
बिहार के लखीसराय जिले से पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को लेकर एक मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने स्थानीय थानाध्यक्ष पर शिकायत दर्ज नहीं करने का आरोप लगाया है। चानन थाना क्षेत्र की रहने वाली कविता देवी ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई और कहा कि पारिवारिक विवाद में उनके साथ मारपीट हुई, लेकिन थाना स्तर पर अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। महिला ने आरोप लगाया कि शिकायत देने के बावजूद कार्रवाई में देरी की जा रही है, जिससे वह लगातार भय के माहौल में जीने को मजबूर हैं।
यह मामला चानन थाना क्षेत्र के बसुआचक गांव का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, मंगलवार 5 मई 2026 को पारिवारिक विवाद के दौरान कविता देवी के साथ कथित रूप से मारपीट की गई। घटना में महिला घायल हो गई, जिसके बाद उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल लखीसराय में भर्ती कराया गया। इलाज के बाद बुधवार को महिला सीधे पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंची और पूरे मामले की लिखित शिकायत दी।
पीड़िता का कहना है कि घटना के दिन ही उन्होंने चानन थाना पहुंचकर लिखित आवेदन दिया था। आवेदन में उन्होंने अपने देवर, श्वसुर और ननद पर मारपीट तथा धमकी देने का आरोप लगाया था। इसके बावजूद अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। महिला का आरोप है कि पुलिस की निष्क्रियता के कारण आरोपी पक्ष का मनोबल बढ़ गया है और उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं।
कविता देवी ने बताया कि घटना के दौरान उनके साथ बुरी तरह मारपीट की गई, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार के कुछ लोगों ने जान से मारने की नीयत से हमला किया। घायल अवस्था में स्थानीय लोगों और परिचितों की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज किया गया।
महिला के अनुसार, उनके पति दूसरे राज्य में मजदूरी करते हैं और लंबे समय से घर से बाहर रहकर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। ऐसे में वह अपने तीन बच्चों के साथ गांव में अकेली रहती हैं। पीड़िता ने कहा कि पति के बाहर रहने का फायदा उठाकर परिवार के कुछ लोग उन्हें लगातार प्रताड़ित करते हैं।
पीड़िता का कहना है कि विवाद केवल मारपीट तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें लगातार मानसिक दबाव में रखा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत करने के बाद से आरोपी पक्ष और अधिक आक्रामक हो गया है। महिला ने कहा कि उन्हें और उनके बच्चों को जान का खतरा महसूस हो रहा है, जिसके कारण परिवार भय के माहौल में जीवन जी रहा है।
एसपी कार्यालय पहुंची महिला ने पुलिस अधीक्षक से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। साथ ही उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि स्थानीय थाने को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया जाए ताकि आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सके। महिला का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
घटना के बाद स्थानीय स्तर पर भी इस मामले की चर्चा शुरू हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पारिवारिक विवाद के मामलों में अक्सर महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित होती हैं। कई बार आर्थिक और सामाजिक दबाव के कारण पीड़ित महिलाएं खुलकर अपनी बात नहीं रख पातीं। ऐसे मामलों में अगर समय पर पुलिस कार्रवाई न हो तो पीड़ित पक्ष खुद को असुरक्षित महसूस करने लगता है।
महिला सुरक्षा और घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों पर काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि पुलिस को ऐसे मामलों में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। उनका मानना है कि अगर कोई महिला घायल अवस्था में शिकायत लेकर पहुंचती है तो तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की जानी चाहिए। इससे पीड़िता को भरोसा मिलता है और आरोपी पक्ष पर भी दबाव बनता है।
हालांकि इस मामले में चानन थाना अध्यक्ष उज्ज्वल कुमार सिंह ने कहा है कि आवेदन के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। उनके अनुसार, मामले की जांच के बाद प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों की बात सुनने और तथ्यों की जांच के बाद आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
कानूनी जानकारों का कहना है कि मारपीट और धमकी जैसे मामलों में पुलिस को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए, खासकर तब जब पीड़ित पक्ष खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा हो। कानून के अनुसार, किसी भी संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर प्राथमिकी दर्ज करना पुलिस की जिम्मेदारी होती है। ऐसे मामलों में देरी होने पर पीड़ितों का भरोसा प्रभावित होता है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को अक्सर सामाजिक दबाव और पारिवारिक तनाव का सामना करना पड़ता है। कई बार महिलाएं लंबे समय तक चुप रहती हैं, लेकिन जब हालात असहनीय हो जाते हैं तब वे प्रशासन का सहारा लेती हैं। ऐसे में पुलिस और प्रशासन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
लखीसराय की यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि घरेलू विवाद और महिला उत्पीड़न के मामलों में त्वरित न्याय और संवेदनशील पुलिसिंग कितनी जरूरी है। यदि पीड़ितों को समय पर सुरक्षा और कानूनी सहायता नहीं मिलती, तो उनका मानसिक और सामाजिक संघर्ष और बढ़ जाता है।
फिलहाल महिला की शिकायत के बाद पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।


