राष्ट्रीय लोक अदालत: सीजेएम ने थाना प्रभारियों को दिए सख्त निर्देश, 6 मई तक नोटिस तामिला कराने का अल्टीमेटम

भागलपुर। आगामी 9 मई 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों को लेकर भागलपुर में न्यायिक प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। इसी क्रम में शनिवार, 2 मई को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) श्री राज कपूर और जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) के प्रभारी सचिव श्री राजेश रंजन ने जिले के सभी थाना प्रभारियों को स्पष्ट और सख्त निर्देश जारी किए।

इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि लोक अदालत में सूचीबद्ध सभी मामलों के पक्षकारों तक समय पर नोटिस पहुंचे, ताकि वे निर्धारित तिथि पर उपस्थित होकर अपने मामलों का समाधान कर सकें।

6 मई तक नोटिस तामिला कराने का अल्टीमेटम

बैठक के दौरान सीजेएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सभी थाना प्रभारी अपने-अपने क्षेत्र में लंबित मामलों से जुड़े नोटिसों का तामिला हर हाल में 6 मई 2026 तक पूरा कर लें। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि नोटिस की तामिला के बाद उसकी रिपोर्ट तुरंत जिला विधिक सेवा प्राधिकार या संबंधित न्यायालय में जमा कराई जाए।

उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इस कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि न्याय वितरण की पहली और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।

न्यायिक प्रशासन की सीधी निगरानी

जिला विधिक सेवा प्राधिकार के प्रभारी सचिव श्री राजेश रंजन ने बैठक में पुलिस पदाधिकारियों को बताया कि इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी स्वयं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा की जा रही है।

उन्होंने कहा कि यदि पक्षकारों को समय पर सूचना नहीं मिलेगी, तो वे लोक अदालत में उपस्थित नहीं हो पाएंगे, जिससे मामलों के निपटारे की प्रक्रिया प्रभावित होगी। इसलिए नोटिस की तामिला को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

लोक अदालत का उद्देश्य और महत्व

राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन न्याय प्रणाली को सरल, सुलभ और त्वरित बनाने के उद्देश्य से किया जाता है। इसमें आपसी सहमति से मामलों का निपटारा किया जाता है, जिससे लंबी कानूनी प्रक्रिया और खर्च से बचा जा सकता है।

लोक अदालत विशेष रूप से उन मामलों के लिए उपयोगी होती है, जो वर्षों से लंबित हैं और जिनका समाधान बातचीत और समझौते के माध्यम से संभव है। इसमें सिविल मामले, पारिवारिक विवाद, बैंक रिकवरी, मोटर वाहन चालान और अन्य छोटे-मोटे विवाद शामिल होते हैं।

अधिक से अधिक मामलों के निपटारे का लक्ष्य

इस बार की लोक अदालत को लेकर प्रशासन का लक्ष्य है कि अधिकतम संख्या में मामलों का निपटारा किया जाए। अधिकारियों का मानना है कि यदि नोटिस समय पर पहुंच जाएं, तो बड़ी संख्या में लोग अपने मामलों को सुलझाने के लिए आगे आएंगे।

पिछले वर्षों के अनुभव के आधार पर यह देखा गया है कि समय पर सूचना मिलने से लोक अदालत की सफलता दर काफी बढ़ जाती है। इसी कारण इस बार नोटिस तामिला पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

पुलिस प्रशासन की भूमिका अहम

इस पूरी प्रक्रिया में पुलिस प्रशासन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि नोटिस की तामिला का कार्य सीधे तौर पर थाना स्तर पर ही किया जाता है।

बैठक में पुलिस अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दें और यह सुनिश्चित करें कि प्रत्येक नोटिस संबंधित व्यक्ति तक पहुंचे। इसके लिए आवश्यक हो तो विशेष टीम भी गठित की जा सकती है।

लापरवाही पर होगी कार्रवाई

अधिकारियों ने यह भी साफ कर दिया कि यदि किसी थाना क्षेत्र में नोटिस तामिला में लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि कोई भी अधिकारी इस कार्य को हल्के में न ले और पूरी जिम्मेदारी के साथ इसे समय पर पूरा करे।

आम जनता को क्या होगा फायदा

इस पूरी प्रक्रिया का सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा। जब लोगों को समय पर नोटिस मिलेगा, तो वे लोक अदालत में उपस्थित होकर अपने मामलों का समाधान कर पाएंगे।

इससे उन्हें न केवल समय और पैसे की बचत होगी, बल्कि लंबे समय से चल रहे विवादों से भी छुटकारा मिलेगा। लोक अदालत एक ऐसा मंच है, जहां बिना किसी जटिल प्रक्रिया के न्याय प्राप्त किया जा सकता है।

पारदर्शिता और भरोसे की दिशा में कदम

न्यायिक प्रशासन की यह पहल न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जब प्रशासन और पुलिस मिलकर काम करते हैं, तो न्याय प्रक्रिया अधिक प्रभावी और विश्वसनीय बनती है।

भागलपुर में राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारी को लेकर जिस तरह से सख्त निर्देश दिए गए हैं, उससे साफ है कि प्रशासन इस बार इसे पूरी गंभीरता से ले रहा है।

6 मई तक नोटिस तामिला का अल्टीमेटम और उसकी सख्त निगरानी यह सुनिश्चित करेगी कि अधिक से अधिक लोग लोक अदालत में शामिल हो सकें और अपने मामलों का समाधान कर सकें।

अब यह जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की है कि वे इस निर्देश का पालन करते हुए न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने में अपना योगदान दें। वहीं आम जनता के लिए यह एक सुनहरा अवसर है कि वे 9 मई को लोक अदालत में पहुंचकर अपने लंबित मामलों से छुटकारा पाएं।

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