन अब सात निजी बसों के चलने से कम से कम झारखंड जाने का रास्ता साफ हो गया है। स्टैंड पर मौजूद यात्रियों का कहना है कि सरकार को और अधिक ‘शटल बसें’ चलानी चाहिए जो घाटों से स्टैंड तक लोगों को पहुँचा सकें। राजेश कुमार जैसे कर्मी यात्रियों को सही सूचना देने में जुटे हैं ताकि वे गलत स्टैंड पर जाकर अपना समय बर्बाद न करें।

आगामी चुनौतियां और परिवहन विभाग का रुख

​विक्रमशिला पुल के स्लैब की मरम्मत में अभी काफी समय लगने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में केवल 11 बसों का परिचालन ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। भागलपुर से हर दिन हजारों लोग पूर्णिया, कटिहार और अररिया की ओर जाते हैं। परिवहन विभाग अब इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या कहलगांव या अन्य घाटों के जरिए बसों को बड़े स्टीमरों (रो-रो वेसल) पर लादकर पार कराया जा सकता है।

​फिलहाल, अमित कुमार और उनकी टीम का पूरा ध्यान नवगछिया और भागलपुर के बीच एक ऐसा समन्वय बनाने पर है जिससे यात्रियों को कम से कम असुविधा हो। आने वाले एक-दो दिनों में यदि मुंगेर रूट स्थिर रहता है, तो पटना और मुजफ्फरपुर के लिए भी अतिरिक्त बसों के खुलने की संभावना है। भागलपुर के लोगों के लिए यह 11 बसें केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि उस ठप पड़ी जिंदगी के फिर से पटरी पर लौटने का संकेत हैं जो पुल के एक स्लैब के साथ गंगा में समा गई थी। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे धैर्य रखें और बसों के समय की जानकारी के लिए अधिकृत काउंटरों पर ही संपर्क करें।

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