
भागलपुर: विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद जहां एक ओर सड़क मार्ग पूरी तरह ठप हो गया है, वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन ने आम जनता की परेशानी को कम करने के लिए अब गंगा नदी के जलमार्ग को अस्थायी विकल्प के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाया है। इसी कड़ी में जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने सोमवार को अधिकारियों की टीम के साथ गंगा नदी का विस्तृत निरीक्षण किया।
यह निरीक्षण बरारी घाट से शुरू होकर महादेवपुर घाट तक मोटर बोट के जरिए किया गया, ताकि जलमार्ग से यातायात संचालन की संभावनाओं का आकलन किया जा सके और लोगों को सुरक्षित एवं व्यवस्थित आवागमन की सुविधा दी जा सके।
जलमार्ग को बनाया जाएगा अस्थायी विकल्प
निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी ने बताया कि विक्रमशिला सेतु के बंद होने से भागलपुर और नवगछिया के बीच रोजाना आने-जाने वाले हजारों लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए गंगा नदी के रास्ते जल परिवहन को एक प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रशासन की योजना है कि आम लोगों को सुरक्षित, सुलभ और व्यवस्थित तरीके से नदी पार कराई जाए।
सुबह 5 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी नाव सेवा
जिलाधिकारी ने जानकारी दी कि सरकारी स्तर पर निःशुल्क नाव सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। यह सेवा प्रतिदिन सुबह 5:00 बजे से लेकर शाम 5:00 बजे तक संचालित होगी।
इसके अलावा पंजीकृत निजी नावों को भी परिचालन की अनुमति दी जाएगी, लेकिन उनके लिए किराया जिला प्रशासन द्वारा निर्धारित किया जाएगा, ताकि यात्रियों से मनमानी वसूली न हो सके।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम नागरिकों को सस्ती और सुरक्षित यात्रा सुविधा मिल सके।
घाटों पर होगी बेहतर व्यवस्था
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि केवल नाव सेवा शुरू करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि घाटों पर भी समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
इसके तहत घाटों पर प्रकाश (लाइटिंग) की व्यवस्था, बैरिकेडिंग, पेयजल सुविधा, चिकित्सा सेवाएं और सुरक्षा बल की तैनाती की जाएगी।
यह कदम यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है।
नावों पर गोताखोर और सुरक्षा के इंतजाम
नदी पार कराने के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचाव के लिए प्रशासन ने नावों पर गोताखोरों की तैनाती का भी निर्णय लिया है।
इसके अलावा प्रत्येक नाव पर यात्रियों की अधिकतम क्षमता स्पष्ट रूप से अंकित की जाएगी और सख्ती से इसका पालन कराया जाएगा।
जिलाधिकारी ने लोगों से अपील की है कि वे क्षमता से अधिक संख्या में नाव पर सवार न हों, क्योंकि इससे दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।
पुलिस और प्रशासन की संयुक्त निगरानी
इस पूरे अभियान की निगरानी जिला प्रशासन और पुलिस संयुक्त रूप से करेंगे। घाटों पर पुलिस बल की तैनाती रहेगी, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और किसी भी तरह की अव्यवस्था को रोका जा सके।
इस दौरान वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव, उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह और नगर आयुक्त किसलय कुशवाहा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे और उन्होंने भी निरीक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाई।
आम जनता से सहयोग की अपील
जिलाधिकारी ने आम लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि यह व्यवस्था अस्थायी है और सभी की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि यदि लोग नियमों का पालन करेंगे, तो यह व्यवस्था सफल होगी और सभी को राहत मिलेगी।
विक्रमशिला सेतु बंद होने का व्यापक असर
गौरतलब है कि विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
यह सेतु उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली प्रमुख कड़ी है, जिससे रोजाना हजारों लोग आवागमन करते हैं। इसके बंद होने से न केवल यातायात, बल्कि व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ा है।
प्रशासन की त्वरित पहल
ऐसे समय में जिला प्रशासन द्वारा जलमार्ग को वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में विकसित करने की पहल को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यह न केवल लोगों की तत्काल समस्या का समाधान करेगा, बल्कि भविष्य में भी इस तरह की आपात स्थितियों से निपटने के लिए एक मॉडल के रूप में काम कर सकता है।
विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद उत्पन्न संकट के बीच जिला प्रशासन की यह पहल राहत देने वाली साबित हो सकती है।
हालांकि यह व्यवस्था अस्थायी है, लेकिन यदि इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो हजारों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस योजना को कितनी तेजी और प्रभावशीलता के साथ जमीन पर उतार पाता है और आम जनता को कितनी सुविधा मिलती है।


