
सरकारी सेवकों से जुड़े मामलों में न्याय केवल कागजों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देना भी जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि विभागीय जांच और अनुशासनिक कार्रवाई में जांच पदाधिकारी तथा प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है और उनका सर्वोत्तम प्रयास ही निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित कर सकता है।
मुख्य सचिव बुधवार को पटना स्थित मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय के सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर निदेशालय की नई वेबसाइट का उद्घाटन किया गया और विभागीय गतिविधियों की विस्तृत जानकारी साझा की गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के प्रभावी अनुप्रयोग और प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को सामने लाना था।
अपने संबोधन में मुख्य सचिव ने कहा कि सरकारी सेवकों के खिलाफ दर्ज मामलों में निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाना लोकतांत्रिक प्रशासन की बुनियादी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष होगी और सभी तथ्यों का सही मूल्यांकन किया जाएगा, तभी कर्मचारियों और प्रशासन दोनों के बीच विश्वास कायम रहेगा।
उन्होंने हाल के महीनों में राज्य भर में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की विशेष सराहना की। मुख्य सचिव ने कहा कि मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय द्वारा फरवरी और मार्च महीने में बड़े स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनका सकारात्मक प्रभाव प्रशासनिक व्यवस्था में देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से अधिकारियों को बिहार सरकारी सेवक नियमावली 2005 के विभिन्न प्रावधानों की व्यावहारिक जानकारी दी गई, जिससे भविष्य में विभागीय कार्रवाई के दौरान नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का बेहतर पालन सुनिश्चित हो सकेगा।
मुख्य सचिव ने महानिदेशक-सह-मुख्य जांच आयुक्त और उनकी टीम की सराहना करते हुए कहा कि उनके परिश्रम और दूरदर्शिता का ही परिणाम है कि अब तक साढ़े तीन हजार से अधिक प्रशासनिक पदाधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना आसान कार्य नहीं था, लेकिन टीम ने इसे सफलतापूर्वक पूरा किया।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी अभिलेखों के रख-रखाव की व्यवस्था को मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है। इस दिशा में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा करते हुए उन्होंने विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्दर और उनकी टीम को शुभकामनाएं दीं। मुख्य सचिव ने कहा कि अभिलेखों के बेहतर प्रबंधन से प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी और भविष्य में यह व्यवस्था प्रशासनिक पदाधिकारियों और कर्मचारियों के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
कार्यक्रम के दौरान महानिदेशक-सह-मुख्य जांच आयुक्त दीपक कुमार सिंह ने निदेशालय की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि नैसर्गिक न्याय की दिशा में अब तक कुल 3507 प्रशासनिक पदाधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव स्तर के 42 वरिष्ठ अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा पटना में तैनात विशेष सचिव स्तर तक के 95 आईएएस अधिकारियों को भी अनुशासनिक कार्रवाई से संबंधित प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई है।
दीपक कुमार सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें शामिल अधिकारियों की परीक्षा भी ली जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें नियमों और प्रक्रियाओं की सही समझ विकसित हुई है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि जिलों में पदाधिकारियों को प्रशिक्षित करने और उनकी परीक्षा आयोजित करने के लिए प्रशिक्षकों का एक विशेष समूह तैयार किया जा रहा है। इस प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए निदेशालय की वेबसाइट लॉन्च की गई है। वेबसाइट पर अनुशासनिक कार्रवाई और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से संबंधित सभी महत्वपूर्ण पुस्तकों और दस्तावेजों को अपलोड किया गया है, ताकि अधिकारी और कर्मचारी आसानी से इनका अध्ययन कर सकें।
कार्यक्रम में मुख्य सचिव को निदेशालय द्वारा प्रकाशित पुस्तकों का एक सेट भी भेंट किया गया। इन पुस्तकों में विभागीय कार्रवाई, अनुशासनिक नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हैं।
इस अवसर पर सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्दर ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि प्रशासनिक सुधार और पारदर्शिता सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाया जा रहा है।
कार्यक्रम में कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। इनमें विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, गृह विभाग के जांच आयुक्त-सह-अपर प्रमुख सचिव अरविंद कुमार चौधरी, जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल, गृह विभाग के सचिव प्रणव कुमार और वित्त विभाग की सचिव रचना पाटिल प्रमुख रूप से शामिल थीं। इसके अलावा सामान्य प्रशासन विभाग और मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय के कई अन्य अधिकारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक पदाधिकारियों को अनुशासनिक कार्रवाई और नैसर्गिक न्याय से संबंधित प्रशिक्षण देना एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे विभागीय मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी और कर्मचारियों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। साथ ही, यह पहल सरकारी तंत्र में जवाबदेही और विश्वास को भी मजबूत करेगी।
पटना में आयोजित यह कार्यक्रम प्रशासनिक सुधारों और डिजिटल पारदर्शिता की दिशा में बिहार सरकार के बढ़ते कदमों का उदाहरण माना जा रहा है। नई वेबसाइट और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और न्यायपूर्ण बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।


