
पटना। बिहार की राजनीति में महिलाओं के मुद्दे को लेकर जारी बयानबाज़ी के बीच अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने तेजस्वी के हालिया आरोपों को पूरी तरह झूठा, भ्रामक और राजनीतिक हताशा का परिणाम बताते हुए कहा कि जनता द्वारा लगातार नकारे जाने के बाद वे अब अनर्गल बयान देकर सुर्खियां बटोरने की कोशिश कर रहे हैं।
सोमवार को जारी अपने बयान में संजय सरावगी ने कहा कि चुनाव के दौरान पैसे बांटने, मतदाताओं को डराने-धमकाने और मतदान केंद्रों पर कैमरे से निगरानी जैसे आरोप न केवल निराधार हैं, बल्कि हास्यास्पद भी हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि तेजस्वी यादव के पास इन गंभीर आरोपों के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण है या नहीं।
सरावगी ने कहा कि केवल आरोप लगाने से सच्चाई नहीं बदलती। उन्होंने तेजस्वी यादव पर आरोप लगाया कि वे बिना किसी आधार के जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। “यह उनकी पुरानी राजनीतिक शैली रही है—झूठ बोलो, भ्रम फैलाओ और जनता को भटकाओ,” उन्होंने कहा।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आगे कहा कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का राजनीतिक मॉडल ही झूठ, भय और भ्रम पर आधारित रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब-जब बिहार में राजद को शासन का अवसर मिला, तब-तब राज्य को अराजकता, अपराध और भ्रष्टाचार की स्थिति का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि इसके विपरीत एनडीए सरकार ने राज्य में सुशासन और विकास को प्राथमिकता दी है। खासकर महिलाओं के सशक्तिकरण के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक पहल की गई हैं, जिनका सकारात्मक असर समाज के हर वर्ग पर पड़ा है।
संजय सरावगी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई गई हैं। उन्होंने दावा किया कि इन योजनाओं ने महिलाओं के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से “जीविका दीदियों” को आर्थिक मजबूती दी गई है, जिससे लाखों महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं। इसके अलावा, उज्ज्वला योजना के तहत गरीब परिवारों की महिलाओं को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया गया, जिससे उनके जीवन में सुविधा और स्वास्थ्य दोनों में सुधार हुआ है।
सरावगी ने “हर घर नल-जल” योजना का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इससे महिलाओं को पानी लाने की समस्या से काफी हद तक राहत मिली है। पहले जहां महिलाओं को दूर-दूर तक पानी लाने के लिए जाना पड़ता था, वहीं अब घर तक पानी की सुविधा उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि इन सभी प्रयासों का परिणाम है कि आज बिहार की महिलाएं पहले से कहीं अधिक सशक्त और आत्मविश्वासी बन चुकी हैं। वे शिक्षा, रोजगार और प्रशासनिक सेवाओं में अपनी भागीदारी बढ़ा रही हैं।
भाजपा नेता ने यह भी दावा किया कि यही कारण है कि बिहार की महिलाएं एनडीए के साथ मजबूती से खड़ी हैं और सरकार की नीतियों पर भरोसा जता रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार की राजनीति में महिलाओं का वोट बैंक बेहद अहम है और सभी दल इसे अपने पक्ष में करने की कोशिश करते हैं। ऐसे में महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर इस तरह की बयानबाज़ी का चुनावी प्रभाव भी पड़ सकता है।
सरावगी ने अंत में कहा कि राजनीति में स्वस्थ बहस होनी चाहिए, लेकिन बिना प्रमाण के आरोप लगाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। उन्होंने तेजस्वी यादव से अपील की कि वे तथ्यों के आधार पर राजनीति करें और जनता को भ्रमित करने से बचें।
इस बयान के बाद बिहार की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है। एक ओर विपक्ष सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्तापक्ष अपनी उपलब्धियों का हवाला देकर जवाब दे रहा है।
अंततः, यह स्पष्ट है कि महिलाओं के मुद्दे को लेकर बिहार में राजनीतिक तापमान बढ़ा हुआ है। आने वाले दिनों में यह बहस और तेज होगी, क्योंकि यह विषय सीधे तौर पर बड़ी आबादी और उनके भविष्य से जुड़ा हुआ है।


