उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी RLM के नेता पर करोड़ों की ठगी का आरोप, मुंबई पुलिस ने शेखपुरा से किया गिरफ्तार

बिहार के शेखपुरा जिले से एक बड़े राजनीतिक और आपराधिक मामले ने अचानक सुर्खियां बटोर ली हैं। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) से जुड़े नेता उमेश कुमार सुमन को मुंबई पुलिस ने करोड़ों रुपये की कथित ठगी के मामले में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उमेश ने फर्जी एनजीओ के नाम पर बड़े कारोबारियों और प्रभावशाली लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनसे करोड़ों रुपये की उगाही की। इस मामले में मुंबई के कई व्यापारियों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने शेखपुरा में दबिश देकर उसे हिरासत में लिया।

जानकारी के अनुसार, मुंबई पुलिस की विशेष टीम कई दिनों से उमेश कुमार सुमन की तलाश कर रही थी। जांच के दौरान उसके बिहार में होने की सूचना मिली, जिसके बाद टीम शेखपुरा पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से गिरफ्तारी अभियान चलाया गया। पुलिस ने उसे उसके आवास के पास से गिरफ्तार किया। बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी के दौरान आरोपी ने भागने की कोशिश भी की, लेकिन पुलिस टीम ने उसे घेरकर पकड़ लिया।

मामला लगभग सवा तीन करोड़ रुपये की कथित ठगी से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, उमेश कुमार सुमन लंबे समय से एक कथित सामाजिक संस्था के नाम पर लोगों से धन इकट्ठा कर रहा था। वह खुद को समाजसेवी और गरीबों की मदद करने वाला व्यक्ति बताकर प्रभावशाली लोगों से संपर्क बनाता था। आरोप है कि उसने कई कारोबारियों को यह विश्वास दिलाया कि उनकी राशि सामाजिक कार्यों और जरूरतमंदों की सहायता में खर्च की जाएगी। इसी भरोसे के आधार पर लोगों से भारी रकम ली गई।

मुंबई पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क योजनाबद्ध तरीके से संचालित किया जा रहा था। आरोप है कि रकम लेने के बाद पैसे वापस करने के बजाय पीड़ितों को धमकाया जाता था। कुछ शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें दस्तावेजों पर दबाव बनाकर हस्ताक्षर करवाए गए ताकि भविष्य में वे कानूनी कार्रवाई न कर सकें। पुलिस अब इस पूरे गिरोह के आर्थिक लेनदेन, बैंक खातों और संपर्कों की गहन जांच कर रही है।

स्थानीय पुलिस अधिकारियों के अनुसार, उमेश कुमार सुमन पहले भी विवादों में रह चुका है। करीब दो वर्ष पहले भी उसे कथित आर्थिक धोखाधड़ी के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। उस समय पुलिस ने उसके पास से नकदी और एक लग्जरी वाहन बरामद किया था। आरोप था कि वह लोगों को पैसा दोगुना करने का लालच देकर ठगी का नेटवर्क चला रहा था। हालांकि बाद में वह जमानत पर बाहर आ गया था।

शेखपुरा जिले के टाल क्षेत्र का निवासी उमेश पिछले कई वर्षों से नगर क्षेत्र के बुधौली इलाके में रह रहा था। इलाके में उसने खुद को एक प्रभावशाली सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में स्थापित करने की कोशिश की थी। स्थानीय स्तर पर वह विभिन्न कार्यक्रमों और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय दिखाई देता था। लेकिन अब उसकी गिरफ्तारी के बाद कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।

राजनीतिक गलियारों में भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है और राजनीतिक दलों से अपने कार्यकर्ताओं की पृष्ठभूमि की जांच करने की मांग की है। वहीं, उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा की ओर से अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि सूत्रों के अनुसार, संगठन स्तर पर मामले की समीक्षा की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में केवल एक व्यक्ति की भूमिका नहीं हो सकती। जांच एजेंसियों को शक है कि उमेश के साथ कई अन्य लोग भी इस नेटवर्क में शामिल रहे होंगे। इसी वजह से पुलिस अब उसके संपर्कों, मोबाइल रिकॉर्ड और वित्तीय गतिविधियों को खंगाल रही है। मुंबई पुलिस की टीम बिहार और महाराष्ट्र के अलावा अन्य राज्यों में भी जांच का दायरा बढ़ा सकती है।

बताया जा रहा है कि आरोपी ने कथित एनजीओ के नाम पर बड़े शहरों में अपनी पहुंच बनाई थी। वह समाज सेवा, गरीबों की मदद और विकास कार्यों के नाम पर लोगों का विश्वास जीतता था। कई व्यापारियों ने उसके प्रोजेक्ट्स में निवेश या आर्थिक सहयोग किया, लेकिन बाद में उन्हें रकम वापस नहीं मिली। जब पीड़ितों ने दबाव बनाया तो कथित तौर पर डराने-धमकाने की रणनीति अपनाई गई।

इस मामले ने फर्जी एनजीओ और सामाजिक institutions की आड़ में चल रहे कथित आर्थिक अपराधों को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार लोग समाज सेवा और चैरिटी के नाम पर आसानी से भरोसा कर लेते हैं, जिसका फायदा ठग उठाते हैं। ऐसे मामलों में आर्थिक लेनदेन से पहले संस्था की वैधता और रिकॉर्ड की जांच जरूरी होती है।

फिलहाल मुंबई पुलिस आरोपी को अपने साथ महाराष्ट्र ले गई है, जहां उससे विस्तृत पूछताछ की जाएगी। पुलिस अदालत में पेश कर रिमांड मांग सकती है ताकि पूरे नेटवर्क और पैसों के लेनदेन की जानकारी जुटाई जा सके। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

शेखपुरा में हुई इस कार्रवाई के बाद इलाके में भी हलचल बढ़ गई है। स्थानीय लोग इस गिरफ्तारी को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग इसे कानून की बड़ी कार्रवाई बता रहे हैं, जबकि कई लोग अब यह जानना चाहते हैं कि आखिर इतने लंबे समय तक कथित तौर पर यह नेटवर्क कैसे चलता रहा।

मुंबई पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है और आगे कई अहम खुलासे हो सकते हैं। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि जिन लोगों ने इस कथित नेटवर्क के जरिए रकम गंवाई है, उनसे भी संपर्क किया जा रहा है ताकि पूरे मामले की आर्थिक परतों को समझा जा सके।

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