बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार की तारीख तय! दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात करेंगे सीएम सम्राट चौधरी

पटना, 2 मई 2026। बिहार की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है और इसकी सबसे बड़ी वजह है प्रस्तावित मंत्रिमंडल विस्तार। मुख्यमंत्री शनिवार शाम दिल्ली के लिए रवाना होने वाले हैं, जहां उनकी मुलाकात केंद्रीय गृह मंत्री से होने की संभावना है। इस दौरे को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसी बैठक में बिहार कैबिनेट विस्तार को लेकर अंतिम रूप दिया जा सकता है।

जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री शाम करीब 6:30 बजे पटना से दिल्ली के लिए रवाना होंगे। दिल्ली में वे न केवल अमित शाह से मुलाकात करेंगे, बल्कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ भी महत्वपूर्ण राजनीतिक चर्चा करेंगे। इस मुलाकात में मंत्रियों के नाम, विभागों का बंटवारा और सहयोगी दलों के बीच संतुलन जैसे मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श होने की संभावना है।

दिल्ली रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री से उनके 7 सर्कुलर रोड स्थित आवास पर मुलाकात की। इस बैठक को भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच मंत्रिमंडल विस्तार की रूपरेखा, सहयोगी दलों की भागीदारी और राजनीतिक समीकरणों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान उप मुख्यमंत्री विजय चौधरी भी मौजूद रहे, जिससे यह संकेत मिलता है कि सरकार के शीर्ष स्तर पर सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

गौरतलब है कि 15 अप्रैल 2026 को सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके साथ विजय चौधरी और विजेंद्र यादव को उप मुख्यमंत्री बनाया गया था। फिलहाल राज्य मंत्रिमंडल सीमित आकार में काम कर रहा है और विस्तार की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। ऐसे में यह विस्तार सरकार के कामकाज को गति देने और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए अहम माना जा रहा है।

बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार की तारीख तय! दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात करेंगे सीएम सम्राट चौधरी

सूत्रों की मानें तो बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार 4 मई के बाद कभी भी हो सकता है। दरअसल, पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद राजनीतिक स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी, जिसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। माना जा रहा है कि दिल्ली में होने वाली बैठक के बाद मंत्रियों के नामों पर अंतिम मुहर लग जाएगी।

नए मंत्रिमंडल की संभावित संरचना को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। बताया जा रहा है कि भाजपा और जदयू के लगभग 16-16 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा सहयोगी दलों को भी प्रतिनिधित्व देने की योजना है। लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) से दो मंत्रियों को जगह मिल सकती है, जबकि हम (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) और रालोमो (राष्ट्रीय लोक मोर्चा) से एक-एक मंत्री को शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इस तरह गठबंधन के सभी प्रमुख घटकों को संतुलित प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मंत्रिमंडल विस्तार केवल प्रशासनिक आवश्यकता नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण है। इससे आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की जाएगी। जातीय समीकरण, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और पार्टी संगठन के वरिष्ठ नेताओं को संतुष्ट करना भी इस विस्तार का प्रमुख उद्देश्य होगा।

इस बीच, दिल्ली में पहले से मौजूद जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की मौजूदगी भी इस प्रक्रिया को और महत्वपूर्ण बना रही है। माना जा रहा है कि एनडीए के घटक दलों के बीच सीट बंटवारे और मंत्री पदों को लेकर समन्वय बनाने की दिशा में लगातार बातचीत जारी है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की यह दिल्ली यात्रा इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले भी वे प्रधानमंत्री और भाजपा नेतृत्व से मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन उस समय अमित शाह से मुलाकात नहीं हो पाई थी। अब इस बार की बैठक को अंतिम और निर्णायक माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, बिहार में होने वाला यह मंत्रिमंडल विस्तार राज्य की राजनीति में नया संतुलन स्थापित कर सकता है। इससे न केवल सरकार के कामकाज में तेजी आएगी, बल्कि गठबंधन के भीतर सामंजस्य भी मजबूत होगा। आने वाले दिनों में इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी, क्योंकि यह विस्तार बिहार की राजनीति की दिशा और दशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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