
भाजपा और टीएमसी में ठनी, सीबीआई जांच की उठी मांग
कोलकाता/मध्यमग्राम। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों के बाद राज्य में शुरू हुआ राजनैतिक हिंसा का दौर अब एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मोड़ पर पहुँच गया है। राज्य में भाजपा की ऐतिहासिक बढ़त और नई सरकार के गठन की सुगबुगाहट के बीच बुधवार की देर रात उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम इलाके में एक ऐसी वारदात हुई जिसने पूरे बंगाल को झकझोर कर रख दिया है। भाजपा के कद्दावर नेता और नंदीग्राम के विधायक शुभेंदु अधिकारी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में शुमार उनके निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी। हमलावरों ने इस वारदात को उस समय अंजाम दिया जब चंद्रनाथ रथ मध्यमग्राम के एक व्यस्त इलाके से गुजर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस सूत्रों के अनुसार, हमलावरों ने चंद्रनाथ रथ पर बेहद करीब से गोलियां चलाईं, जिससे उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला। इस घटना के बाद शुभेंदु अधिकारी तुरंत अस्पताल पहुँचे, जहाँ का माहौल गमगीन और तनावपूर्ण देखा गया। इस हत्या ने बंगाल की राजनीति में एक बार फिर ‘टारगेट किलिंग’ और चुनाव बाद की हिंसा (Post-Poll Violence) की पुरानी और कड़वी यादों को ताजा कर दिया है।
मध्यमग्राम में खूनी खेल: तीन गोलियों ने ली चंद्रनाथ की जान
बुधवार की देर रात जब मध्यमग्राम की सड़कों पर हलचल थोड़ी कम हुई थी, तभी अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका दहल उठा। चंद्रनाथ रथ अपनी गतिविधियों को निपटाकर लौट रहे थे, तभी बाइक सवार हमलावरों ने उन्हें घेर लिया। हमलावरों का इरादा पूरी तरह से जान लेने का था, इसीलिए उन्होंने बेहद करीब से उन पर सटीक निशाना साधा। सूत्रों का दावा है कि हमलावरों ने चंद्रनाथ रथ के सीने को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ फायरिंग की। तीन गोलियां सीधे उनकी छाती में लगीं, जिससे वे लहुलूहान होकर वहीं गिर पड़े।
वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार होने में सफल रहे। स्थानीय लोगों और वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने आनन-फानन में चंद्रनाथ रथ को नजदीकी अस्पताल पहुँचाया। जैसे ही यह खबर शुभेंदु अधिकारी तक पहुँची, वे अपने सभी कार्यक्रम छोड़कर सीधे अस्पताल की ओर भागे। अस्पताल में डॉक्टरों की एक बड़ी टीम ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन शरीर से अत्यधिक खून बह जाने और महत्वपूर्ण अंगों में गोली लगने के कारण उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। शुभेंदु अधिकारी अपने सहयोगी का शव देखकर भावुक नजर आए और उन्होंने इसे बंगाल के लोकतंत्र पर एक बड़ा हमला करार दिया।
शुभेंदु अधिकारी के ‘चाणक्य’ थे चंद्रनाथ रथ: 12 साल का अटूट साथ
चंद्रनाथ रथ केवल एक कर्मचारी या निजी सहायक नहीं थे, बल्कि उन्हें शुभेंदु अधिकारी का राजनैतिक रणनीतिकार और ‘दाहिना हाथ’ माना जाता था। पिछले करीब 10 से 12 वर्षों से वे शुभेंदु के साये की तरह साथ रहे। चाहे वह 2021 का नंदीग्राम का ऐतिहासिक चुनाव हो या वर्तमान 2026 का संग्राम, चंद्रनाथ रथ ने पर्दे के पीछे रहकर भाजपा के लिए जमीन तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। शुभेंदु अधिकारी के हर छोटे-बड़े राजनैतिक फैसलों, जनसंपर्क अभियानों और संगठनात्मक बैठकों का प्रबंधन उन्हीं के जिम्मे होता था।
उनकी सादगी और मिलनसार स्वभाव के कारण वे भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच भी अत्यंत लोकप्रिय थे। मध्यमग्राम और उत्तर 24 परगना के इलाकों में भाजपा के सांगठनिक ढांचे को मजबूत करने में चंद्रनाथ रथ का बड़ा योगदान रहा है। उनकी हत्या को भाजपा नेतृत्व एक बड़े राजनैतिक नुकसान के रूप में देख रहा है। पार्टी के भीतर यह चर्चा आम है कि हमलावरों ने शुभेंदु अधिकारी को कमजोर करने के लिए उनके सबसे मजबूत स्तंभ को निशाना बनाया है। चंद्रनाथ की मौत से शुभेंदु अधिकारी व्यक्तिगत रूप से भी काफी टूट गए हैं, क्योंकि वे उन्हें अपने छोटे भाई की तरह मानते थे।
राजनैतिक आरोप-प्रत्यारोप: भाजपा ने टीएमसी को घेरा, टीएमसी का पलटवार
हत्याकांड के तुरंत बाद बंगाल की राजनीति में आरोपों की झड़ी लग गई है। भाजपा सूत्रों और स्थानीय नेताओं ने इस वारदात के लिए सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया है। भाजपा का आरोप है कि चुनाव में मिली करारी हार और सत्ता खिसकते देख टीएमसी अब ‘बदले की राजनीति’ पर उतर आई है। शुभेंदु अधिकारी ने अस्पताल परिसर में मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में कहा कि यह एक सुनियोजित राजनैतिक हत्या है और इसके पीछे उन लोगों का हाथ है जो बंगाल में शांति और लोकतंत्र नहीं चाहते।
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। टीएमसी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर चंद्रनाथ रथ की हत्या की कड़ी निंदा की है, लेकिन साथ ही इसे भाजपा की ‘आंतरिक कलह’ का परिणाम बताया है। टीएमसी का तर्क है कि भाजपा के भीतर टिकट बंटवारे और वर्चस्व को लेकर कई गुटों में टकराव चल रहा है और यह हत्या उसी का नतीजा हो सकती है। टीएमसी ने अपने बयान में यह भी जोड़ा कि पिछले तीन दिनों में उनके भी तीन कार्यकर्ताओं की कथित रूप से भाजपा समर्थित बदमाशों ने हत्या की है। टीएमसी ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच कोर्ट की निगरानी में सीबीआई (CBI) से कराई जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। टीएमसी की इस मांग ने भाजपा को रक्षात्मक स्थिति में डाल दिया है, क्योंकि भाजपा खुद भी केंद्रीय एजेंसियों से जांच की मांग करती रही है।
प्रशासनिक मुस्तैदी और एसआईटी (SIT) का गठन
मध्यमग्राम जैसी संवेदनशील जगह पर हुई इस वारदात के बाद बंगाल पुलिस मुख्यालय में हड़कंप मच गया है। उत्तर 24 परगना के पुलिस अधीक्षक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। पुलिस की टीमें मध्यमग्राम के चप्पे-चप्पे पर लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के फुटेज खंगाल रही हैं। हमलावरों की पहचान के लिए कई संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
प्रारंभिक फॉरेंसिक जांच में यह बात सामने आई है कि हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार प्रतिबंधित बोर के हो सकते हैं और हमलावर पेशेवर शूटर थे। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या चंद्रनाथ रथ को पहले से कोई धमकी मिल रही थी? उनके मोबाइल फोन के कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) को भी खंगाला जा रहा है ताकि उनके आखिरी संपर्कों का पता लगाया जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला राजनैतिक प्रतिद्वंद्विता से जुड़ा हो सकता है, लेकिन वे अन्य सभी पहलुओं, जिसमें व्यक्तिगत रंजिश भी शामिल है, पर भी जांच कर रहे हैं। फिलहाल, मध्यमग्राम और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती कर दी गई है।
बंगाल में राजनैतिक हिंसा का पुराना इतिहास और वर्तमान संकट
पश्चिम बंगाल में चुनावों के बाद हिंसा का एक लंबा और रक्तरंजित इतिहास रहा है। 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद भी राज्य में बड़े पैमाने पर हिंसा देखी गई थी, जिसकी जांच अभी भी विभिन्न स्तरों पर जारी है। 2026 के चुनाव परिणाम आने के बाद से ही राज्य के विभिन्न हिस्सों से मारपीट, आगजनी और हत्याओं की खबरें आ रही हैं। चंद्रनाथ रथ की हत्या ने इस आग में घी डालने का काम किया है।
वर्तमान स्थिति यह है कि राज्य में अभी भी ‘आदर्श आचार संहिता’ प्रभावी है, जिसका अर्थ है कि प्रशासन और सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी अभी भी चुनाव आयोग के अधीन कार्य कर रहे तंत्र पर है। भाजपा का तर्क है कि यदि आचार संहिता के दौरान शुभेंदु अधिकारी जैसे बड़े नेता का पीए सुरक्षित नहीं है, तो आम कार्यकर्ता की क्या स्थिति होगी? वहीं, टीएमसी का कहना है कि भाजपा जीत के उन्माद में उनके कार्यकर्ताओं को डरा-धमका रही है। यह राजनैतिक वैमनस्य अब सड़कों पर खूनी संघर्ष का रूप ले चुका है, जिससे आम नागरिक सहमे हुए हैं।
सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स की नई चुनौतियां
चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद उत्तर 24 परगना और कोलकाता के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर रखा गया है। पुलिस ने कई सड़कों पर नाकेबंदी कर दी है। भाजपा ने आज राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है, जिसे देखते हुए प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी चुनौती है। शुभेंदु अधिकारी के सुरक्षा घेरे को भी और अधिक मजबूत कर दिया गया है।
आगामी कुछ दिनों में राज्य में नई सरकार का शपथ ग्रहण होना है, ऐसे में इस तरह की वारदातें प्रशासनिक तैयारियों को प्रभावित कर रही हैं। केंद्र सरकार की भी इस पूरी घटना पर पैनी नजर है। गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने भी इस घटना को गंभीरता से लिया है और संकेत दिए हैं कि वे इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक उठाएंगे। फिलहाल, मध्यमग्राम का वह इलाका जहाँ गोलियां चली थीं, पूरी तरह से पुलिस छावनी में तब्दील है और हवा में गम व गुस्से का मिला-जुला अहसास तैर रहा है। चंद्रनाथ रथ का पार्थिव शरीर अब पोस्टमार्टम के बाद उनके परिजनों को सौंपा जाएगा, जिसके बाद उनकी अंतिम यात्रा में भाजपा के कई बड़े नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है।


