पीरपैंती थर्मल पावर प्रोजेक्ट को ‘पावरफुल’ रफ्तार: 1020 एकड़ जमीन का निबंधन शुल्क पूरी तरह माफ; ₹1 की लीज पर बिहार में बिजली क्रांति की तैयारी

भागलपुर/पटना। बिहार को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बुधवार, 29 अप्रैल 2026 को आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में भागलपुर जिले के पीरपैंती में प्रस्तावित थर्मल पावर परियोजना को लेकर कई बड़े और निर्णायक फैसलों पर मुहर लगाई गई है। सरकार ने इस महापरियोजना के मार्ग में आने वाली प्रशासनिक और वित्तीय बाधाओं को दूर करते हुए न केवल भारी-भरकम जमीन के हस्तांतरण को मंजूरी दी है, बल्कि निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए टैक्स और फीस के मोर्चे पर भी अभूतपूर्व छूट प्रदान की है। इस निर्णय से यह साफ हो गया है कि पीरपैंती का यह पावर प्लांट अब केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि धरातल पर बिजली पैदा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।

1020 एकड़ जमीन के हस्तांतरण पर 100% टैक्स छूट

​कैबिनेट की बैठक में सबसे महत्वपूर्ण फैसला पीरपैंती थर्मल पावर परियोजना के लिए अधिग्रहीत की गई 1020.60 एकड़ भूमि के हस्तांतरण को लेकर लिया गया है। ऊर्जा विभाग के संकल्प के आलोक में, इस विशाल भू-भाग को बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड (BSPGCL) को हस्तांतरित किया जाना है। सामान्य तौर पर इतनी बड़ी जमीन के हस्तांतरण और लीज दस्तावेजों के निबंधन (रजिस्ट्रेशन) पर करोड़ों रुपये का मुद्रांक (Stamp Duty) और निबंधन शुल्क लगता है, लेकिन औद्योगिक विकास को प्राथमिकता देते हुए कैबिनेट ने इस पर शत-प्रतिशत छूट देने का निर्णय लिया है।

​इसका सीधा अर्थ यह है कि पावर जेनरेशन कंपनी को इस जमीन के कानूनी कागजात तैयार करने के लिए राज्य सरकार को कोई भी शुल्क नहीं देना होगा। यह कदम परियोजना की शुरुआती लागत (Capital Expenditure) को कम करने में सहायक सिद्ध होगा। सरकार का मानना है कि इस तरह की वित्तीय रियायतें बड़ी परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए आवश्यक हैं।

33 वर्षों के लिए महज ₹1 वार्षिक की सांकेतिक लीज

​परियोजना को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए एक और चौंकाने वाला निर्णय लिया गया है। ऊर्जा विभाग द्वारा इस 1020.60 एकड़ जमीन का उपयोग करने के लिए बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कम्पनी लिमिटेड के साथ जो समझौता किया गया है, उसके तहत यह जमीन 33 वर्षों की लंबी अवधि के लिए लीज पर दी गई है। इस लीज की सबसे खास बात इसकी दर है; कंपनी को इस बेशकीमती जमीन के लिए सरकार को मात्र 01 (एक) रुपया प्रतिवर्ष की सांकेतिक दर पर भुगतान करना होगा।

​यह निर्णय दर्शाता है कि सरकार का मुख्य उद्देश्य जमीन से राजस्व कमाना नहीं, बल्कि उस जमीन पर बिजली संयंत्र स्थापित कर पूरे प्रदेश को रोशन करना है। 33 साल की यह लंबी लीज कंपनी को स्थिरता प्रदान करेगी, जिससे वे संयंत्र की स्थापना और तकनीकी ढांचा खड़ा करने पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।

12.54 एकड़ सरकारी जमीन ‘फ्री’ में हस्तांतरित

​मुख्य अधिग्रहीत भूमि के अलावा, कैबिनेट ने परियोजना के विस्तार और सहायक इकाइयों की स्थापना के लिए 12.54 एकड़ अतिरिक्त ‘बिहार सरकार सर्वसाधारण’ (सार्वजनिक) भूमि को भी ऊर्जा विभाग को सौंपने का निर्णय लिया है। यह हस्तांतरण ‘निःशुल्क अन्तर्विभागीय स्थायी हस्तान्तरण’ के रूप में स्वीकृत किया गया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, इस जमीन का विवरण निम्नलिखित है:

  • मौजा हरिणकोल (थाना संख्या-81): यहाँ के खाता संख्या-685 के विभिन्न खेसरा के अंतर्गत कुल 11.69 एकड़ भूमि को स्थानांतरित किया गया है।
  • मौजा सिरमतपुर (थाना संख्या-78): यहाँ के खाता संख्या-2650 और खेसरा संख्या-4473 के अंतर्गत आने वाली 0.85 एकड़ भूमि को परियोजना में शामिल किया गया है।

​इन दोनों मौजों को मिलाकर कुल 12.54 एकड़ जमीन अब आधिकारिक तौर पर थर्मल पावर परियोजना का हिस्सा बन गई है। निःशुल्क हस्तांतरण के कारण ऊर्जा विभाग पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।

औद्योगीकरण और रोजगार: बिहार के विकास का नया इंजन

​कैबिनेट की बैठक के दौरान इस परियोजना के सामाजिक और आर्थिक महत्व पर भी विस्तृत चर्चा की गई। सरकार ने स्पष्ट किया कि पीरपैंती थर्मल पावर परियोजना महज एक बिजली संयंत्र नहीं है, बल्कि यह भागलपुर और आसपास के जिलों के लिए रोजगार सृजन का एक बड़ा केंद्र बनेगा।

  1. स्थानीय रोजगार: संयंत्र के निर्माण और बाद में इसके संचालन (Operation and Maintenance) के दौरान हजारों तकनीकी और गैर-तकनीकी कर्मियों की आवश्यकता होगी, जिससे स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा।
  2. विद्युत आपूर्ति की स्थिरता: राज्य में तेजी से बढ़ रहे उद्योगों की मांग को पूरा करने के लिए अपनी बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाना अनिवार्य है। यह संयंत्र राज्य की अपनी विद्युत आपूर्ति को सुनिश्चित करेगा, जिससे बाहरी ग्रिडों पर निर्भरता कम होगी।
  3. औद्योगिक इकोसिस्टम: बिजली की सुलभता बढ़ने से भागलपुर और आसपास के इलाकों में छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) के फलने-फूलने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

प्रशासनिक सक्रियता और आगामी चुनौतियां

​कैबिनेट के अपर मुख्य सचिव ने बैठक के बाद बताया कि पीरपैंती थर्मल पावर प्रोजेक्ट राज्य की प्राथमिकताओं में शामिल है। जमीन से जुड़े इन फैसलों के बाद अब बिजली उत्पादन कंपनी के पास वह कानूनी और भौतिक आधार तैयार है, जिसके दम पर वे अंतरराष्ट्रीय निविदाएं (International Tenders) जारी कर सकेंगी और तकनीकी साझेदारों के साथ काम शुरू कर सकेंगी।

​हालांकि, इतनी बड़ी परियोजना के लिए पर्यावरण संबंधी मंजूरियां और कोयला लिंकेज (Coal Linkage) जैसे महत्वपूर्ण पड़ाव अभी बाकी हैं, लेकिन राज्य सरकार ने जमीन और टैक्स के मोर्चे पर जो ‘ग्रीन सिग्नल’ दिया है, उसने निवेशकों और विभाग के अधिकारियों में नया उत्साह भर दिया है। भागलपुर के पीरपैंती इलाके के लोगों के लिए भी यह एक बड़ी उम्मीद की किरण है, जो लंबे समय से इस औद्योगिक उन्नति का इंतजार कर रहे थे।

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