
पटना/गया। बिहार में सोमवार की दोपहर कुदरत ने ऐसा कहर बरपाया कि हंसता-खेलता प्रदेश मातम में डूब गया। राज्य में सक्रिय हुई ‘काल वैशाखी’ की विनाशकारी आंधी, भारी बारिश और भीषण वज्रपात (ठनका) ने भारी तबाही मचाई है। सोमवार दोपहर बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों में आई इस आपदा में अब तक 26 लोगों की मौत होने की दुखद खबर सामने आई है। सबसे ज्यादा कहर वज्रपात ने बरपाया, जिसकी चपेट में आने से 8 बच्चों समेत 18 लोगों की जान चली गई। वहीं, 8 अन्य लोगों की मौत तेज आंधी के दौरान दीवार गिरने या भारी पेड़ों के नीचे दबने से हुई है। आपदा का यह मंजर इतना भयावह था कि महज एक घंटे के भीतर जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। भागलपुर से लेकर चंपारण तक सड़कों पर मलबे का ढेर लग गया और बिजली के बुनियादी ढांचे को अपूरणीय क्षति पहुँची है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए ‘तात्कालिक अलर्ट’ जारी करते हुए लोगों को घरों में रहने की सलाह दी है।
मौत का आंकड़ा: वज्रपात और दीवार गिरने से मची तबाही
सोमवार को आई इस आपदा ने राज्य के कई जिलों में एक साथ प्रहार किया। मौत के आंकड़ों ने प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं:
कारण | मौतें | विवरण |
|---|---|---|
वज्रपात (ठनका) | 18 | इसमें 8 मासूम बच्चे भी शामिल हैं। |
दीवार/पेड़ गिरना | 08 | बाढ़ और अन्य क्षेत्रों में मलबे में दबने से मौत। |
कुल योग | 26 | पूरे राज्य से प्राप्त अब तक की रिपोर्ट। |
जिलावार रिपोर्ट: गया में सबसे ज्यादा 7 मौतें
प्रकृति का सबसे क्रूर चेहरा गया जिले में देखने को मिला, जहाँ 7 लोगों की जिंदगी खत्म हो गई।
- गया: यहाँ शेरघाटी में आम चुनने गए 3 बच्चों की आकाशीय बिजली गिरने से मौके पर ही मौत हो गई। इसके अलावा गुरारू के धानु बिगहा, गुरुआ के बुधुआचक और वजीरगंज में खेत में काम कर रहे किसान ठनका की चपेट में आ गए।
- औरंगाबाद: यहाँ 2 बच्चों समेत 4 लोगों की मौत हुई है।
- पूर्वी चंपारण: यहाँ ठनका गिरने से 3 लोगों की जान गई, जिनमें सुगौली के कैथवलिया की 8 वर्षीय अंशु कुमारी और 15 वर्षीय शनिदेवल तथा रामगढ़वा की 5 साल की मासूम बच्ची शामिल है।
- रोहतास (डेहरी): पहलेजा में कोयला पोड़ा में काम कर रहे 5 मजदूरों पर बिजली गिरी, जिसमें 1 मजदूर की मौत हो गई।
- अन्य जिले: भोजपुर (सहार), गोपालगंज, वैशाली और नालंदा में भी 1-1 व्यक्ति की मौत हुई है। वैशाली के पटेढ़ी बेलसर में एक 60 वर्षीय बुजुर्ग की बरगद के पेड़ के नीचे दबकर मौत हो गई।
गोपालगंज में बिजली ढांचा ध्वस्त, खेतों में ‘सफेद सोना’ बर्बाद
आंधी की रफ्तार इतनी तेज थी कि बुनियादी सुविधाओं के परखच्चे उड़ गए। सबसे ज्यादा नुकसान गोपालगंज जिले में दर्ज किया गया है:
- 70 बिजली के पोल उखड़कर गिर गए।
- 12 ट्रांसफर्मर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे जिले के बड़े हिस्से में बिजली की आपूर्ति ठप है।
- खेतों में तैयार खड़ी गरमा मक्के की फसल जमीन पर बिछ गई है, जिससे किसानों को लाखों का नुकसान हुआ है।
- पटना समेत 10 जिलों में फूस के घर और कच्चे मकान ध्वस्त हो गए हैं, जिससे कई परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए हैं।
पटना में छाया अंधेरा: 70 किमी की रफ्तार से चली हवाएं
राजधानी पटना में सोमवार की शाम किसी डरावने मंजर से कम नहीं थी। शाम 4 बजे ही घने काले बादलों ने सूरज को ढंक लिया और सड़कों पर अंधेरा पसर गया।
- रफ्तार: आंधी की रफ्तार 60 से 70 किमी प्रतिघंटा दर्ज की गई।
- दृश्यता: घने बादलों और बारिश के कारण विजिबिलिटी इतनी कम हो गई कि गाड़ियों को हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा।
- अवरोध: शहर के विभिन्न इलाकों में दर्जनों पेड़ गिरने से यातायात घंटों बाधित रहा और लोग जहाँ-तहाँ फंसे रहे।
मौसम विभाग की चेतावनी: अभी टला नहीं है खतरा
मौसम विभाग के अनुसार, बिहार में बादलों की सक्रियता अभी बनी हुई है।
”अगले दो दिनों तक राज्य भर में गरज-तड़क के साथ बारिश की प्रबल संभावना है। भीषण वज्रपात का तात्कालिक अलर्ट जारी किया गया है। लोग खराब मौसम के दौरान पेड़ों के नीचे या खुले मैदानों में न जाएं।”
प्रशासन ने सभी जिलाधिकारियों को मुस्तैद रहने और आपदा प्रभावित परिवारों को तत्काल सरकारी सहायता (अनुग्रह अनुदान) पहुँचाने का निर्देश दिया है। वज्रपात से बचाव के लिए लोगों को सुरक्षा मानकों का पालन करने की सख्त हिदायत दी गई है।


