सुल्तानगंज नगर परिषद में खूनी खेल: अपराधियों ने ऑफिस में घुसकर दागी गोलियां; कार्यपालक पदाधिकारी की मौत, सभापति अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे

सुल्तानगंज/भागलपुर। बिहार के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया जब मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 की दोपहर अपराधियों ने सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय को गोलियों की गूँज से दहला दिया। दिनदहाड़े हुए इस दुस्साहसिक हमले में सुशासन के दावों की धज्जियां उड़ाते हुए अपराधियों ने सीधे व्यवस्था के दो सबसे महत्वपूर्ण चेहरों को निशाना बनाया। कार्यालय के भीतर घुसकर की गई अंधाधुंध फायरिंग में कार्यपालक पदाधिकारी (EO) कृष्ण भूषण की मौत हो गई है, जबकि नगर परिषद सभापति राजकुमार उर्फ गुड्डू को गंभीर स्थिति में भागलपुर रेफर किया गया है। वारदात के बाद पूरे सुल्तानगंज इलाके में दहशत का सन्नाटा पसरा हुआ है और नगर परिषद कार्यालय अब एक पुलिस छावनी के रूप में तब्दील हो चुका है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने इस खूनी वारदात को उस समय अंजाम दिया जब कार्यालय में एक सरकारी प्रक्रिया संपन्न हुई थी और सुरक्षा के सामान्य इंतजाम थे।

दहशत का तांडव: सरकारी दफ्तर बना कत्लगाह

​घटनाक्रम के अनुसार, मंगलवार दोपहर करीब 2:30 बजे नगर परिषद कार्यालय में सामान्य कामकाज चल रहा था। तभी एक बुलेट मोटरसाइकिल पर सवार होकर तीन नकाबपोश अपराधी कार्यालय परिसर में दाखिल हुए। किसी को भी यह आभास नहीं था कि ये युवक मौत का पैगाम लेकर आए हैं। अपराधी बिना किसी बाधा के सीधे कार्यपालक पदाधिकारी के चैंबर की ओर बढ़े।

​चैंबर में प्रवेश करते ही अपराधियों ने पिस्तौल निकाल ली और वहां मौजूद कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण और सभापति राजकुमार उर्फ गुड्डू पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाना शुरू कर दिया। गोलियों की आवाज सुनकर दफ्तर के कर्मचारी और वहां मौजूद आम लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। अपराधियों ने अपना लक्ष्य पूरी सटीकता से चुना था। हमले के बाद तीनों अपराधी हवा में हथियार लहराते हुए मौके से फरार हो गए।

नीलामी के बाद गूँजी गोलियां: साजिश के तार और विवाद

​नगर परिषद के भीतर हुई इस हत्या और खूनी हमले के पीछे एक बड़ी साजिश की बू आ रही है। जानकारी के अनुसार, वारदात से ठीक पहले कार्यालय में विज्ञापनों की डाक (नीलामी) की प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न हुई थी। अक्सर ऐसे सरकारी ठेकों और नीलामी की प्रक्रियाओं के पीछे स्थानीय माफिया और दबंगों का वर्चस्व रहता है।

​पुलिस इस कोण पर गंभीरता से जांच कर रही है कि क्या आज की नीलामी प्रक्रिया के किसी नतीजे से नाराज होकर अपराधियों ने इस जघन्य कांड को अंजाम दिया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि नीलामी के बाद माहौल शांत था, लेकिन अचानक हुई इस फायरिंग ने स्पष्ट कर दिया कि हमलावरों ने पूरी रेकी के बाद ही इस समय को चुना था। अधिकारियों को निशाना बनाना न केवल व्यक्तिगत रंजिश हो सकता है, बल्कि यह पूरे सरकारी तंत्र को डराने की एक सुनियोजित कोशिश भी नजर आती है।

एक अधिकारी की अंतिम यात्रा और सभापति की गंभीर स्थिति

​फायरिंग के तुरंत बाद घायल कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण और सभापति राजकुमार उर्फ गुड्डू को स्थानीय लोगों और सहकर्मियों की मदद से अस्पताल ले जाया गया। कार्यपालक पदाधिकारी के शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में गोलियां लगी थीं। अस्पताल ले जाने के क्रम में ही कृष्ण भूषण ने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने बताया कि अधिक रक्तस्राव होने के कारण उन्हें बचाना नामुमकिन था।

​वहीं, सभापति राजकुमार उर्फ गुड्डू की स्थिति भी अत्यंत नाजुक बनी हुई है। उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद तत्काल सुल्तानगंज से भागलपुर स्थित मायागंज (JLNMCH) अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार, उनके शरीर में भी कई गोलियां धंसी हुई हैं और अगले 24 घंटे उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण हैं। सभापति के समर्थकों और परिजनों की भारी भीड़ भागलपुर अस्पताल के बाहर जमा है, जहाँ सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ है।

पुलिस छावनी में तब्दील शहर: अपराधियों की तलाश में नाकेबंदी

​वारदात की सूचना मिलते ही भागलपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी दलबल के साथ सुल्तानगंज पहुँचे। पूरे नगर परिषद कार्यालय को सील कर दिया गया है।

  • एफएसएल (FSL) की जांच: फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने घटनास्थल से खोखे और अन्य भौतिक साक्ष्य जुटाए हैं।
  • सीसीटीवी फुटेज: पुलिस कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार और आसपास की सड़कों पर लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाल रही है ताकि अपराधियों के भागने के रास्ते और बुलेट के नंबर का पता लगाया जा सके।
  • छापेमारी अभियान: जिले की सीमाओं को सील कर दिया गया है और संदिग्ध ठिकानों पर सघन छापेमारी की जा रही है। विशेष जांच टीम (SIT) का गठन कर दिया गया है जो केवल इस हत्याकांड के पहलुओं की जांच करेगी।

प्रशासनिक तंत्र पर प्रहार: सुशासन के दावों के बीच दहशत

​एक सरकारी दफ्तर के भीतर घुसकर अधिकारी की हत्या करना यह दर्शाता है कि अपराधियों के मन में कानून का जरा भी खौफ नहीं बचा है। भागलपुर जिले में पिछले कुछ समय से अपराध की बढ़ती घटनाओं ने आम लोगों के साथ-साथ सरकारी सेवकों के मन में भी असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। सुल्तानगंज में हुई इस घटना ने स्थानीय बाजार और जनजीवन को पूरी तरह से ठप कर दिया है। लोग इस बात से आक्रोशित हैं कि अगर नगर परिषद जैसे व्यस्त और सरकारी दफ्तर सुरक्षित नहीं हैं, तो आम आदमी की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा?

​कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण के सहकर्मियों ने बताया कि वे एक कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी थे और विकास कार्यों को गति देने में जुटे थे। उनकी इस तरह हुई हत्या ने पूरे प्रशासनिक अमले को मर्माहत कर दिया है। विभागीय कर्मियों ने मांग की है कि जब तक दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं।

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