पटना के गांधी मैदान में सात मई को सजेगा सम्राट का दरबार: मंत्रिमंडल विस्तार का काउंटडाउन शुरू; भाजपा-जदयू में बराबरी का समझौता, चिराग और मांझी के कोटे में भी बदलाव नहीं

पटना। बिहार की राजनीति में पिछले 19 दिनों से चल रहा सस्पेंस अब खत्म होने वाला है। राज्य की एनडीए सरकार अपने पूर्ण स्वरूप में आने के लिए पूरी तरह तैयार है। राजधानी पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान एक बार फिर सत्ता के इस महासंग्राम और शक्ति प्रदर्शन का गवाह बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल का बहुप्रतीक्षित विस्तार आगामी सात मई को होगा। इस मेगा इवेंट के लिए गांधी मैदान को समारोह स्थल के रूप में चुना गया है, जहाँ नए मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। राज्यपाल सय्यद अता हसनैन नए मंत्रियों को शपथ दिलायेंगे। इस विस्तार के साथ ही बिहार सरकार में मंत्रियों की खाली पड़ी कुर्सियां भर जाएंगी और विकास कार्यों में नई गति आने की उम्मीद जताई जा रही है। 15 अप्रैल को सरकार के गठन के बाद से ही इस विस्तार का इंतजार किया जा रहा था, और अब भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ लंबी चर्चा के बाद फॉर्मूला पूरी तरह साफ हो चुका है।

गांधी मैदान में भव्य तैयारी और प्रशासनिक हलचल

​मंत्रिमंडल विस्तार की तारीख मुकर्रर होते ही पटना जिला प्रशासन रेस हो गया है। गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह के लिए बड़े स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था से लेकर बैठने के इंतजाम और मंच निर्माण के लिए अधिकारियों की टीम लगातार निरीक्षण कर रही है। गांधी मैदान बिहार की राजनीति का केंद्र रहा है और यहाँ होने वाला शपथ ग्रहण समारोह न केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, बल्कि एनडीए के एकजुट होने का एक बड़ा राजनैतिक संदेश भी है। जिला प्रशासन ने तैयारियों का खाका तैयार कर लिया है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सात मई को होने वाले इस भव्य आयोजन में किसी भी प्रकार की कमी न रहे। चिलचिलाती गर्मी को देखते हुए वाटरप्रूफ पंडाल और कूलिंग सिस्टम की भी व्यवस्था की जा रही है ताकि शपथ लेने वाले मंत्रियों और वहां मौजूद समर्थकों को परेशानी न हो।

दिल्ली से पटना तक मथनी: अमित शाह के साथ फाइनल हुआ फॉर्मूला

​इस मंत्रिमंडल विस्तार की पटकथा रविवार को दिल्ली में लिखी गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिल्ली का दौरा कर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा के अन्य शीर्ष नेताओं के साथ लंबी बैठक की। इस मुलाकात के दौरान मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले नामों और विभागों के बंटवारे पर अंतिम मुहर लगाई गई। दिल्ली से लौटने के बाद सम्राट चौधरी ने पटना में एनडीए के सहयोगी दलों के साथ भी समन्वय स्थापित किया। उन्होंने जदयू के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, हम के प्रमुख जीतन राम मांझी और लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान से मिलकर उन्हें विस्तार की जानकारी दी और सहयोगियों के कोटे पर चर्चा की। भाजपा नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि सहयोगियों की गरिमा और उनके पूर्व के प्रतिनिधित्व को बरकरार रखा जाएगा।

16-16 का फॉर्मूला: भाजपा-जदयू में बराबरी की साझेदारी

​सम्राट सरकार के इस विस्तार में सबसे बड़ा बदलाव भाजपा और जदयू के बीच सत्ता की साझेदारी को लेकर देखा जा रहा है। एनडीए सूत्रों के मुताबिक, चूंकि इस बार जदयू ने मुख्यमंत्री का पद भाजपा को दे दिया है, इसलिए मंत्रिमंडल में दोनों बड़ी पार्टियों की संख्या बराबर रखने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। सम्राट चौधरी की सरकार में भाजपा और जदयू, दोनों दलों के 16-16 मंत्री रहेंगे।

  • भाजपा का कोटा: मुख्यमंत्री और एक उप मुख्यमंत्री को मिलाकर भाजपा के पास पहले से दो पद हैं। ऐसे में भाजपा कोटे के 15 और नए चेहरे मंत्रिमंडल में शामिल किए जा सकते हैं।
  • जदयू का कोटा: जदयू के कोटे से दो वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी और बिजेन्द्र प्रसाद यादव पहले ही शपथ ले चुके हैं। अब जदयू कोटे से 14 और मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है।

​यह बराबरी का फॉर्मूला दोनों दलों के बीच बेहतर तालमेल और आपसी सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है। इससे पहले की सरकारों में जदयू के मंत्रियों की संख्या आमतौर पर अधिक रहती थी, लेकिन अब बदले हुए राजनैतिक परिदृश्य में भाजपा ने अपनी मजबूती दर्ज कराई है।

सहयोगी दलों का प्रतिनिधित्व: चिराग और मांझी का दबदबा बरकरार

​मंत्रिमंडल विस्तार में केवल भाजपा और जदयू ही नहीं, बल्कि छोटे सहयोगी दलों की भूमिका भी स्पष्ट कर दी गई है। चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (आर) के पास पूर्व की तरह दो मंत्री पद रहेंगे। चिराग पासवान के लिए यह विस्तार काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे अपनी पार्टी के युवा चेहरों को सरकार में मौका दिलाना चाहते हैं। इसके अलावा, जीतन राम मांझी की पार्टी ‘हम’ और उपेंद्र कुशवाहा की ‘रालोमो’ के पास एक-एक मंत्री पद पूर्ववत बना रहेगा। सम्राट चौधरी ने सभी सहयोगियों को आश्वस्त किया है कि एनडीए की इस सरकार में सभी का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है ताकि 2029 के चुनावों से पहले राज्य में एक मजबूत और एकजुट संदेश दिया जा सके।

रिक्त पदों का गणित और 19 दिनों का इंतजार

​15 अप्रैल को जब सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब उनके साथ केवल विजय कुमार चौधरी और बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने ही शपथ ग्रहण की थी। तब से लेकर अब तक, यानी पिछले 19 दिनों से मंत्रिमंडल के 33 पद रिक्त चल रहे हैं। इन रिक्तियों के कारण कई महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार अतिरिक्त प्रभार के तौर पर चल रहा था। सात मई के विस्तार के बाद सरकार का काम सुचारू रूप से चलने लगेगा। हालांकि, सूत्रों का यह भी कहना है कि इस विस्तार के बाद भी मौजूदा मंत्रिमंडल में दो-तीन पद खाली रखे जा सकते हैं, ताकि भविष्य में राजनैतिक जरूरतों के हिसाब से फेरबदल की गुंजाइश बनी रहे।

युवा जोश और अनुभव का संगम होगी नई टीम

​सम्राट चौधरी की इस नई टीम में अनुभव और युवा जोश का अनूठा संगम देखने को मिल सकता है। भाजपा की ओर से कई नए और युवा चेहरों को मौका मिलने की संभावना है, जो संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। वहीं, जदयू अपने पुराने और भरोसेमंद चेहरों पर ही दांव लगा सकती है। विभागों के बंटवारे में भी संतुलन बनाने की कोशिश की जाएगी ताकि गृह, वित्त, पथ निर्माण और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों के बीच कोई टकराव न हो। सात मई को होने वाला यह शपथ ग्रहण समारोह न केवल एक सरकारी प्रक्रिया होगी, बल्कि सम्राट चौधरी की प्रशासनिक क्षमता और एनडीए की मजबूती की पहली बड़ी परीक्षा भी होगी। पटना की जनता और राजनैतिक प्रेक्षक अब उन नामों का इंतजार कर रहे हैं जिनकी किस्मत का पिटारा गांधी मैदान में खुलेगा।

  • ये भी पढ़े..

    डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि, अगले वर्ष उनके नाम पर बनेगा भव्य पार्क

    Share Add as a preferred…