“जब तक बेटियां घर नहीं लौटेंगी, पुलिस जागती रहेगी” — नालंदा में सीएम सम्राट का बड़ा बयान

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नालंदा दौरे के दौरान एक अहम संदेश देते हुए कहा कि राज्य में बेटियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और जब तक बेटियां स्कूल और कॉलेज से सुरक्षित घर नहीं लौट जातीं, तब तक पुलिस सतर्क और सक्रिय रहेगी। उनका यह बयान न सिर्फ सुरक्षा को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि समाज में भरोसा और सुरक्षा का माहौल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को नालंदा जिले के परनावा गांव पहुंचे, जहां उन्होंने श्री शरण निवास बाबा महतो साहब की जन्मस्थली पर आयोजित राजकीय मेले का उद्घाटन किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने जनता को संबोधित करते हुए राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं, विकास कार्यों और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की।

अपने संबोधन में उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में कोई समझौता नहीं करेगी और पुलिस प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे पूरी सतर्कता के साथ कार्य करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों की सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है, और इसमें सभी को सहयोग करना होगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि 19 मई से राज्य के हर पंचायत में अधिकारी बैठेंगे और लोगों की समस्याओं को सुनकर उनका समाधान करेंगे। यह पहल ग्रामीण स्तर पर प्रशासनिक पहुंच को मजबूत करने और लोगों की शिकायतों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए भटकना न पड़े और उन्हें अपने ही पंचायत स्तर पर सुविधा मिले।

अपने भाषण में सम्राट चौधरी ने राज्य के विकास के विजन को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि वे पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विकास कार्यों को आगे बढ़ाएंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में बिहार को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में विकास की गति को और तेज किया जाएगा, ताकि राज्य देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सके।

मुख्यमंत्री ने शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में भी बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के हर जिले में मॉडल स्कूल स्थापित किए जाएंगे, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके। इसके साथ ही उन्होंने वर्ष 2030 तक बिहार के एक करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार देने का लक्ष्य दोहराया। उन्होंने कहा कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

नालंदा कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री गयाजी के लिए रवाना हो गए, जहां वे भगवान बुद्ध के दर्शन करेंगे और बोधगया कॉरिडोर का निरीक्षण करेंगे। उनके इस दौरे को लेकर प्रशासन ने पहले से ही व्यापक तैयारियां कर रखी थीं। एयरपोर्ट से लेकर बोधगया तक सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए थे।

इससे पहले मुख्यमंत्री ने पटना में भगवान बुद्ध की जयंती के अवसर पर बुद्ध स्मृति पार्क में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया था। वहां उन्होंने भगवान बुद्ध की प्रतिमा, बोधिवृक्ष और श्रीलंका से लाए गए पवित्र वृक्ष की पूजा-अर्चना की। इस दौरान बौद्ध भंते द्वारा विधिवत पूजा कराई गई।

समग्र रूप से देखा जाए तो मुख्यमंत्री का यह दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। एक ओर उन्होंने सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में भाग लेकर समाज से जुड़ाव दिखाया, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार और प्रशासनिक सुधार जैसे मुद्दों पर स्पष्ट संदेश देकर सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखा। खासकर बेटियों की सुरक्षा को लेकर दिया गया उनका बयान लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है और इसे एक मजबूत राजनीतिक और सामाजिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

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