
बिहटा (पटना)। सरकारी दफ्तरों में लेटलतीफी और कामचोरी के खिलाफ पटना जिला प्रशासन ने अब बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। सोमवार को जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने बिहटा प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय का औचक निरीक्षण कर प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया। इस औचक छापेमारी के दौरान अनुशासनहीनता और अनधिकृत रूप से ड्यूटी से गायब रहने वाले 9 कर्मियों पर तत्काल गाज गिरी है। जिलाधिकारी ने इन सभी कर्मियों का वेतन रोकने का आदेश देते हुए उनसे स्पष्टीकरण की मांग की है। यह कार्रवाई उन कर्मचारियों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो जनता की सेवा के बजाय अपनी मनमर्जी से दफ्तर आते-जाते हैं। जिलाधिकारी के इस कड़े तेवर ने यह साफ कर दिया है कि सुशासन के दावों के बीच अब जवाबदेही तय करने का वक्त आ गया है।
निरीक्षण के दौरान हकीकत आई सामने: गायब मिले कर्मी
पटना जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम जब सोमवार को अचानक बिहटा प्रखंड कार्यालय पहुंचे, तो वहां का नजारा प्रशासनिक सक्रियता की पोल खोल रहा था। उन्होंने एक-एक कर विभिन्न पटलों और कार्यालयों का मुआयना किया। जांच के दौरान पाया गया कि 9 कर्मचारी बिना किसी सूचना या आधिकारिक अनुमति के अपनी सीटों से गायब थे। सरकारी सेवा की मर्यादाओं का उल्लंघन मानते हुए जिलाधिकारी ने तुरंत इन सभी के वेतन भुगतान पर रोक लगाने का निर्देश जारी कर दिया।
इतना ही नहीं, एक अन्य कर्मचारी का व्यवहार और आचरण सरकारी सेवा नियमावली के विपरीत पाया गया। उस कर्मी की कार्यशैली को लेकर जिलाधिकारी ने गंभीर नाराजगी जताई और उसे चेतावनी देते हुए ‘कारण-पृच्छा’ (Show-cause) जारी करने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सरकारी दफ्तरों में कर्मियों की मौजूदगी केवल उपस्थिति पंजी तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनका आचरण भी आम जनता के प्रति संवेदनशील और मर्यादित होना अनिवार्य है।
जनता की फरियाद और ऑन-स्पॉट समाधान
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी केवल फाइलों की जांच तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने वहां अपनी समस्याओं को लेकर आए आम नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित किया। प्रखंड परिसर में मौजूद लोगों के पास जाकर उन्होंने उनका फीडबैक लिया कि कार्यालय की सेवाएं उन्हें कैसे मिल रही हैं।
आम लोगों ने अपनी समस्याओं—विशेषकर जमीन से जुड़े विवादों, प्रमाणपत्रों की प्राप्ति में हो रही देरी और सरकारी योजनाओं के लाभ मिलने में आ रही बाधाओं—के बारे में विस्तार से जिलाधिकारी को अवगत कराया। डॉ. त्यागराजन एसएम ने लोगों की शिकायतों को न केवल धैर्यपूर्वक सुना, बल्कि मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को बुलाकर कई समस्याओं का ऑन-स्पॉट समाधान भी सुनिश्चित किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जो मामले छोटे स्तर पर हल हो सकते हैं, उनके लिए जनता को बार-बार कार्यालय का चक्कर न कटवाया जाए।
विकास योजनाओं और जनगणना की विस्तृत समीक्षा
प्रखंड कार्यालय के सभागार में जिलाधिकारी ने विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों और भविष्य की बड़ी परियोजनाओं की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की। इस बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा हुई:
- जनगणना 2027: आगामी जनगणना की तैयारियों को लेकर जिलाधिकारी ने प्रखंड और अंचल स्तर पर किए जा रहे कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की नियुक्ति में पूरी सावधानी बरती जाए ताकि डेटा संकलन में कोई त्रुटि न हो।
- सात निश्चय-3: राज्य सरकार की प्राथमिकता वाली योजना ‘सात निश्चय-3’ के तहत चल रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि इन योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पारदर्शिता के साथ पहुँचना चाहिए।
- दाखिल-खारिज और परिमार्जन: अंचल कार्यालय की कार्यशैली में सबसे ज्यादा शिकायतें जमीन के दाखिल-खारिज और परिमार्जन को लेकर आती हैं। जिलाधिकारी ने लंबित आवेदनों की संख्या देख नाराजगी जताई और अंचल अधिकारी को निर्देश दिया कि वे खुद बैठकर इन मामलों का निष्पादन कराएं।
- एलपीजी आपूर्ति: रसोई गैस की उपलब्धता, बुकिंग और समय पर आपूर्ति की स्थिति की भी समीक्षा की गई ताकि उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की किल्लत का सामना न करना पड़े।
- ईज ऑफ लिविंग: ‘ईज ऑफ लिविंग’ के तहत जन संवाद कार्यक्रमों के आयोजन का निर्देश दिया गया ताकि सरकार और जनता के बीच की दूरी कम हो सके।
पारदर्शिता और संवेदनशीलता का संदेश
जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने उपस्थित पदाधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि जनहित के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन की कार्यशैली में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व का होना सुशासन की पहली शर्त है। आम जनता के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाना अधिकारियों का नैतिक और कानूनी कर्तव्य है।
उन्होंने दानापुर के अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) को विशेष निर्देश दिया कि वे बिहटा प्रखंड की योजनाओं और वहां चल रहे प्रशासनिक कार्यों का नियमित अनुश्रवण (Monitoring) करें। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में दोबारा किए जाने वाले निरीक्षण के दौरान वही खामियां पाई गईं, तो संबंधित विभाग के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ और भी कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।


