
पटना। बिहार के प्रशासनिक गलियारों में सोमवार को उस समय हलचल तेज हो गई जब सामान्य प्रशासन विभाग ने एक साथ 11 वरिष्ठ अधिकारियों के स्थानांतरण और नई तैनाती की अधिसूचना जारी कर दी। 28 अप्रैल 2026 की यह तिथि राज्य के राजस्व और भूमि सुधार क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि स्थानांतरित किए गए सभी अधिकारियों को विभिन्न जिलों में ‘बंदोबस्त पदाधिकारी’ (Settlement Officer) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब बिहार में भूमि सर्वेक्षण और डिजिटलीकरण का कार्य अपने निर्णायक दौर में है। सचिवालय के विभिन्न विभागों में विशेष कार्य पदाधिकारी (OSD) और उप सचिव के पदों पर तैनात अनुभवी अधिकारियों को अब सीधे फील्ड में उतारकर सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भूमि विवादों का निपटारा और सटीक बंदोबस्त उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
सचिवालय से जिलों की ओर: रणनीतिक स्थानांतरण का नया खाका
अधिसूचना के अनुसार, बिहार प्रशासनिक सेवा के इन 11 अधिकारियों को उनके वर्तमान विभागों से मुक्त कर नए जिलों में भेजा गया है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कई अधिकारियों को एक जिले की जिम्मेदारी के साथ-साथ पड़ोसी जिले का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। यह दर्शाता है कि विभाग कुछ जिलों को ‘क्लस्टर’ (समूह) के रूप में देख रहा है ताकि प्रशासनिक दक्षता बढ़ाई जा सके।
लघु जल संसाधन विभाग में विशेष कार्य पदाधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे पुरूषोत्तम को अब औरंगाबाद का बंदोबस्त पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। औरंगाबाद जैसे जिले में भूमि विवादों की संवेदनशीलता को देखते हुए पुरूषोत्तम का प्रशासनिक अनुभव वहां की नई व्यवस्थाओं को गति देने में सहायक हो सकता है। इसी क्रम में, सामान्य प्रशासन विभाग में विभागीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के रूप में तैनात किरण सिंह को जहानाबाद का बंदोबस्त पदाधिकारी बनाया गया है। किरण सिंह के पास एक बड़ी जिम्मेदारी यह भी होगी कि वे अरवल जिले के बंदोबस्त पदाधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगी। जहानाबाद और अरवल का भौगोलिक और सामाजिक परिवेश लगभग समान है, ऐसे में एक ही अधिकारी द्वारा दोनों जिलों की कमान संभालना नीतिगत समन्वय को आसान बनाएगा।
सीमांचल और कोसी क्षेत्र में तैनातियों का विशेष महत्व
बिहार के सीमावर्ती और कोसी क्षेत्रों में जमीन के रिकॉर्ड्स का संधारण हमेशा से एक चुनौती रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए सामान्य प्रशासन विभाग ने विनोद कुमार तिवारी को पूर्णियाँ का बंदोबस्त पदाधिकारी नियुक्त किया है। विनोद कुमार तिवारी, जो अब तक खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में विशेष कार्य पदाधिकारी थे, उन्हें पूर्णियाँ के साथ-साथ किशनगंज जिले के बंदोबस्त पदाधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। किशनगंज और पूर्णियाँ दोनों ही जिले पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे हैं और यहाँ ‘चकबंदी’ व ‘सर्वे’ के कार्यों में अत्यधिक पारदर्शिता की आवश्यकता है।
इसी तरह, खगड़िया के मूल निवासी बुद्ध प्रकाश, जो ग्रामीण कार्य विभाग में विशेष कार्य पदाधिकारी थे, उन्हें सुपौल का बंदोबस्त पदाधिकारी बनाया गया है। उनके पास सहरसा जिले का भी अतिरिक्त प्रभार रहेगा। कोसी क्षेत्र की इन दो महत्वपूर्ण इकाइयों का प्रभार एक ही अधिकारी को सौंपना बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भूमि के बदलते स्वरूप (दियारा क्षेत्र) और नए बंदोबस्त कार्यों को सुव्यवस्थित करने की एक कोशिश मानी जा रही है।
अधिकारियों की नई सूची और उनके कार्यक्षेत्र (विशेष विवरण)
सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना के आधार पर अधिकारियों के नए पदस्थापन का विवरण नीचे विस्तार से दिया जा रहा है:
- मो. नुरुल ऐन: अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के उप सचिव को अब बेगूसराय का बंदोबस्त पदाधिकारी बनाया गया है। उन्हें खगड़िया जिले का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। बेगूसराय के औद्योगिक बेल्ट और खगड़िया के दियारा क्षेत्रों में जमीन की पैमाइश का कार्य अब इनके जिम्मे होगा।
- पारुल प्रिया: सामान्य प्रशासन विभाग में लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के रूप में तैनात पारुल प्रिया को वैशाली का बंदोबस्त पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। वैशाली जैसे ऐतिहासिक और तेजी से विकसित हो रहे जिले में भूमि सुधार की बड़ी उम्मीदें उन पर टिकी होंगी।
- संजय कुमार राय: समाज कल्याण विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी को जमुई का बंदोबस्त पदाधिकारी बनाया गया है। जमुई के कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में बंदोबस्त कार्यों को सुचारू रूप से चलाना उनकी मुख्य चुनौती होगी।
- अखिलेश कुमार: श्रम संसाधन विभाग के उप सचिव को सारण (छपरा) का बंदोबस्त पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। सारण प्रमंडल के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में वहां के भूमि संबंधी आंकड़ों को अपडेट करना अखिलेश कुमार की प्राथमिकताओं में होगा।
फील्ड में अनुभवी अधिकारियों की घर वापसी: रोहतास, भोजपुर और लखीसराय का फेरबदल
सचिवालय से बाहर पहले से ही जिलों में तैनात अधिकारियों को भी नए जिलों में स्थानांतरित किया गया है ताकि व्यवस्था में किसी भी प्रकार की जड़ता न आए। रोहतास के बंदोबस्त पदाधिकारी नवीन कुमार को अब पड़ोसी जिले कैमूर का बंदोबस्त पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। नवीन कुमार ने रोहतास में जिस तरह से भूमि सर्वेक्षण के कार्यों को गति दी थी, सरकार अब उसी अनुभव का लाभ कैमूर की पहाड़ी और मैदानी जमीनों के प्रबंधन में उठाना चाहती है।
भोजपुर के बंदोबस्त पदाधिकारी नीरज कुमार दास को बक्सर भेजा गया है। बक्सर, जहाँ पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे और अन्य बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कारण जमीन की कीमतें और उससे जुड़े विवाद बढ़े हैं, वहां नीरज कुमार दास का अनुभव महत्वपूर्ण होगा। वहीं, लखीसराय के बंदोबस्त पदाधिकारी मो. मुस्तकीम को अब शेखपुरा के बंदोबस्त पदाधिकारी के पद पर पदस्थापित किया गया है। छोटे जिले होने के बावजूद लखीसराय और शेखपुरा में भूमि राजस्व के पुराने लंबित मामलों को सुलझाना मो. मुस्तकीम के लिए एक बड़ा लक्ष्य होगा।
प्रशासनिक विश्लेषण: क्यों जरूरी था यह बदलाव?
द वॉयस ऑफ बिहार के विशेष विश्लेषण के अनुसार, इन 11 अधिकारियों की नई तैनाती केवल एक रूटीन तबादला नहीं है।
- विशेष कार्य पदाधिकारी (OSD) की भूमिका: अधिकांश अधिकारी पटना के मुख्य विभागों में नीति निर्माण से जुड़े थे। उन्हें फील्ड में ‘बंदोबस्त पदाधिकारी’ बनाकर भेजने का अर्थ है कि सरकार अब योजनाओं के क्रियान्वयन (Execution) पर अधिक जोर दे रही है।
- अतिरिक्त प्रभार का बोझ और अवसर: अरवल, खगड़िया, सहरसा और किशनगंज जैसे जिलों को अतिरिक्त प्रभार में रखने का अर्थ है कि सरकार इन जिलों में फिलहाल नई नियुक्तियों के बजाय पुराने और परखे हुए अधिकारियों के नेतृत्व पर भरोसा कर रही है।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: लोक शिकायत निवारण विभाग से पारुल प्रिया और किरण सिंह जैसे अधिकारियों को भूमि विभाग में लाना यह संकेत देता है कि भूमि सुधारों में आने वाली जन-शिकायतों को सरकार अब अधिक संवेदनशीलता से निपटाना चाहती है।


