पूर्णिया में बड़ा बैंक घोटाला: 300 खातों से करीब 3 करोड़ की निकासी, आक्रोशित ग्रामीणों ने किया सड़क जाम

पूर्णिया। बिहार के पूर्णिया जिले के रौटा थाना क्षेत्र अंतर्गत शीशाबाड़ी गांव से बैंकिंग व्यवस्था को झकझोर देने वाला एक बड़ा घोटाला सामने आया है। आरोप है कि एक कॉमन सर्विस पॉइंट (CSP) संचालक और बैंक कर्मियों की मिलीभगत से सैकड़ों खाताधारकों, विशेषकर महिलाओं के खातों से करीब 3 करोड़ रुपये की अवैध निकासी कर ली गई। इस घटना के उजागर होते ही इलाके में भारी आक्रोश फैल गया और सैकड़ों ग्रामीण सड़क पर उतर आए।

गुस्साए ग्रामीणों ने रौटा स्थित सेंट्रल बैंक के समीप बहादुरगंज-बायसी स्टेट हाईवे को जाम कर दिया और जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बैंक प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की तथा दोषियों की गिरफ्तारी और पैसे की वापसी की मांग की।

पीड़ितों के अनुसार अब तक करीब 278 महिलाओं के खातों से लगभग 3 करोड़ रुपये की ठगी की पुष्टि हो चुकी है। यह आंकड़ा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि कई अन्य लोग भी अपने खातों की जांच कर रहे हैं।

घोटाले की शिकार एक महिला, सुबांगी बेगम ने बताया कि उनके खाते से ही 14 लाख 57 हजार रुपये की अवैध निकासी कर ली गई। उन्होंने कहा कि जब उन्हें इस बात का पता चला तो वे लगातार बैंक और संबंधित अधिकारियों के पास शिकायत लेकर गईं, लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी।

“हम बार-बार बैंक गए, आवेदन दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। हमें बस टाल दिया गया,” उन्होंने आरोप लगाया।

ग्रामीणों का कहना है कि इस पूरे घोटाले में गांव के ही CSP संचालक जुबैर आलम, उनके पुत्र इंतेसार आलम, रौटा स्थित सेंट्रल बैंक के मैनेजर रमण महतो और अन्य बैंक कर्मियों की मिलीभगत है। आरोप है कि ये लोग लंबे समय से योजनाबद्ध तरीके से खातों से पैसे निकालते रहे और किसी को भनक तक नहीं लगने दी।

बताया जा रहा है कि CSP केंद्र पर आने वाले ग्रामीणों से विभिन्न बहानों से उनके खाते की जानकारी ली जाती थी और फिर धीरे-धीरे उनके खातों से रकम निकाली जाती रही। कई पीड़ितों को तो यह भी नहीं पता था कि उनके खाते से पैसे गायब हो रहे हैं।

घटना का खुलासा तब हुआ जब कुछ महिलाओं ने अपने खातों में बैलेंस कम पाया और इसकी जांच शुरू की। धीरे-धीरे मामला सामने आया और सैकड़ों लोगों ने एक साथ शिकायत करना शुरू कर दिया।

जैसे ही लोगों को घोटाले की पूरी जानकारी मिली, उनका गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क जाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। कई घंटों तक हाईवे पर लंबा जाम लगा रहा, जिससे आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

इस बीच, आरोपी CSP संचालक जुबैर आलम अपने केंद्र पर ताला लगाकर फरार हो गया, जिससे लोगों का शक और गहरा गया। ग्रामीणों का कहना है कि आरोपी पहले से ही फरार होने की तैयारी में था और जैसे ही मामला उजागर हुआ, वह गायब हो गया।

घटना की सूचना मिलते ही रौटा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया और सड़क जाम हटवाया।

पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।

प्रशासन के अनुसार, इस मामले में बैंक रिकॉर्ड, CSP लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है। साइबर और आर्थिक अपराध से जुड़े विशेषज्ञों की भी मदद ली जा सकती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पैसे किस तरह निकाले गए और कहां ट्रांसफर किए गए।

यह घटना ग्रामीण बैंकिंग प्रणाली और CSP केंद्रों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल और ग्रामीण बैंकिंग को सुरक्षित बनाने के लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि इस तरह के घोटालों को रोका जा सके।

स्थानीय लोगों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और पीड़ितों की राशि वापस कराई जाए।

अंततः, यह मामला केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि गरीब और ग्रामीण महिलाओं के भरोसे के साथ बड़ा विश्वासघात है। अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करता है और पीड़ितों को न्याय कब तक मिल पाता है।

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