​दिल्ली में बिहार के दो लाल लहूलुहान: ‘बिहारी’ कहकर हेड कांस्टेबल ने मारी गोली; खगड़िया में मातम, पप्पू यादव ने मांगा इंसाफ

खगड़िया/दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने न केवल बिहार के खगड़िया जिले को शोक में डुबो दिया है, बल्कि प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और क्षेत्रीय अस्मिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खगड़िया जिले के गंगौर थाना क्षेत्र के रहने वाले दो युवक, जो अपने सुनहरे भविष्य और परिवार की आजीविका के लिए दिल्ली गए थे, वहां नफरत और हिंसा की भेंट चढ़ गए। मृतकों की पहचान पाण्डव कुमार और उनके एक साथी के रूप में हुई है। आरोप है कि दिल्ली पुलिस के ही एक रक्षक ने भक्षक की भूमिका निभाते हुए दोनों की गोली मारकर हत्या कर दी। इस दोहरे हत्याकांड की गूँज अब बिहार के राजनीतिक गलियारों में भी सुनाई दे रही है। मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को निर्दलीय सांसद पप्पू यादव पीड़ित परिवार के घर पहुँचे और इस बर्बरता के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार से कड़े सवाल पूछे।

रोजी-रोटी की तलाश और खौफनाक अंत: क्या है पूरा मामला?

​खगड़िया का गंगौर इलाका अपनी मेहनतकश आबादी के लिए जाना जाता है, जहाँ के युवा अक्सर रोजगार की तलाश में महानगरों का रुख करते हैं। पाण्डव कुमार और उनके मित्र भी इसी उम्मीद के साथ दिल्ली गए थे कि वहां पसीना बहाकर अपने बूढ़े मां-बाप और बच्चों का सहारा बनेंगे। लेकिन सोमवार की वह काली रात उनके जीवन का अंतिम सफर साबित हुई।

​परिजनों और वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली में एक मामूली बात को लेकर विवाद शुरू हुआ। इस विवाद में दिल्ली पुलिस का एक हेड कांस्टेबल शामिल था। आरोप है कि उस हेड कांस्टेबल ने अपनी वर्दी की हनक दिखाते हुए पाण्डव और उसके मित्र को केवल इसलिए अपमानित करना शुरू कर दिया क्योंकि वे बिहार से थे। परिजनों का दावा है कि आरोपी ने दोनों युवकों को अत्यंत आपत्तिजनक भाषा में “बिहारी” कहकर संबोधित किया और गालियां दीं। जब युवकों ने इस अपमान का विरोध किया, तो आक्रोशित पुलिसकर्मी ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर निकाली और उन पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। इस हमले में दोनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई।

पप्पू यादव का खगड़िया दौरा: पीड़ितों के आंसू और सांसद का आक्रोश

​घटना की जानकारी मिलते ही सांसद पप्पू यादव ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और बिना किसी देरी के सीधे खगड़िया के गंगौर थाना क्षेत्र स्थित पीड़ित परिवार के घर पहुँच गए। वहां का मंजर देखकर किसी का भी कलेजा कांप जाए; पाण्डव की माँ का रो-रोकर बुरा हाल था और गांव के लोग सन्न थे। पप्पू यादव ने परिजनों को गले लगाया, उन्हें ढांढस बंधाया और स्पष्ट किया कि वे इस लड़ाई में उनके साथ अकेले नहीं हैं।

​पप्पू यादव ने मौके पर मौजूद मीडिया और ग्रामीणों को संबोधित करते हुए इस घटना को बिहार की अस्मिता पर सीधा हमला करार दिया। उन्होंने कहा, “यह महज दो युवकों की हत्या नहीं है, बल्कि उस श्रम शक्ति और ईमानदारी का अपमान है जो बिहार के लोग दूसरे राज्यों के निर्माण में देते हैं। अगर रक्षक ही क्षेत्रीय नफरत पालकर गोलियां चलाने लगेंगे, तो लोकतंत्र में गरीब आदमी कहाँ सुरक्षित रहेगा?” सांसद ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस के कुछ तत्वों के मन में बिहारियों के प्रति जो द्वेष है, यह उसी का परिणाम है।

सरकार से बड़ी मांगें: “दोषी को मिले कड़ी सजा”

​सांसद पप्पू यादव ने इस मामले में किसी भी प्रकार की लीपापोती के खिलाफ चेतावनी दी है। उन्होंने प्रशासन और सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:

  1. उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच: मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए ताकि दिल्ली पुलिस अपने कर्मी को बचाने की कोशिश न कर सके।
  2. फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई: अपराधियों को त्वरित सजा दिलाने के लिए इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो और आरोपी हेड कांस्टेबल को फांसी या उम्रकैद जैसी कड़ी सजा मिले।
  3. मुआवजा और नौकरी: पीड़ित परिवार चूंकि गरीब और मजदूर वर्ग से है, इसलिए सरकार उन्हें उचित वित्तीय मुआवजा दे और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान की जाए।
  4. सुरक्षा की गारंटी: दिल्ली और अन्य महानगरों में काम करने वाले बिहार के प्रवासियों के लिए एक विशेष हेल्पलाइन और सुरक्षा तंत्र विकसित किया जाए।

​पप्पू यादव ने राज्य के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से भी अपील की है कि वे दिल्ली सरकार और गृह मंत्रालय पर दबाव बनाएं ताकि दोषियों को बख्शा न जाए। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वे इस मुद्दे को संसद में भी उठाएंगे।

क्षेत्रीय भेदभाव और प्रवासियों की सुरक्षा: एक कड़वा सच

​यह घटना एक बार फिर उस कड़वे सच को उजागर करती है जिसे अक्सर फाइलों में दबा दिया जाता है—वह है प्रवासी मजदूरों के प्रति बढ़ती नफरत और भेदभाव। बिहार के लोग दिल्ली, पंजाब, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के राज्यों में रीढ़ की हड्डी की तरह काम करते हैं, लेकिन उन्हें अक्सर ‘बिहारी’ जैसे शब्दों से नीचा दिखाने की कोशिश की जाती है।

​पप्पू यादव ने तीखे लहजे में सवाल उठाया कि “आखिर कब तक हमारे प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अभाव में बाहर जाकर गालियां और गोलियां खानी पड़ेंगी?” उन्होंने बिहार सरकार पर भी कटाक्ष किया कि यदि राज्य में ही पर्याप्त उद्योग और रोजगार के अवसर होते, तो पाण्डव जैसे युवाओं को दिल्ली की सड़कों पर अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती। यह घटना केवल एक हत्या का मामला नहीं है, बल्कि यह बिहार की गिरती अर्थव्यवस्था और पलायन की त्रासदी का एक और अध्याय है।

गांव में शोक का माहौल और कानूनी कार्यवाही

​खगड़िया के गंगौर में फिलहाल सन्नाटा पसरा हुआ है। पाण्डव कुमार के शव का पोस्टमार्टम दिल्ली में ही किया गया है और उसे बिहार लाने की प्रक्रिया चल रही है। गांव के लोगों में दिल्ली पुलिस के खिलाफ भारी आक्रोश है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी मांग की है कि खगड़िया जिला प्रशासन को इस मामले में दिल्ली पुलिस के साथ निरंतर समन्वय बनाकर पल-पल की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।

​दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि आरोपी हेड कांस्टेबल को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी गई है। हालांकि, पुलिस के आधिकारिक बयान में अभी ‘नस्लीय या क्षेत्रीय टिप्पणी’ के कोण की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन परिजनों के बयान और पप्पू यादव के हस्तक्षेप के बाद इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है।

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